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चीन में अब सूअर में मिला नया फ्लू वायरस, महामारी बनने के भी आसार
Wed, 01 Jul 2020 11:19 AM IST
अवधेश कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: अवधेश कुमार
Updated Wed, 01 Jul 2020 11:19 AM IST
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China New Virus:
- फोटो : अमरउजाला
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चीन में कोविड-19 के बाद अब सूअर में एक नए फ्लू वायरस की पहचान हुई। शोध के मुताबिक, जी-4 नाम का यह वायरस एच1एन1 का ही एक स्ट्रेन है और इसमें महामारी बनने वाले सभी लक्षण भी मिले हैं। हालांकि कुछ वैज्ञानिक इसे फिलहाल बहुत खतरनाक नहीं मान रहे और इससे दूसरी वैश्विक महामारी के खतरे से इनकार कर रहे हैं। वहीं, विशेषज्ञों का एक समूह इस वायरस पर बारीकी से नजर रख रहा है।
चीनी विशेषज्ञ 2011-18 के बीच सूअर में मिलने वाले फ्लू वायरसों पर एक शोध कर रहे थे, जिस दौरान उन्हें जी-4 के स्ट्रेन मिले। यह 2009 के एच1एन1 वायरस का ही एक पुन: संयोजित रूप है और सूअरों में पाए जाने वाले प्रचलित वायरस का उन्नत रूप है। उन्होंने पाया कि स्वाइन उद्योग से जुडे़ लोग इस वायरस की चपेट में आए हैं और इसका संक्रमण तेजी से फैल रहा है। सूअर फार्म में काम करने वालों के खून में भी इस वायरस के कण मिले हैं। इसके बाद वैज्ञानिकों ने इंसानों की आबादी खास तौर से सुअर उद्योग से जुड़े लोगों में तत्काल निगरानी बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है। यह शोध अमेरिकी जर्नल प्रोसीडिंग्स ऑफ नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस में भी छपा है।
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चीनी विशेषज्ञ 2011-18 के बीच सूअर में मिलने वाले फ्लू वायरसों पर एक शोध कर रहे थे, जिस दौरान उन्हें जी-4 के स्ट्रेन मिले। यह 2009 के एच1एन1 वायरस का ही एक पुन: संयोजित रूप है और सूअरों में पाए जाने वाले प्रचलित वायरस का उन्नत रूप है। उन्होंने पाया कि स्वाइन उद्योग से जुडे़ लोग इस वायरस की चपेट में आए हैं और इसका संक्रमण तेजी से फैल रहा है। सूअर फार्म में काम करने वालों के खून में भी इस वायरस के कण मिले हैं। इसके बाद वैज्ञानिकों ने इंसानों की आबादी खास तौर से सुअर उद्योग से जुड़े लोगों में तत्काल निगरानी बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है। यह शोध अमेरिकी जर्नल प्रोसीडिंग्स ऑफ नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस में भी छपा है।
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घनी आबादी में खतरा अधिक
इस वायरस से घनी आबादी में लोगों को खतरा अधिक होगा। वैसे जहां सूअर के बाड़े हैं, इनका प्रजनन कराया जाता है और बूचड़खानों के आसपास के लोगों के इसके चपेट में आने का खतरा अधिक है।
सूअरों से वायरस आम
सूअरों से वायरस का फैलना आम है। इसके लिए एक व्यवस्थित निगरानी प्रक्रिया बनानी होगी। 2009 में चीन से स्वाइन फ्लू की उत्पत्ति हुई थी तब लाखों लोगों को क्वारंटीन किया गया था।
18-35 साल वाले जल्दी आते हैं चपेट में
18-35 आयु वर्ग के लोग इस वायरस की चपेट में जल्दी आते हैं। स्वाइन उद्योग के जिन कर्मचारियों की जांच की गई उनमें 10.4 फीसदी संक्रमित पाए गए। इनमें से 20 फीसदी की उम्र 18 से 35 साल के बीच थी। इसी आधार पर जी-4 के मनुष्यों में प्रसार को नजरंदाज नहीं किया जा सकता।
इस वायरस से घनी आबादी में लोगों को खतरा अधिक होगा। वैसे जहां सूअर के बाड़े हैं, इनका प्रजनन कराया जाता है और बूचड़खानों के आसपास के लोगों के इसके चपेट में आने का खतरा अधिक है।
सूअरों से वायरस आम
सूअरों से वायरस का फैलना आम है। इसके लिए एक व्यवस्थित निगरानी प्रक्रिया बनानी होगी। 2009 में चीन से स्वाइन फ्लू की उत्पत्ति हुई थी तब लाखों लोगों को क्वारंटीन किया गया था।
18-35 साल वाले जल्दी आते हैं चपेट में
18-35 आयु वर्ग के लोग इस वायरस की चपेट में जल्दी आते हैं। स्वाइन उद्योग के जिन कर्मचारियों की जांच की गई उनमें 10.4 फीसदी संक्रमित पाए गए। इनमें से 20 फीसदी की उम्र 18 से 35 साल के बीच थी। इसी आधार पर जी-4 के मनुष्यों में प्रसार को नजरंदाज नहीं किया जा सकता।
ये होते हैं लक्षण...
