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उपलब्धि: संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के अधिवक्ता बने कैलाश सत्यार्थी
Fri, 17 Sep 2021 11:52 PM IST
Jeet Kumar
एएनआई, संयुक्त राष्ट्र
एएनआई, संयुक्त राष्ट्र
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 17 Sep 2021 11:52 PM IST
सार
सत्यार्थी एसडीजी के अधिवक्ता के रूप में संयुक्त राष्ट्र संघ के सतत विकास लक्ष्य को सन् 2030 तक हासिल करने में भूमिका निभाएंगे।
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kailash satyarthi
- फोटो : social media
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विस्तार
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी को संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने 76वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा की शुरुआत से पहले नए सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अधिवक्ता के रूप में नियुक्त किया है।
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कैलाश सत्यार्थी को बाल श्रम और बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिकारों के लिए वैश्विक आंदोलन चलाने के लिए जाना जाता है। उन्होंने बच्चों के खिलाफ हो रहे अपराधों को खत्म करने के लिए अपना जीवन लगा दिया। शायद समाज में इसी योगदान को देखते हुए उन्हें सतत विकास लक्ष्य का अधिवक्ता बनाया गया है।
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कोरोना महामारी के कारण बाल श्रमिकों की संख्या बढ़ीहै साथ ही लाखों बच्चों का भविष्य अधर में है तो बच्चों भी असुरक्षित हैं। यह नियुक्ति वर्तमान संकट के को देखते हुए की गई है, जिसका हम सामना कर रहे हैं। सतत विकास लक्ष्यों पर भी इस संकट का दूरगामी असर पड़ रहा है, जिसे 2030 तक हासिल किया जाना है।
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संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने कैलाश सत्यार्थी को एसडीजी एडवोकेट नियुक्त करते हुए कहा कि मैं दुनियाभर के बच्चों को आवाज देने के लिए उनकी अटूट प्रतिबद्धता की सराहना करता हूं। यह समय की जरूरत है कि हम एक साथ आएं, सहयोग करें, साझेदारी बनाएं और एसडीजी की दिशा में वैश्विक कार्रवाई को तेज करने में एक दूसरे का समर्थन करें।
इस मौके पर कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि दुनिया के बच्चों की ओर से मैं इस नियुक्ति को स्वीकार करते हुए सम्मानित महसूस कर रहा हूं। कोरोना महामारी आने के चार साल पहले 5 से 11 साल के 10000 से ज्यादा बच्चे हर रोज बाल मजदूर बने। यह वृद्धि भी संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के पहले चार सालों के दौरान हुई। यह एक अन्यायपूर्ण विकास है, जो 2030 एजेंडा की संभावित विफलता की प्रारंभिक चेतावनी देता है।
आगे उन्होंने कहा कि जो बच्चे बाल श्रम में हैं वे स्कूल में नहीं हैं। उनकी स्वास्थ्य की देखभाल, शुद्ध जल और स्वच्छता तक सीमित या कोई पहुंच नहीं है। वे घोर गरीबी के दुश्चक्र में रहते हैं और पीढ़ीगत नस्लीय और सामाजिक भेदभाव का सामना करते हैं।