खाने की कमी से जूझ रहा उत्तर कोरिया अब कर रहा सूखे का सामना
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उत्तर कोरिया 37 साल में अब तक के सबसे बड़े सूखे का सामना कर रहा है। यहां के नागरिकों से सरकार ने सूखे के कारण खराब हुई फसल की समस्या से लड़ने को कहा है। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र ने कहा था कि यहां करीब एक करोड़ लोग (कुल जनसंख्या का 40 फीसदी) खाने की भारी कमी का सामना कर रहे हैं।
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संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर कोरिया के लोगों को इस साल रोजाना महज 300 ग्राम खाना ही मिल पा रहा है। इससे पहले यहां 1990 में विनाशकारी अकाल पड़ा था, जिसमें माना जाता है कि सैकड़ों हजारों लोगों की मौत हुई थी।
अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं है कि ये सूखा भी पहले वाले की तरह ही गंभीर होगा, लेकिन यहां बर्बाद होती कृषि को लेकर चेतावनी दी गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबित उत्तर कोरिया में हालात कितने खराब हैं, ये भी अभी साफ नहीं है क्योंकि यहां अक्सर आंकड़े पारदर्शी नहीं होते हैं। लेकिन अगर रिपोर्ट में जारी आंकड़े ठीक होते हैं, तो यहां 15 लाख टन खाने की जरूरत है।
क्या है स्थिति?
उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया का कहना है कि वर्ष के पहले पांच महीनों में पूरे देश में 54.4 मिमी बारिश हुई है। यह 1982 के बाद का सबसे निचला स्तर है। यहां के प्रमुख समाचारपत्र रोदोंग सिनमुन का कहना है कि सूखे की क्षति से लड़ने के लिए देश को पानी की अब सबसे अधिक जरूरत है।
उत्तर कोरिया में खाने की कमी को लेकर फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन और वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (डब्लूएफपी) की रिपोर्ट आने के बाद इसपर चर्चा करने के लिए डब्लूएफपी के हेड डेविड बेसले बेसले सियोल गए थे। यहां उन्होंने एक मंत्री से मुलाकात भी की।
रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर कोरिया में 2018 का कृषि उत्पादन बीते आठ साल के सबसे निचले स्तर पर है। अगर तुरंत इस समस्या के प्रति कार्रवाई नहीं की गई तो स्थिति मई से सितंबर के बीच में और भी खराब हो सकती है। इस समय यहां खेती करना भी काफी मुश्किल हो जाता है।
प्रतिबंधों का क्या प्रभाव है यहां?
उत्तर कोरिया पर लगे प्रतिबंध साल 2006 के बाद से बढ़ते जा रहे हैं। जिसका उद्देश्य प्योंगयांग परमाणु कार्यक्रम के फंड में कमी लाना है। इसके चलते देश से निर्यात काफी कम हो गया है और ये भी अभी स्पष्ट नहीं है कि उत्तर कोरिया के पास खाने का आयात करने के लिए कितनी विदेशी मुद्रा है।
हालांकि प्रतिबंधों का नियम मानवीय सहायता पर लागू नहीं होता है और ये उत्तर कोरिया को भी खाना निर्यात करने से रोकता है, जिसका इस्तेमाल देश के नागरिकों को खिलाने के लिए किया जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ संगठन हैं, जो यहां सहायता उपलब्ध कर रहे हैं लेकिन उन्हें भी काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 2017 में एक एनजीओ ने उत्तर कोरिया को इसलिए छोड़ दिया था क्योंकि यहां लगे प्रतिबंधों के कारण उसका काम करना मुश्किल हो गया था।