Pakistan: टीटीपी के अड्डों पर पाकिस्तान ने किया हमला, तो तालिबान से उसका छिड़ेगा युद्ध?
Pakistan: पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) ने 30 दिसंबर को हुई बैठक के बाद से इस्लामाबाद में अधिकारियों यह संकेत दिया है कि पाकिस्तानी सेना बिना सीमा की परवाह किए टीटीपी के अफगानिस्तान स्थित अड्डों पर हमला कर सकती है...
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आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के अड्डों पर हमला करने की शहबाज शरीफ सरकार की धमकी के बाद अफगानिस्तान में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा बढ़ गया है। पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) ने 30 दिसंबर को हुई बैठक के बाद से इस्लामाबाद में अधिकारियों यह संकेत दिया है कि पाकिस्तानी सेना बिना सीमा की परवाह किए टीटीपी के अफगानिस्तान स्थित अड्डों पर हमला कर सकती है।
एनएससी की बैठक में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल असीम मुनीर ने भी भाग लिया था। बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया था कि पाकिस्तान के लिए खतरा पैदा करने वाले आतंकवादियों को पनाह देने की इजाजत किसी देश को नहीं दी जाएगी। इस बैठक से ठीक पहले पाकिस्तान के गृह मंत्री राना सनाउल्लाह ने कहा था कि अगर काबुल स्थित तालिबान सरकार ने टीटीपी को पनाह देना जारी रखा, तो पाकिस्तान की सेना अफगानिस्तान के अंदर जाकर इस आंतकवादी संगठन के अड्डों पर हमला करेगी। तब तालिबान सरकार ने सनाउल्लाह के बयान को ‘भड़काऊ’ बताया था और कहा था कि वह अपनी प्रादेशिक अखंडता की रक्षा करेगी।
तमाम ऐसे संकेत हैं कि टीटीपी के हाल में बढ़े हमलों के कारण पाकिस्तान सरकार गहरे दबाव में है। शुक्रवार को दक्षिणी वजीरीस्तान प्रांत के वाना में हजारों लोगों ने आतंकवादियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग करते हुए जुलूस निकाला। कुछ विश्लेषकों ने कहा है कि पाकिस्तान सरकार देश की अंदरूनी अस्थिरता और आर्थिक संकट के बीच अफगानिस्तान के खिलाफ एक नया मोर्चा नहीं खोलना चाहती है, लेकिन उसके हाथ बंधते जा रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक ताजा आकलन में कहा गया है कि अफगानिस्तान में पनाह लिए समूहों के बीच टीटीपी अब सबसे बड़ा आतंकवादी गुट बन गया है। इससे जुड़े दहशतगर्दों की संख्या तीन से चार हजार तक पहुंच गई है।
विश्लेषकों के मुताबिक पाकिस्तान सरकार को अहसास है कि टीटीपी के अड्डों पर हमला करने का सीधा मतलब काबुल स्थित तालिबान सरकार से टकराव मोल लेना होगा। सिंगापुर स्थित एस राजारत्नम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में रिसर्च फेलॉ अब्दुल बासित ने कहा है- ‘अगर पाकिस्तान ने आतंकवाद विरोधी कार्रवाई शुरू की, तो पाकिस्तान और तालिबान के संबंधों का और बिगड़ना तय है।’
मगर इस्लामाबाद स्थित एक आतंकवाद विरोधी अधिकारी ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘पाकिस्तान के पास आतंकवाद विरोधी कार्रवाई चलाने के लिए जरूरी धन और तकनीकी कौशल नहीं है। पाकिस्तान टीटीपी के खतरे का तभी मुकाबला कर सकता है, अगर अमेरिका से उसे सहायता मिले।’ जानकारों के मुताबिक अमेरिका ऐसी सहायता देने के लिए तैयार दिख रहा है। हाल के महीनों में पाकिस्तान के प्रति उसका रुख नरम हुआ है। बीते एक दिसंबर को उसने टीटीपी के उप प्रमुख कारी अमजद को अपनी आतंकवादियों की सूची में शामिल कर लिया। दिसंबर के मध्य में अमेरिका की सेंट्रल कमान के प्रमुख जनरल माइकल कुरिला ने पाकिस्तान की यात्रा की और सेनाध्यक्ष जनरल मुनीर सहित दूसरे अधिकारियों से वहां राय-मशविरा किया।
वेबसाइट निक्कई एशिया से बातचीत में अब्दुल बासित ने ध्यान दिलाया कि अमेरिका ने पिछले साल पाकिस्तान को एफ-16 लड़ाकू विमानों को अपग्रेड करने में भी मदद दी थी। उन्होंने कहा- ‘लेकिन इन संकेतों से टीटीपी और तालिबान के हलकों में यह धारणा गहराएगी कि अमेरिका ने पाकिस्तान को मोहरा बना कर उनके खिलाफ अभी भी अपना युद्ध जारी रखा है।’ इससे पाकिस्तान पर उनके हमले और तेज हो सकते हैं।