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Russia: चीनी विदेश मंत्री से मिले एनएसए अजीत डोभाल, सीमा तनाव पर की दो-टूक बात
Thu, 12 Sep 2024 09:16 PM IST
प्रणय उपाध्याय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को
Published by: प्रणय उपाध्याय
Updated Thu, 12 Sep 2024 09:16 PM IST
सार
बीते एक महीनों के दौरान चीन के विदेश मंत्री के साथ भारत की यह तीसरी उच्च स्तरीय बैठक थी। इससे पहले कजाखिस्तान के अस्ताना में और फिर लाओस के विएनियाना में विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर की उनसे मुलाकात हुई थी।
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अजीत डोभाल
- फोटो : ANI
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विस्तार
रूस के शहर सेंट पीटर्सबर्ग में आज भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी की अहम मुलाकात हुई। इस मुलाकात के दौरान अहम मुद्दा था वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बीते चार सालों से जारी तनाव। दोनों पक्षों ने तय किया कि सरहद पर सैन्य तनाव जल्द कम करने और आमने-सामने की मोर्चाबंदी खत्म करने के लिए प्रयास दोगुना करने पर सहमति जताई है।
इस मुलाकात के बाद विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के मुताबिक ब्रिक्स देशों के एनएसए की बैठक के हाशिए पर हुए इस मुलाकात में भारतीय एनएसए अजीत डोभाल ने चीनी समकक्ष से कहा कि दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाने के लिए जरूरी है कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता के साथ साथ एलएसी के प्रति सम्मान बरकरार रखा जाए।
एनएसए अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी भारत-चीन सीमा विवाद निपटाने के लिए बने स्थाई प्रतिनिधि स्तर वार्ता तंत्र की भी अगुवाई करते हैं। हालांकि जून 2020 में हुए गलवान घाटी विवाद के बाद से इस तंत्र की बैठक केवल एक बार ही हो पाई है। हालांकि बहुपक्षीय बैठकों के मंच पर भारत के एनएसए और उनके चीनी समकक्ष कई बार मिलते रहे हैं। इससे पहले चीनी विदेश मंत्री की मुलाकात एनएसए डोभाल से जुलाई 2023 और सितंबर 2022 में भी हुई थी।
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बीते एक महीनों के दौरान चीन के विदेश मंत्री के साथ भारत की यह तीसरी उच्च स्तरीय बैठक थी। इससे पहले कजाखिस्तान के अस्ताना में और फिर लाओस के विएनियाना में विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर की उनसे मुलाकात हुई थी। सेंट पीटर्सबर्ग में एलएसी तनाव घटाने पर एनएसए डोभाल और वांग यी की बातचीत के बीच ही एक अहम बयान विदेश मंत्री जयशंकर का भी आया जिसमें उन्होंने कहा कि लद्दाख में आमने-सामने की मोर्चाबंदी को करीब 75 प्रतिशत तक सुलझा लिया गया है। उन्होंने कहा कि लगातार जारी बातचीत और प्रयासों से हालात को सामान्य बनाने की कोशिशें चल रही हैं।
जानकारों के मुताबिक ताजा भारत-चीन वार्ताओं सिलसिला रूस के कजान में 22-24 अक्टूबर 2024 को होने वाली ब्रिक्स शिखर बैठक से पहले प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति की मुलाकात की जमीन तैयार करना है। दोनों नेता ब्रिक्स शिखर बैठक के लिए रूस में होंगे और अगर चीनी सेना एलएसी पर अप्रैल 2020 की स्थिति में लौट जाती है तो यह तनाव कम सीमा तनाव का पारा कम करेगा।
दोनों देशों के बीच सीमा तनाव का पारा गलवान घाटी टकराव से बढ़ा था। जून 15, 2020 को भारत और चीन के सैनिकों के बीच पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में खूनी संघर्ष हुआ था। इसमें एक कर्नल रैंक अधिकारी समेत भारत के 20 जांबाज शहीद हुए थे। लेकिन इससे कहीं ज्यादा नुकसान चीन को भी उठाना पड़ा था।
हालांकि उसके बाद से भारत ने चीनी सेना की मोर्चाबंदी का उसी भाषा में जवाब देते हुए आमने-सामने की तैनाती कर दी थी। साथ ही कई स्तर पर सैन्य मोर्चाबंदी और हथियार तैनाती को भी बढ़ाया गया था।
