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ओआईसी की बैठक: तालिबान सरकार को नहीं दी औपचारिक मान्यता, आधिकारिक तस्वीर से मुत्तकी बाहर
Tue, 21 Dec 2021 02:31 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, इस्लामाबाद
एजेंसी, इस्लामाबाद
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 21 Dec 2021 02:31 AM IST
सार
ओआईसी ने अफगानिस्तान के शासकों से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों के तहत महिलाओं, बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों और विशेष जरूरत वाले लोगों के अधिकारों के संबंध में नियमों का पालन करने का भी आग्रह किया। ओआईसी की बैठक में अफगानिस्तान की नई तालिबान सरकार को किसी भी तरह से औपचारिक अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं दी गई।
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अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी
- फोटो : Twitter@zainab_moh14
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विस्तार
इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) ने भूख और गरीबी के बड़े संकट का सामना कर रहे अफगानिस्तान के लिए मानवीय ट्रस्ट फंड स्थापित करने का संकल्प लिया है। पाकिस्तान में ओआईसी के 57 में से सिर्फ 20 विदेश मंत्रियों की बैठक में यह प्रस्ताव रखा गया कि इस्लामी विकास बैंक 2022 की पहले तिमाही तक मदद देने की कोशिशों का नेतृत्व करेगा।
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ओआईसी ने अफगानिस्तान के शासकों से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों के तहत महिलाओं, बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों और विशेष जरूरत वाले लोगों के अधिकारों के संबंध में नियमों का पालन करने का भी आग्रह किया। ओआईसी की बैठक में अफगानिस्तान की नई तालिबान सरकार को किसी भी तरह से औपचारिक अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं दी गई। यही नहीं, बल्कि सम्मेलन के दौरान ली गई आधिकारिक तस्वीर से अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी को बाहर रखा गया।
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हालांकि मुत्तकी ने कहा कि मौजूदा अफगानिस्तान सरकार हर विदेशी संगठन के साथ सहयोग कर रही है इसलिए उस पर लगे प्रतिबंध हटाए जाना चाहिए। मुत्तकी ने ओआईसी सदस्यों के आगे देश को मदद और नकदी की सख्त जरूरत पर बल दिया।
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विदेशों में फ्रीज 10 अरब डॉलर की संपत्ति मुक्त करें
अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी ने कहा, तालिबान सरकार को कमजोर करने से किसी को फायदा नहीं होगा। उन्होंने विदेशी सहायता बंद होने और कोरोना तथा सूखे से देश के हालात खराब होने का हवाला देते हुए अमेरिका, विश्व बैंक, एशियाई बैंकों और आईएमएफ से मिलने वाली विदेशी मदद जारी करने तथा विदेशों में फ्रीज की गई करीब 10 अरब डॉलर की संपत्ति को मुक्त करने की भी अपील की।
इमरान के बयान पर करजई का पलटवार
अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति ने पाकिस्तान के पीएम इमरान खान पर पलटवार करते हुए कहा है कि अफगानिस्तान में अस्थिरता और अशांति पाक के अवांछित दखल की वजह से है। अगर इस्लामाबाद वहां हस्तक्षेप करना बंद कर दे तो हालात अपने आप सुधर जाएंगे। इमरान खान ने आईओसी की बैठक में कहा था कि उनके देश को अफगानिस्तान में सक्रिय आईएस के हमलों का खतरा है।
करजई ने एक बयान में सोमवार को कहा, यह टिप्पणी सच नहीं है और अफगानिस्तान के खिलाफ झूठा प्रचार भर है। असल में अफगानिस्तान शुरुआत से ही पाकिस्तान के दाएश का खतरा झेल रहा है। करजई ने कहा कि पाक को अफगानिस्तान के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देना चाहिए। इस्लामाबाद को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अफगानिस्तान का प्रवक्ता बनकर बोलना बंद करना चाहिए। एजेंसी
इमरान ने फिर अलापा कश्मीर राग
नकदी संकट समेत कई दिक्कतों से जूझ रहे पाक पीएम इमरान खान ने एक बार फिर ओआईसी बैठक में कश्मीर का राग अलापा। खान ने फलस्तीन व कश्मीर में मानवाधिकार का मुद्दा उठाकर एकीकृत योजना बनाने की अपील की। विशेषज्ञों ने कहा, मानवीय एजेंडे के आड़ में पाकिस्तान खुद मानवाधिकार के मोर्चे पर बहुत कम प्रगति किया है। ऐसे में उसकी कोशिश अफगानिस्तान में तालिबान को वैश्विक मान्यता दिलाने की है। इमरान ने मानवीय एजेंडे की आड़ में राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस मंच का इस्तेमाल किया है। जबकि भारत पहले ही कह चुका है कि कश्मीर उसका अभिन्न अंग है।
बांग्लादेश ने की मदद की घोषणा
अफगानिस्तान में जारी मानवीय संकट के बीच बांग्लादेश ने यहां के लोगों को भोजन और दवा के लिए सहायता पैकेज की घोषणा की है। यह घोषणा ओआईसी बैठक के दौरान की गई। विदेश मंत्री मसूद बिन मोमेन ने कहा कि आगामी सर्दियों में अफगानों की हालत और भी खराब हो सकती है। ऐसे में उन्हें मानवीय मदद की सर्वाधिक जरूरत है।