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West Asia: होर्मुज से इतर रास्तों की तलाश में तेल-गैस निर्यातक, नए मार्ग बनाने की दिशा में बढ़ रहे खाड़ी देश
Fri, 24 Apr 2026 04:16 AM IST
Nirmal Kant
अमर उजाला नेटवर्क, वाशिंगटन/दुबई/तेहरान।
अमर उजाला नेटवर्क, वाशिंगटन/दुबई/तेहरान।
Published by: Nirmal Kant
Updated Fri, 24 Apr 2026 04:16 AM IST
सार
West Asia: होर्मुज जलडमरूमध्य बाधित होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है और खाड़ी देश अब दूसरे रास्तों पर तेजी से फोकस दे रहे हैं। मौजूदा पाइपलाइन विकल्प सीमित क्षमता के कारण जरूरत पूरी नहीं कर पा रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस स्थिति से लंबे समय में नए स्थायी निर्यात मार्ग विकसित हो सकते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
होर्मुज जलडमरूमध्य के लगभग बंद होने के बाद पश्चिम एशिया के तेल और गैस उत्पादक देश वैकल्पिक निर्यात मार्गों की तलाश में तेजी से जुट गए हैं। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का प्रवाह जिस समुद्री मार्ग से होता था, उसके बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति संकट गहरा गया है।
सऊदी अरब और यूएई के पास कुछ वैकल्पिक पाइपलाइनें हैं, लेकिन उनकी क्षमता होर्मुज के मुकाबले बहुत कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान द्वारा होर्मुज को रणनीतिक दबाव के औजार के रूप में इस्तेमाल करना लंबे समय में उसी के प्रभाव को कमजोर कर सकता है, क्योंकि खाड़ी देश अब स्थायी रूप से नए निर्यात मार्ग विकसित करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम-एशिया के तेल और गैस उत्पादक देश अपने निर्यात के लिए वैकल्पिक मार्गों की तलाश में जुटे हैं, क्योंकि होर्मुज अब भी व्यावसायिक यातायात के लिए लगभग बंद है। अमेरिका-ईरान इस जलमार्ग को शांति वार्ताओं में दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
वर्षों से था खतरा पर निवेश टलता रहा
अटलांटिक काउंसिल की वरिष्ठ सलाहकार मैसून काफाफी के अनुसार, होर्मुज से जुड़े जोखिम दशकों से ज्ञात थे। यह दुनिया का सबसे अधिक अध्ययन किया गया ऊर्जा चोकपॉइंट रहा है। लेकिन इतने बड़े निवेश को उचित ठहराने लायक नहीं माने गए। यह माना जाता था कि कोई भी पक्ष पूर्ण बंदी जैसा कदम नहीं उठाएगा, क्योंकि उसकी कीमत बहुत अधिक होगी।
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ये भी पढ़ें: ट्रंप बोले- ईरान से जंग खत्म करने की जल्दबाजी नहीं, बातचीत जारी; परमाणु हथियार के इस्तेमाल पर क्या कहा?
वैकल्पिक क्षमता बेहद कम
सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और यूएई की हबशान-फुजैराह होर्मुज को बायपास करती हैं। सऊदी की पाइपलाइन फारस की खाड़ी को लाल सागर से जोड़ती है, जबकि यूएई की पाइपलाइन फुजैराह बंदरगाह तक जाती है। इन दोनों की संयुक्त अतिरिक्त क्षमता लगभग 3.5 से 5.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन है, यह क्षमता होर्मुज से पहले गुजरने वाले लगभग 20 मिलियन बैरल प्रतिदिन के मुकाबले बहुत कम है।
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सऊदी अरब और यूएई के पास कुछ वैकल्पिक पाइपलाइनें हैं, लेकिन उनकी क्षमता होर्मुज के मुकाबले बहुत कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान द्वारा होर्मुज को रणनीतिक दबाव के औजार के रूप में इस्तेमाल करना लंबे समय में उसी के प्रभाव को कमजोर कर सकता है, क्योंकि खाड़ी देश अब स्थायी रूप से नए निर्यात मार्ग विकसित करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम-एशिया के तेल और गैस उत्पादक देश अपने निर्यात के लिए वैकल्पिक मार्गों की तलाश में जुटे हैं, क्योंकि होर्मुज अब भी व्यावसायिक यातायात के लिए लगभग बंद है। अमेरिका-ईरान इस जलमार्ग को शांति वार्ताओं में दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
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वर्षों से था खतरा पर निवेश टलता रहा
अटलांटिक काउंसिल की वरिष्ठ सलाहकार मैसून काफाफी के अनुसार, होर्मुज से जुड़े जोखिम दशकों से ज्ञात थे। यह दुनिया का सबसे अधिक अध्ययन किया गया ऊर्जा चोकपॉइंट रहा है। लेकिन इतने बड़े निवेश को उचित ठहराने लायक नहीं माने गए। यह माना जाता था कि कोई भी पक्ष पूर्ण बंदी जैसा कदम नहीं उठाएगा, क्योंकि उसकी कीमत बहुत अधिक होगी।
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वैकल्पिक क्षमता बेहद कम
सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और यूएई की हबशान-फुजैराह होर्मुज को बायपास करती हैं। सऊदी की पाइपलाइन फारस की खाड़ी को लाल सागर से जोड़ती है, जबकि यूएई की पाइपलाइन फुजैराह बंदरगाह तक जाती है। इन दोनों की संयुक्त अतिरिक्त क्षमता लगभग 3.5 से 5.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन है, यह क्षमता होर्मुज से पहले गुजरने वाले लगभग 20 मिलियन बैरल प्रतिदिन के मुकाबले बहुत कम है।
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