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शांति का नोबेल: फिलीपींस-रूस के पत्रकारों को मिला सम्मान, अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा में निभाई अहम भूमिका

Fri, 08 Oct 2021 02:58 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Fri, 08 Oct 2021 02:58 PM IST
सार

नोबेल कमेटी ने सम्मान पाने वाले नामों के एलान के साथ ही कहा कि आजाद, स्वायत्त और तथ्य आधारित पत्रकारिता सत्ता की ताकत, झूठ और युद्ध के प्रोपेगंडा से रक्षा करने में अहम है। 

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Nobel Peace Prize for 2021 announced US Journalist Maria Ressa and Russian Journalist Dmitry Muratov selected for safeguarding Freedom of Expression
शांति के नोबेल के लिए इस बार दो पत्रकारों के नाम चुने गए। - फोटो : Social Media

विस्तार

2021 के शांति के नोबेल पुरस्कारों का एलान कर दिया गया है। नोबेल कमेटी ने इस बार इस सम्मान के लिए दो पत्रकारों को चुना है। इनमें एक पत्रकार रैप्लर मीडिया ग्रुप की संस्थापक अमेरिकी पत्रकार मारिया रेसा हैं और दूसरे रूस के पत्रकार दिमित्री मुरातोव हैं। नोबेल कमेटी ने कहा है कि इन दोनों को अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है, क्योंकि बोलने की आजादी ही लोकतंत्र और स्थायी शांति की पहली शर्त है। 
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कौन हैं नोबेल जीतने वाले दोनों पत्रकार?

1. मारिया रेसा
फिलीपींस से नाता रखने वाली अमेरिकी पत्रकार मारिया रेसा न्यूज साइट रैप्लर (Rappler) की सह-संस्थापक हैं। उन्हें फिलीपींस में सत्ता की ताकत के गलत इस्तेमाल, हिंसा और तानाशाही के बढ़ते खतरे पर खुलासों के लिए पहले भी सम्मानित किया जा चुका है। नोबेल कमेटी ने अभिव्यक्ति की आजादी में उनकी भूमिका की प्रशंसा करते हुए उन्हें इस सम्मान का हकदार बताया।

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2. दिमित्री मुरातोव
इसके अलावा रूस के दिमित्री मुरातोव को भी नोबेल शांति पुरस्कार देने का एलान किया गया। वे रूस के स्वतंत्र अखबार नोवाजा गजेटा के सह-संस्थापक हैं और पिछले 24 साल से पेपर के मुख्य संपादक रहे हैं। रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के तानाशाही राज के बावजूद मुरातोव को अपने अखबार के जरिए सरकार की योजनाओं की आलोचना के लिए जाना जाता रहा है। नोबेल कमेटी ने कहा कि मुरातोव कई दशकों से रूस में अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा कर रहे हैं। 
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नोबेल कमेटी ने कहा कि आजाद, स्वायत्त और तथ्य आधारित पत्रकारिता सत्ता की ताकत, झूठ और युद्ध के प्रोपेगंडा से रक्षा करने में अहम है। अभिव्यक्ति की आजादी और प्रेस की स्वतंत्रता के बिना देशों के बीच सौहार्द और विश्व व्यवस्था को सफल बनाना काफी मुश्किल हो जाएगा।  
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