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55 सालों बाद महिला वैज्ञानिक को नोबेल पुरस्कार, 96 साल के एश्किन अब तक के सबसे बुजुर्ग विजेता
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Wed, 03 Oct 2018 12:57 PM IST
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Donna Strickland
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कनाडा की ओंटारियो यूनिवर्सिटी में रिसर्चर डोना स्ट्रिकलैंड 55 साल बाद फिजिक्स में नोबेल पाने वाली पहली महिला बनी हैं। स्ट्रिकलैंड इतिहास में फिजिक्स का नोबेल जीतने वाली तीसरी महिला भी हैं। उनसे पहले यह अवॉर्ड 1963 में न्यूक्लियर स्ट्रक्चर पर खोज करने वाली मारिया मेयर को मिला था।
भौतिकी का नोबेल पाने वाली पहली महिला मैरी क्यूरी थीं। उन्हें 1903 में पति पियरे क्यूरी और हैनरी बैक्वेरल के साथ संयुक्त रूप से रेडियो एक्टिविटी की खोज के लिए ये पुरस्कार मिला था।
तीन वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार
लेजर फिजिक्स के लिए मंगलवार को तीन वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ये हैं अमेरिका के आर्थर एश्किन, फ्रांस के गेरार्ड मोरो और कनाडा की डोना स्ट्रिकलैंड। एश्किन को 96 साल की उम्र में नोबेल मिला है और वे सबसे बुजुर्ग नोबेल पुरस्कार विजेता बने हैं। वहीं डोना स्ट्रिकलैंड 55 साल बाद फिजिक्स में नोबेल पुरस्कार पाने वाली महिला बनी हैं।
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रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज की ओर से तीनों वैज्ञानिकों को करीब 7.35 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। इसमें से अमेरिका के एश्किन को ऑप्टिकल ट्वीजर्स पर शोध के लिए आधी इनामी राशि मिलेगी। उन्होंने लेजर बीम के जरिए पार्टिकल्स, परमाणु को पकड़ने वाली तकनीक खोजी है।
दो अन्य विजेताओं को बची इनामी राशि साझा करनी होगी। मोरो और स्ट्रिकलैंड को यह पुरस्कार सबसे छोटी और तेज लेजर तरंगों की खोज के लिए मिला। उनकी तकनीक का इस्तेमाल आंखों की सर्जरी के लिए किया जा रहा है।
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भौतिकी का नोबेल पाने वाली पहली महिला मैरी क्यूरी थीं। उन्हें 1903 में पति पियरे क्यूरी और हैनरी बैक्वेरल के साथ संयुक्त रूप से रेडियो एक्टिविटी की खोज के लिए ये पुरस्कार मिला था।
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तीन वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार
लेजर फिजिक्स के लिए मंगलवार को तीन वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ये हैं अमेरिका के आर्थर एश्किन, फ्रांस के गेरार्ड मोरो और कनाडा की डोना स्ट्रिकलैंड। एश्किन को 96 साल की उम्र में नोबेल मिला है और वे सबसे बुजुर्ग नोबेल पुरस्कार विजेता बने हैं। वहीं डोना स्ट्रिकलैंड 55 साल बाद फिजिक्स में नोबेल पुरस्कार पाने वाली महिला बनी हैं।
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रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज की ओर से तीनों वैज्ञानिकों को करीब 7.35 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। इसमें से अमेरिका के एश्किन को ऑप्टिकल ट्वीजर्स पर शोध के लिए आधी इनामी राशि मिलेगी। उन्होंने लेजर बीम के जरिए पार्टिकल्स, परमाणु को पकड़ने वाली तकनीक खोजी है।
दो अन्य विजेताओं को बची इनामी राशि साझा करनी होगी। मोरो और स्ट्रिकलैंड को यह पुरस्कार सबसे छोटी और तेज लेजर तरंगों की खोज के लिए मिला। उनकी तकनीक का इस्तेमाल आंखों की सर्जरी के लिए किया जा रहा है।
फील्ड बदलकर 57 साल किया लेजर रिसर्च तब मिला नोबेल
आर्थर एश्किन, गेरार्ड मोरो और डोना स्ट्रिकलैंड
1922 में न्यूयॉर्क में जन्मे आर्थर एश्किन ने फिजिक्स में पीएचडी की। 1960 में वे माइक्रोवेव फिजिक्स में काम कर रहे थे लेकिन एक साल बाद ही फील्ड बदल कर लेजर रिसर्च में चले गए। 57 साल के लेजर रिसर्च के करियर में उन्होंने 107 शोध पत्र लिखे।
50 से ज्यादा वैज्ञानिकों के साथ काम किया। इनमें से तीन वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार भी मिला। कई आर्टिकल लिखे, 47 पेटेंट अपने नाम पर किए। ज्यादातर खोज उन्होंने स्टीवन चू के साथ की। स्टीवन को 1997 में फिजिक्स का नोबेल पुरस्कार भी मिला था।
50 से ज्यादा वैज्ञानिकों के साथ काम किया। इनमें से तीन वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार भी मिला। कई आर्टिकल लिखे, 47 पेटेंट अपने नाम पर किए। ज्यादातर खोज उन्होंने स्टीवन चू के साथ की। स्टीवन को 1997 में फिजिक्स का नोबेल पुरस्कार भी मिला था।