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World Updates: बेनतीजा खत्म हुआ WTO सम्मेलन, भारत का कड़ा विरोध, थाईलैंड ने अपना प्रतिनिधि हटाया; पढ़ें खबरें

Sat, 02 Mar 2024 05:05 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: जलज मिश्रा Updated Sat, 02 Mar 2024 05:05 AM IST
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No decision taken on food stocks and fisheries subsidy in WTO conference World News in hindi
बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबरें (सांकेतिक) - फोटो : amar ujala

विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के मंत्रिस्तरीय तय समय से एक दिन बाद समाप्त हो गया। सम्मेलन में सार्वजनिक खाद्य भंडार का स्थायी समाधान खोजने और मत्स्य पालन सब्सिडी पर अंकुश लगाने जैसे प्रमुख मुद्दों को लेकर निर्णय नहीं हुआ। इससे क्षमता से अधिक मछली पकड़ने की समस्या पैदा होती है। सम्मेलन में सदस्यों ने ई-कॉमर्स व्यापार पर आयात शुल्क लगाने पर रोक को दो वर्षों के लिए आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। सम्मेलन में भारत ने खाद्य सुरक्षा के मुद्दे को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में भारतीय टीम ने जी33 समूह के सहयोग से खाद्य सुरक्षा मुद्दे के स्थाई समाधान के लिए काफी मेहनत की थी।

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केंद्रीय मंत्री ने जताई खुशी
केंद्रीय मंत्री गोयल ने कहा कि मुझे लगता है कि भारत ने उन मुद्दों पर सफलतापूर्वक काम किया। हमें जो उम्मीद थी हमने वैसे ही परिणाम हासिल किए। हमारा उद्देश्य था कि हमारे किसानों और मछुआरों का नुकसान न हो और उन्हें कोई संकट न हो और हम ऐसा करने में सफल रहे। हमने ऐसा कोई निर्णय नहीं होने दिया, जिससे किसानों और मछुआरों को संकट आए। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि यह एक अच्छा परिणाम है। हम पूरी तरह से संतुष्ट हैं। इसके अलावा, दो देशों के संगठन में शामिल होने पर गोयल ने खुशी जताई।
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सम्मेलन के 5वें दिन मंत्रिस्तरीय वार्ता में कृषि, मछली पालन और विवाद समाधान पर फोकस किया गया था। भारत ने निष्पक्षता के मुद्दे पर अहम बात कही। भारत ने कहा था कि हम निष्पक्ष खेल और न्याय के मजबूत सिद्धांतों पर आज भी कायम हैं। भारत ने साफ किया कि डब्ल्यूटीओ में लिए गए सभी निर्णय भारत के किसानों और मछुआरों के सर्वोत्तम हितों को ध्यान में रखते हुए हों, हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं।

भारत ने थाईलैंड का कड़ा विरोध किया
विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के 13वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भारत पर विवादित टिप्पणी करने वाली थाई प्रतिनिधि पिमचानोक पिटफील्ड को थाईलैंड ने वापस बुला लिया है। भारत के चावल खरीद कार्यक्रम पर थाई प्रतिनिधि ने कहा था कि खाद्य सुरक्षा व किसानों के लिए एमएसपी के नाम पर भारत निर्यात बाजार पर कब्जा करना चाहता है। इसका विरोध जताते हुए भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने बैठक का बहिष्कार किया। भारत ने थाईलैंड को विरोध दर्ज कराया और डब्ल्यूटीओ प्रमुख, कृषि समिति के प्रमुख केन्या और यूएई के प्रति नाराजगी भी जताई। इसके बाद थाईलैंड की प्रतिनिधि को उनके देश ने वापस बुला लिया। 

गौरतलब है कि अबू धाबी में मंत्रिस्तरीय वार्ता 29 फरवरी को खत्म होनी थी, लेकिन यह अब पांचवें दिन में प्रवेश कर गई है। महानिदेशक नगोजी ओकोंजो इवेला ने एमसी13 के अध्यक्ष थानी बिन अहमद अल जायेद और मंत्रियों के साथ बातचीत करने के बाद यह फैसला लिया। उन्होंने कहा, सार्थक समझौते पर पहुंचने के लिए सत्र को एक दिन के लिए बढ़ाया गया।

No decision taken on food stocks and fisheries subsidy in WTO conference World News in hindi
श्रद्धांजलि देने पहुंचे लोगों को किया गया गिरफ्तार। - फोटो : ANI

नवलनी को श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे लोग रूस में गिरफ्तार
रूसी दिवंगत विपक्षी नेता एलेक्सी नवलनी की स्मृति में श्रद्धांजलि अर्पित करने के कारण देशभर से 115 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सबसे अधिक 16 लोगों की गिरफ्तारी नोवोसिबिर्स्क में हुई। मॉस्को में 10 लोगों को हिरासत में लिया गया। जबकि येकातेरिनबर्ग 10 तो वोरोनिश में 14 लोगों को हिरासत में लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इन प्रमुख शहरों के अलावा, रूस के चेल्याबिंस्क, ओम्स्क, व्लादिकाव्काज, सोची, सेंट पीटर्सबर्ग, निजनी नोवगोरोड, कजान और उलान-उडे सहित अन्य शहरों में भी गिरफ्तारियां हुईं हैं।

