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कतर संकट: बर्लिन के दीवार जैसी स्थिति पर हस्तक्षेप करे UN, तभी मिल पाएंगे बिछड़े परिवार

Sat, 17 Jun 2017 03:45 PM IST
amarujala.com- Written by: श्रवण शुक्ला
amarujala.com- Written by: श्रवण शुक्ला Updated Sat, 17 Jun 2017 03:45 PM IST
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NHRC: Qatar blockade worse than Berlin Wall
qatar - फोटो : qatar
कतर संकट की स्थिति गंभीर होती जा रही है। अरब देशों द्वारा थोपे गए बैन की वजह से हजारों परिवार जहां के तहां फंस गए हैं। यहां तक कि वो आपस में मिल भी नहीं सकते। कतर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस स्थिति की तुलना दशकों तक जर्मनी को बांटकर रखने वाली बर्लिन की दीवार से की है, जिसकी वजह से दीवार के आर-पार रहने वाले कई परिवारों के सदस्य दशकों तक एक दूसरे से मिल नहीं सके थे। कतर के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस गंभीर संकट की परिस्थिति में संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग की है। 
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कतर के राष्ट्रीय मानवाधिकार कमेटी(एनएचआरसी) ने संयुक्त राष्ट से जांच टीम को भेजकर स्थिति के आंकलन का अनुरोध किया है। एनएचआरसी का कहना है कि अरब देशों द्वारा राजनयिक संबंधों को तोड़े जाने, वायु परिचालन को ब्लॉक करने और जमीन के साथ ही पानी के रास्ते भी आने जाने पर प्रतिबंधों के चलते कतर वासियों का जीना दूभर हो गया है। ये ठीक वैसी ही स्थिति है, जैसे बर्लिन में दीवार बना देने के बाद शहर के दूसरे तरफ के लोग अपने ही सगे संबंधियों से मिलने के लिए तरस गए थे।
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अरब देशों ने लगाए हैं कतर पर पूर्ण प्रतिबंध, कुछ ने लगाए आंशिक प्रतिबंध

NHRC: Qatar blockade worse than Berlin Wall
अरब देशों ने लगाए हैं कतर पर पूर्ण प्रतिबंध, कुछ ने लगाए आंशिक प्रतिबंध - फोटो : Agency
जिनेवा में एनएचआरसी के अली बिन शेख अल मारी ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कॉउंसिल से कतर पर प्रतिबंधों की आलोचना की मांग की है। उन्होंने कहा कि अरब देशों में करीब 13000 लोग फंसे हुए हैं। उनके परिवार कतर में है। खाने पीने की वस्तुओं की मित्र देशों द्वारा सीमित सप्लाई हो रही है। लोग कुछ समय बाद बेहद गंभीर हालात में होंगे। ये तो मानवाधिकारों का गंभीर हनन है। 

मारी ने कहा कि कई परिवारों में तो बच्चे अपने बाप से बिछड़ गए हैं, तो कई महिलाएं और शौहरों से। एक मामला तो ऐसा आया कि कतर के नागरिक की सउदी अरब में मौत हो गई, पर उसके परिजनों तक उसका पार्थिक शव तक नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे कदम उठाकर सऊदी की अगुवाई में तमाम देश हजारों लोगों को प्रताड़ित कर रहे हैं।

बता दें कि सऊदी अरब की अगुवाई में बहरीन, कोमोरोस, मिश्र, इरीट्रिया, यूएई, मालदीव, मॉरितानिया, लीबिया, सेनेगल और यमन ने कतर से पूरी तरह से रिश्ते खत्म कर दिए हैं, तो चाड़, दिजबूती, जॉर्डन और नाइजर ने आंशिक प्रतिबंध लगाए हैं। इन देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर फ्रांस, ईरान, कुवैत, मोरक्को, तुर्की और अमेरिका मध्यस्थता करने की पेशकश कर चुके हैं। सऊदी अरब इन सभी देशों के एक भी अनुरोध को नहीं मान रहा है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र संघ का हस्तक्षेप अनिवार्य हो गया है, तभी इस संकट से उबरा जा सकता है।
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