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Literature Nobel Prize: जॉन फॉसे को साहित्य का नोबेल; जानें उन्हें इस सम्मान के लिए क्यों चुना गया

Thu, 05 Oct 2023 04:39 PM IST
अभिषेक दीक्षित वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Thu, 05 Oct 2023 04:39 PM IST
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Nobel Prize in Literature is awarded to Norwegian author Jon Fosse for his innovative plays and prose
Norwegian author Jon Fosse - फोटो : Amar Ujala

साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार का एलान गुरुवार को कर दिया गया। 2023 का नोबेल पुरस्कार नॉर्वे के लेखक जॉन फॉसे को दिया गया। उन्हें उनके अभिनव नाटकों और गद्य के लिए इस सम्मान से नवाजा गया, जो अनकही की आवाज बनते हैं। नोबेल साहित्य समिति के अध्यक्ष एंडर्स ओल्सन ने कहा कि फॉसे का काम उनकी नॉर्वेजियन पृष्ठभूमि की भाषा और प्रकृति में निहित है।

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फॉस ने अपने पहला उपन्यास रेड एंड ब्लैक में आत्महत्या जैसे संवेदनशील मुद्दे पर लिखा था। नोबेल विजेता घोषित किए जाने के जॉन ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह पुरस्कार उस तरह के साहित्य के लिए दिया गया है, जो साहित्य के अलावा कुछ नहीं। फॉसे साहित्य का नोबेल पुरस्कार पाने वाले चौथे नॉर्वेजियन लेखक हैं। ब्योर्नस्टजर्न ब्योर्नसन को 1903 में, नट हैम्सन को 1920 में और सिग्रिड अनडसेट को 1928 में यह पुरस्कार दिया गया था। 
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साहित्य के क्षेत्र में अब तक 120 लोगों को नोबेल मिला है। इसमें केवल 17 महिलाएं हैं। रबींद्रनाथ टैगोर अकेले भारतीय हैं, जो साहित्य के नोबेल से सम्मानित हुए हैं। उन्हें यह पुरस्कार 1913 में मिला था। लेखन की दुनिया में फॉसे की प्रतिष्ठा का हिसाब 40 से ज्यादा भाषाओं में अनुवादित और प्रकाशित उनकी किताबों से लगाया जा सकता है। लेखन के अलावा फॉसे को संगीत का भी शौक है। वे गानों की धुन बनाते हैं। डेली टेलीग्राफ के मुताबिक वे दुनिया के सबसे ज्यादा प्रतिभाशाली 100 जीवित शख्सों में 83वें स्थान पर हैं।
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पिछले साल फ्रेंच लेखिका एनी अर्नो को मिला था सम्मान
पिछले साल यानी 2022 के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार फ्रेंच लेखिका एनी अर्नो (Annie Ernaux) को दिया गया था। एनी का जन्म एक सितंबर 1940 को हुआ था। वे एक फ्रांसीसी लेखक और साहित्य की प्रोफेसर हैं। उनका साहित्यिक कार्य ज्यादातर आत्मकथात्मक, समाजशास्त्र पर आधारित होता है।

नोबेल समिति ने कहा था कि अर्नो (82) को यह सम्मान साहस और लाक्षणिक तीक्ष्णता के साथ व्यक्तिगत स्मृति के अंतस, व्यवस्थाओं और सामूहिक बाधाओं को उजागर करने वाली उनकी लेखनी के लिए दिया गया।

रसायन विज्ञान के क्षेत्र में इन्हें मिला सम्मान
इससे पहले बीते दिन रसायन विज्ञान के क्षेत्र में 2023 के नोबेल पुरस्कार का एलान किया गया। इस साल यह सम्मान संयुक्त रूप से मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मौंगी जी. बावेंडी, कोलंबिया विश्वविद्यालय से लुईस ई. ब्रूस और नैनोक्रिस्टल टेक्नोलॉजी में काम करने वाले एलेक्सी आई. एकिमोव को दिया गया। पुरस्कार ‘क्वांटम डॉट्स की खोज और संश्लेषण के लिए के लिए दिया गया।

कैटालिन कारिको और ड्रू वीसमैन को चिकित्सा का नोबेल
इससे पहले बीते सोमवार को फिजियोलॉजी या मेडिसिन क्षेत्र के लिए इस सम्मान के विजेताओं के नाम का एलान किया गया था। इस साल कैटालिन कारिको और ड्रू वीसमैन को चिकित्सा का नोबेल दिया गया। इन्हें न्यूक्लियोसाइड बेस संशोधनों से संबंधित उनकी खोजों के लिए यह सम्मान दिया गया। इस खोज की वजह से कोरोनावायरस यानी सीओवीआईडी-19 के खिलाफ प्रभावी एमआरएनए टीकों के विकास में मदद मिली।

भौतिकी का नोबेल संयुक्त रूप से इन्हें मिला
इसके बाद मंगलवार को भौतिकी के नोबेल पुरस्कार का एलान किया गया। इस श्रेणी के लिए 2023 का नोबेल प्राइज संयुक्त रूप से पियरे ऑगस्टिनी, फेरेंस क्राउसज और एनी एल'हुलियर को दिया गया। इलेक्ट्रॉन्स पर अध्ययन के लिए यह सम्मान दिया गया। अवॉर्ड उन प्रायोगिक तरीकों के लिए दिया गया, जिसमें पदार्थ में इलेक्ट्रॉन की गतिशीलता के अध्ययन के लिए प्रकाश के एटोसेकंड पल्स उत्पन्न किए गए।

दो अक्तूबर से ही हुई शुरुआत
चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार के साथ ही सोमवार से नोबेल पुरस्कारों की घोषणा की शुरूआत हुई थी। दो अक्तूबर को चिकित्सा और तीन अक्तूबर को भैतिकी के नोबेल का एलान किया गया। चार अक्तूबर को रसायन विज्ञान और पांच अक्तूबर को साहित्य के क्षेत्र में दिए जाने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता की घोषण की गई। इसके अलावा नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा शुक्रवार और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में इस पुरस्कार के विजेता की घोषणा नौ अक्तूबर को की जाएगी।


इतना मिलता है पुरस्कार
पुरस्कारों में 11 मिलियन स्वीडिश क्रोनर यानी एक मिलियन अमेरिकी डॉलर या दस लाख डॉलर का नकद पुरस्कार दिया जाता है। धनराशि अवॉर्ड के संस्थापक और स्वीडिश आविष्कारक अल्फ्रेड नोबेल की छोड़ी हुई वसीयत से आती है। 1896 में उनका निधन हो गया था।

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