श्रीलंका ने चीन को ठुकरा भारत को दिया सौर ऊर्जा संयंत्र का काम

श्रीलंका ने चीन से टेंडर छीन एक भारतीय कंपनी को तीन सौर व पवन हाइब्रिड बिजली उत्पादन सुविधाओं के निर्माण का काम सौंपा है। एशियाई विकास बैंक के कर्ज और भारतीय ऋण से वित्तपोषित इस परियोजना में दो साल पहले भारत ने चीन को भागीदार बनाने पर चिंता जताते हुए अनुदान देने से इन्कार कर दिया था। अब श्रीलंकाई ऊर्जा मंत्रालय ने कहा, भारत से 1.1 करोड़ डॉलर की मदद से परियोजना पुनर्जीवित की गई है। 

फलस्तीन में राहत के लिए स्थायी मानवीय गलियारा जरूरी : भारत

भारत ने फलस्तीन के हालात पर चिंता जताते हुए वहां राहत पहुंचाने के लिए तत्काल एक स्थायी मानवीय गलियारे पर बल दिया है। भारत ने कहा, यह युद्ध क्षेत्र या उससे परे नहीं फैलना चाहिए। फलस्तीन की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त की रिपोर्ट के बाद मानवाधिकार परिषद के 55वें सत्र में यह बयान यूएन में भारत के प्रतिनिधि अरिंदम बागची ने दिया।

एलन मस्क ने ओपनएआई और उसके सीईओ पर किया मुकदमा

टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने शुक्रवार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) कंपनी ओपन एआई और उसके चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर सैम ऑल्टमैन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। मस्क का आरोप है कि ओपन एआई ने मानवता के फायदे के लिए एआई विकसित करने के अपने मूल मिशन को छोड़ दिया है। अब कंपनी सिर्फ लाभ कमाने पर ध्यान दे रही है।

जी-20 : वित्त प्रमुखों की बैठक साझा बयान के बिना खत्म

जी-20 की अध्यक्षता कर रहे ब्राजील को दुनिया की 20 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं को सहमत करने में खासी मुश्किल हो रही है। जी-20 वित्तीय प्रमुखों की बैठक संयुक्त बयान पर सहमति के बिना ही खत्म करना पड़ी। वार्ता विफल रहने के पीछे सभी देशों का गाजा और यूक्रेन में जारी युद्धों को लेकर खेमों में बंटना है।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे ब्राजील के वित्त मंत्री फर्नांडो हैडाड ने कहा, जी-20 के सदस्यों को यह समझना चाहिए कि वित्तीय चर्चाओं के मंच पर वे युद्धों का हल नहीं निकाल सकते हैं। ब्राजील ने जो साझा वक्तव्य तैयार किया था, उसमें लिखा था कि युद्ध और बढ़ते संघर्षों से वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बढ़ रहे हैं। ज्यादातर देश इससे सहमत नहीं थे। 

भारत और श्रीलंका में रामायण के महत्व पर मंत्री ने कही यह बात

रामायण भारत और श्रीलंका, दोनों के लिए सामान्य सांस्कृतिक कथा है। श्रीलंका मंत्री जीवन थोंडामन ने यह बात कही। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि रामायण श्रीलंका और भारत दोनों के लिए एक आम सांस्कृतिक कथा के रूप में काम करती है, जो उनकी सांस्कृतिक चेतना में योगदान करती है और उनके संबंधों को मजबूत करती है। दोनों देशों के रिश्ते पर उन्होंने कहा कि यह 'उत्कृष्टता की स्थिति' में पहुंच चुका है।

ब्रिटिश लोकतंत्र की रक्षा के लिए ऋषि सुनक ने की भावुक अपील

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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक (फाइल) - फोटो : फेसबुक/ऋषि सुनक
प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने ब्रिटेन से अपने लोकतंत्र की रक्षा करने की भावुक अपील की। उन्होंने आगाह किया कि चरमपंथी ताकतें देश को तोड़ने और इसकी बहु-धार्मिक पहचान को कमजोर करने पर तुली हैं। देश के पहले भारतवंशी पीएम ने जोर देकर कहा कि यूके के स्थायी मूल्य सभी धर्मों और जातियों के प्रवासियों को स्वीकार करना है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर चरमपंथी ताकतें हावी न हों। उन्होंने कहा, जो आप्रवासी यहां आए हैं, उन्होंने योगदान दिया है। कामयाबी और रिश्तों की नई इबारत लिखने में मदद की है। 
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