जर्मनी में बाजी पलटी: ओलफ शोल्ज के चांसलर बनने की संभावना हुई मजबूत, जनमत सर्वेक्षणों में उनके पक्ष में दिखे रूझान
विश्लेषकों के मुताबिक एसपीडी को महीनों तक सर्वेक्षणों में 15 से 17 फीसदी समर्थन मिलता रहा। इस तरह वह न सिर्फ सीडीयू-सीएसयू गठबंधन, बल्कि ग्रीन पार्टी से भी पीछे चल रही थी। शुरुआत में माना जा रहा था कि चांसलर पद के लिए मुकाबला सीएसयू के अरमिन लैशेट और ग्रीन पार्टी की अनालेना बेयरबॉक के बीच है...
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क्या अंगेला मैर्केल के बाद ओलफ शोल्ज जर्मनी के नए चांसलर बनेंगे? हाल में जनमत सर्वेक्षणों में दिखे रूझान के कारण अब शोल्ज के नाम की चर्चा गंभीरता से होने लगी है। शोल्ज सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (एसपीडी) के नेता हैं। पहले उनकी संभावना ज्यादा नहीं मानी जा रही थी। शुरुआत में ग्रीन पार्टी को सबसे आगे बताया गया था। लेकिन बाद के जनमत सर्वेक्षणों में ये पार्टी मैर्केल की क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक पार्टी (सीडीयू) से पिछड़ गई। तब माना गया कि सीडीयू के अरमिन लैशेट अगले चांसलर बनेंगे।
शोल्ज ने सोमवार को जर्मनी के दक्षिणी शहर कार्लस्रुहे में एक जनसभा में कहा- ‘जनमत सर्वेक्षण बहुत अच्छे आ रहे हैं। मुझे यह जानकर बहुत अच्छा लग रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में लोग चांसलर पद के लिए मुझमें भरोसा जता रहे हैं।’ रविवार को जारी ताजा जनमत सर्वेक्षण में एसपीडी को 22 फीसदी समर्थन मिलता दिखाया गया। सीडीयू और उसके सहयोगी दल क्रिश्चियन सोशल यूनियन (सीएसयू) को भी साझा तौर पर इतना ही समर्थन मिलता बताया गया। लेकिन पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया कि सीडीयू-सीएसयू गठबंधन की लोकप्रियता में लगातार गिरावट आ रही है। इसका फायदा एसपीडी को मिल रहा है।
शोल्ज ने कहा कि अब समय आ गया है कि जब सीडीयू और सीएसयू विपक्ष की जिम्मेदारी संभालें। शोल्ज ने आर्थिक गैर-बराबरी से निपटने को अपना मुख्य मुद्दा बनाया है। साथ ही वे जलवायु परिवर्तन रोकने का वादा कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि कंजरवेटिव पार्टियों ने जलवायु परिवर्तन की समस्या को गंभीरता से नहीं लिया है।
विश्लेषकों के मुताबिक एसपीडी को महीनों तक सर्वेक्षणों में 15 से 17 फीसदी समर्थन मिलता रहा। इस तरह वह न सिर्फ सीडीयू-सीएसयू गठबंधन, बल्कि ग्रीन पार्टी से भी पीछे चल रही थी। शुरुआत में माना जा रहा था कि चांसलर पद के लिए मुकाबला सीएसयू के अरमिन लैशेट और ग्रीन पार्टी की अनालेना बेयरबॉक के बीच है। गौरतलब है कि इस बार मैर्केल उम्मीदवार नहीं हैं। 16 साल तक चांसलर रहने के बाद अब उन्होंने राजनीति से संन्यास लेने का फैसला किया है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक अरमिन लैशेट को चुनाव अभियान के दौरान कई गलतियां करने का खामियाजा भुगताना पड़ रहा है। हाल में जब जर्मनी में भीषण बाढ़ आई, तब बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए हुए एक कार्यक्रम के दौरान लैशेट हंसते हुए देखे गए। वह वीडियो देशभर में वायरल हुआ था। उधर ग्रीन पार्टी का समर्थन अब घट कर 17 फीसदी रह गया है, जो एक समय 26 फीसदी तक पहुंच गया था। जर्मनी में आम चुनाव के लिए मतदान 26 सितंबर को होगा।
शोल्ज ये आरंभ से कहते रहे हैं कि जब चुनाव अभियान जोर पकड़ेगा, तब मतदाता इसे महसूस करेंगे कि उनके सामने मौजूद विकल्पों के बीच वे ही सबसे ज्यादा अनुभवी हैं। एसपीडी वर्तमान सरकार में सीडीयू-सीएसयू के साथ गठबंधन में रही है। मैर्केल की सरकार में शोल्ज वित्त मंत्री हैं। पर्यवेक्षकों के मुताबिक ताजा अफगान संकट का लाभ भी शोल्ज को मिल रहा है। जनमत सर्वे में 39 फीसदी मतदाताओं ने कहा कि शोल्ज के पास ऐसे संकट से निपटने का अनुभव है। जबकि लैशेट और बेयरबॉक के बारे में ऐसी राय सिर्फ 16-16 फीसदी मतदाताओं ने जताई।