जिन सूअरों में जी-4 वायरस पाया गया उनमें छींक आना, घरघराहट और खांसी आने जैसे लक्षण पाए गए हैं। साथ ही इन जानवरों का औसत अधिकतम वजन भी 7.3 से 9.8 फीसदी तक गिर जाता है।
हार्वर्ड के विशेषज्ञ का दावा...घबराएं नहीं
हार्वर्ड विश्वविद्यालय के महामारी विद एरिक फीगल डिंग कहते हैं, अभी तक जी-4 वायरस के इंसान से इंसान में प्रसार के प्रमाण नहीं मिले हैं। ऐसे में इसके महामारी बनने का खतरा कम है। यह वायरस 2016 के ही एक वायरस का प्रतिरूप है और चार साल से लोग इसके बीच रह रहे हैं। हालांकि उन्होंने भी इस पर कड़ी नजर रखने की सलाह दी है ताकि बढ़ने पर इसे तुरंत रोका जा सके।
जिन सूअरों में जी-4 वायरस पाया गया उनमें छींक आना, घरघराहट और खांसी आने जैसे लक्षण पाए गए हैं। साथ ही इन जानवरों का औसत अधिकतम वजन भी 7.3 से 9.8 फीसदी तक गिर जाता है।
हार्वर्ड के विशेषज्ञ का दावा...घबराएं नहीं
हार्वर्ड विश्वविद्यालय के महामारी विद एरिक फीगल डिंग कहते हैं, अभी तक जी-4 वायरस के इंसान से इंसान में प्रसार के प्रमाण नहीं मिले हैं। ऐसे में इसके महामारी बनने का खतरा कम है। यह वायरस 2016 के ही एक वायरस का प्रतिरूप है और चार साल से लोग इसके बीच रह रहे हैं। हालांकि उन्होंने भी इस पर कड़ी नजर रखने की सलाह दी है ताकि बढ़ने पर इसे तुरंत रोका जा सके।
इंसानों में प्रतिरोधी क्षमता के प्रमाण नहीं
शोध के मुताबिक भले ही नया वायरस 2016 के एच1एन1 का पुन: संयोजित रूप है लेकिन इंसानों में जी-4 से बचने के लिए प्रतिरोधी क्षमता के प्रमाण नहीं मिलते हैं।
चीनी विदेश मंत्रालय बोला, हम नजर रख रहे, बचाव के प्रयास करेंगे
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने मंगलवार को कहा कि वायरस से जुड़ी खबरों और इसके प्रसार पर पूरी नजर रखी जा रही है। हम इसे फैलने से रोकने के सभी जरूरी कदम उठा रहे हैं और इसे महामारी नहीं बनने देने का प्रयास जारी है।
शोध के मुताबिक भले ही नया वायरस 2016 के एच1एन1 का पुन: संयोजित रूप है लेकिन इंसानों में जी-4 से बचने के लिए प्रतिरोधी क्षमता के प्रमाण नहीं मिलते हैं।
चीनी विदेश मंत्रालय बोला, हम नजर रख रहे, बचाव के प्रयास करेंगे
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने मंगलवार को कहा कि वायरस से जुड़ी खबरों और इसके प्रसार पर पूरी नजर रखी जा रही है। हम इसे फैलने से रोकने के सभी जरूरी कदम उठा रहे हैं और इसे महामारी नहीं बनने देने का प्रयास जारी है।