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Hajj 2024: सऊदी अरब में गर्मी का कहर या लापरवाही? मक्का में हज के लिए गए एक हजार जायरीनों की हुई मौत
Sun, 23 Jun 2024 03:18 PM IST
काव्या मिश्रा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काहिरा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काहिरा
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Sun, 23 Jun 2024 03:18 PM IST
सार
सऊदी के राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने इस सप्ताह की शुरुआत में मक्का की ग्रैंड मस्जिद में 51.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया था। क्षेत्र में तापमान हर दशक में 0.4 डिग्री सेल्सियस बढ़ रहा है।
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हज यात्रा पर भारी पड़ रही गर्मी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इस साल की हज यात्रा सऊदी अरब की भीषण गर्मी की वजह से जायरीनों के लिए मुश्किल भरी रही। इस साल हज के दौरान होने वाली मौतों का आंकड़ा 1,000 को पार कर गया है। जैसे-जैसे मरने वालों की संख्या बढ़ रही है, वैसे ही ये सवाल भी उठ रहा है कि सऊदी अरब में हुई इन मौतों के लिए किसे जिम्मेदार माना जाए।
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16 ट्रैवल एजेंसियों पर गिरी गाज
काहिरा के दो अधिकारियों ने बताया कि मरने वालों में आधे से ज्यादा मिस्र के लोग थे। वहीं, मिस्र ने 16 ट्रैवल एजेंसियों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं, जो बिना पंजीकरण कराए जायरीनों को सऊदी अरब की यात्रा करने में मदद करती थीं। हालांकि, सऊदी अरब ने हज की यात्रा के दौरान हुई मौतों पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
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मिस्र में हुईं इतनी मौतें
मिस्र सरकार ने इस साल हज के दौरान पुरानी बीमारियों के कारण 31 जायरीनों की मौत की जानकारी दी। हालांकि, एक कैबिनेट अधिकारी ने बताया कि हज यात्रा के दौरान कम से कम 630 अन्य मिस्रियों की मौत हो गई, जिनमें से अधिकतर की मौत मक्का के अल-मुआइसम इलाके में आपातकालीन परिसर में हुई। इसकी पुष्टि करते हुए मिस्र के एक राजनयिक ने कहा कि ज्यादातर मृतकों को सऊदी अरब में दफनाया गया है। अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर यह जानकारी दी।
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सऊदी अधिकारियों ने बिना पंजीकरण वाले जायरीनों पर नकेल कसी। हजारों लोगों की यात्रा पर रोक लगा दी। हालांकि, कई खासकर मिस्रवासी मक्का और उसके आसपास पवित्र स्थलों तक पहुंचने में कामयाब रहे। कुछ ने मक्का तक पहुंचने के लिए पैदल यात्रा की। इन लोगों के पास प्रचंड गर्मी से बचने के लिए न तो कोई होटल था और न ही कुछ अन्य विकल्प।
सरकार ने कहा कि 16 ट्रैवल एजेंसियां जायरीनों को पर्याप्त सेवाएं देने में नाकामयाब रहीं। वहीं, इन एजेंसियों ने अवैध रूप से जायरीनों को सऊदी अरब की यात्रा पर भेजा। इसके लिए ऐसे वीजा का उपयोग किया गया जो धारकों को मक्का की यात्रा करने की अनुमति नहीं देता।
भारत के कितने लोगों की गई जान?
सरकार ने यह भी बताया कि कंपनियों के अधिकारियों को जांच के लिए लोक अभियोजक के पास भेजा गया है। मृतकों में इंडोनेशिया के 165, भारत के 98 और जॉर्डन, ट्यूनीशिया, मोरक्को, अल्जीरिया और मलेशिया के दर्जनों जायरीन शामिल हैं। दो अमेरिकी जायरीनों के भी मारे जाने की खबर है।
50 डिग्री के पार तापमान
सऊदी के राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने इस सप्ताह की शुरुआत में मक्का की ग्रैंड मस्जिद में 51.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया था। पिछले महीने प्रकाशित एक सऊदी स्टडी के अनुसार, क्षेत्र में तापमान हर दशक में 0.4 डिग्री सेल्सियस बढ़ रहा है।
क्या है मौतों की वजह?
एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल हज यात्रियों की मौतों के पीछे का मुख्य कारण गर्मी है। कुछ लोगों के अनुसार रहने की व्यवस्था ठीक नहीं थी और टेंटों में जरूरत से ज्यादा लोगों को रखा गया, जहां कूलिंग के ठीक इंतजाम नहीं थे। वहीं बिना पंजीकरण कराए आए जायरीनों को वातानुकूलित टेंट बसों जैसी सुविधाएं नहीं मिल पाईं।