भारत और चीन के बीच 3088 किमी की वास्तविक नियंत्रण रेखा में से 3500 किमी से अधिक का इलाका विवादित और अस्पष्ट है जिसको लेकर दोनों पक्षों के दावे हैं। सीमा विवाद सुलझाने को लेकर उच्च स्तरीय वार्ता के लिए सीनियर रिप्रजेंटेटिव डायलॉग की व्यवस्था है जिसमें भारत के मौजूदा प्रतिनिधि एनएसए अजीत डोभाल हैं औऱ चीन का प्रतिनिधित्व वांग यी करते हैं। इस तंत्र की अबतक 22 बैठकें हो चुकी हैं। लेकिन सीमा विवाद निपटारे के फिलहाल कही भी करीब नहीं है।
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इस मुलाकात के बाद विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के मुताबिक ब्रिक्स देशों के एनएसए की बैठक के हाशिए पर हुए इस मुलाकात में भारतीय एनएसए अजीत डोभाल ने चीनी समकक्ष से कहा कि दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाने के लिए जरूरी है कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता के साथ साथ एलएसी के प्रति सम्मान बरकरार रखा जाए।
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एनएसए अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी भारत-चीन सीमा विवाद निपटाने के लिए बने स्थाई प्रतिनिधि स्तर वार्ता तंत्र की भी अगुवाई करते हैं। हालांकि जून 2020 में हुए गलवान घाटी विवाद के बाद से इस तंत्र की बैठक केवल एक बार ही हो पाई है। हालांकि बहुपक्षीय बैठकों के मंच पर भारत के एनएसए और उनके चीनी समकक्ष कई बार मिलते रहे हैं। इससे पहले चीनी विदेश मंत्री की मुलाकात एनएसए डोभाल से जुलाई 2023 और सितंबर 2022 में भी हुई थी।
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बीते एक महीनों के दौरान चीन के विदेश मंत्री के साथ भारत की यह तीसरी उच्च स्तरीय बैठक थी। इससे पहले कजाखिस्तान के अस्ताना में और फिर लाओस के विएनियाना में विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर की उनसे मुलाकात हुई थी। सेंट पीटर्सबर्ग में एलएसी तनाव घटाने पर एनएसए डोभाल और वांग यी की बातचीत के बीच ही एक अहम बयान विदेश मंत्री जयशंकर का भी आया जिसमें उन्होंने कहा कि लद्दाख में आमने-सामने की मोर्चाबंदी को करीब 75 प्रतिशत तक सुलझा लिया गया है। उन्होंने कहा कि लगातार जारी बातचीत और प्रयासों से हालात को सामान्य बनाने की कोशिशें चल रही हैं।
जानकारों के मुताबिक ताजा भारत-चीन वार्ताओं सिलसिला रूस के कजान में 22-24 अक्टूबर 2024 को होने वाली ब्रिक्स शिखर बैठक से पहले प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति की मुलाकात की जमीन तैयार करना है। दोनों नेता ब्रिक्स शिखर बैठक के लिए रूस में होंगे और अगर चीनी सेना एलएसी पर अप्रैल 2020 की स्थिति में लौट जाती है तो यह तनाव कम सीमा तनाव का पारा कम करेगा।
दोनों देशों के बीच सीमा तनाव का पारा गलवान घाटी टकराव से बढ़ा था। जून 15, 2020 को भारत और चीन के सैनिकों के बीच पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में खूनी संघर्ष हुआ था। इसमें एक कर्नल रैंक अधिकारी समेत भारत के 20 जांबाज शहीद हुए थे। लेकिन इससे कहीं ज्यादा नुकसान चीन को भी उठाना पड़ा था।
हालांकि उसके बाद से भारत ने चीनी सेना की मोर्चाबंदी का उसी भाषा में जवाब देते हुए आमने-सामने की तैनाती कर दी थी। साथ ही कई स्तर पर सैन्य मोर्चाबंदी और हथियार तैनाती को भी बढ़ाया गया था।
भारत और चीन के बीच 3088 किमी की वास्तविक नियंत्रण रेखा में से 3500 किमी से अधिक का इलाका विवादित और अस्पष्ट है जिसको लेकर दोनों पक्षों के दावे हैं। सीमा विवाद सुलझाने को लेकर उच्च स्तरीय वार्ता के लिए सीनियर रिप्रजेंटेटिव डायलॉग की व्यवस्था है जिसमें भारत के मौजूदा प्रतिनिधि एनएसए अजीत डोभाल हैं औऱ चीन का प्रतिनिधित्व वांग यी करते हैं। इस तंत्र की अबतक 22 बैठकें हो चुकी हैं। लेकिन सीमा विवाद निपटारे के फिलहाल कही भी करीब नहीं है।