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लिट्टे के खिलाफ तीन दशक लंबे युद्ध के नायक रहे हैं श्रीलंका के नए राष्ट्रपति गौतबाया राजपक्षे

Mon, 18 Nov 2019 01:03 AM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: गौरव पाण्डेय Updated Mon, 18 Nov 2019 01:03 AM IST
सार

  • साल 2006 में तमिल विद्रोहियों के आत्मघाती हमले में बाल-बाल बचे थे
  • गौतबाया को अधिकतर तमिल अल्पसंख्यक अविश्वास की नजर से देखते हैं
  • 1983 में उन्होंने मद्रास यूनिवर्सिटी से रक्षा अध्ययन में पोस्ट ग्रेजुएट किया
  • गौतबाया पर विद्रोही तमिलों को यातना देने और उनकी हत्या करने के आरोप

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Newly Elected President of Sri lanka Gotabaya Rajapaksa is considered as a war hero against LTTE
श्रीलंका के राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल करने वाले गौतबाया राजपक्षे - फोटो : ट्विटर

विस्तार

श्रीलंका के राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल करने वाले गौतबाया राजपक्षे वह शख्स हैं, जिन्हें लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के साथ तीन दशक तक चले गृह युद्ध को निर्दयतापूर्वक खत्म करने का श्रेय जाता है। बहुसंख्यक सिंहली बौद्ध उन्हें ‘युद्ध नायक’ मानते हैं, जबकि अधिकतर तमिल अल्पसंख्यक उन्हें अविश्वास की नजर से देखते हैं।

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राजपक्षे ने साल 1980 के दशक में असम स्थित ‘काउंटर इंसर्जेंसी एंड जंगल वारफेयर स्कूल’ में प्रशिक्षण लिया। बड़े भाई महिंदा राजपक्षे के राष्ट्रपति रहने के दौरान उन्होंने 2005 से 2014 में रक्षा सचिव की जिम्मेदारी निभाई थी। 1983 में उन्होंने मद्रास यूनिवर्सिटी से रक्षा अध्ययन में पोस्ट ग्रेजुएट किया। 
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इस साल अक्तूबर में राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनाए जाने के बाद राजपक्षे ने कहा था कि अगर वह जीतते हैं तो युद्ध समाप्ति के बाद संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के समक्ष जताई गई प्रतिबद्धता या मेल मिलाप का सम्मान नहीं करेंगे। उन्होंने कहा था कि हम यूएन के साथ हमेशा काम करेंगे, लेकिन पिछली सरकार के दौरान यूएन के साथ किए गए करार का सम्मान नहीं करेंगे।

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तमिलों की हत्या और यातना के आरोप

राजपक्षे पर उनकी देखरेख में नागरिकों और विद्रोही तमिलों को यातना देने, उनकी हत्या करने और बाद में राजनीतिक हत्याओं को अंजाम देने के आरोप हैं। लिट्टे के के निशाने पर रहे राजपक्षे साल 2006 में इस संगठन के आत्मघाती हमले में बाल-बाल बचे थे। चुनाव से पहले विपक्षी यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के आरोप के बाद उन्होंने अमेरिका की दोहरी नागरिकता छोड़ दी थी।

प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार में जन्म

राजपक्षे का जन्म 20 जून, 1949 को श्रीलंका के एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार में हुआ था। वह 9 भाई बहनों में पांचवें स्थान पर हैं। उनके पिता डीए राजपक्षे 1960 के दशक में विजयानंद दहानायके की सरकार में प्रमुख नेता थे और श्रीलंका फ्रीडम पार्टी के संस्थापक सदस्य थे। राजपक्षे ने अपनी स्कूली पढ़ाई कोलंबो में पूरी की। 

वह 1971 में श्रीलंका की सेना में अधिकारी कैडेट के रूप में शामिल हुए। 1991 में वह सर जॉन कोटेलवाला रक्षा अकादमी के उप कमांडेंट नियुक्त किए और 1992 में सेना से सेवानिवृत्त होने तक इस पद पर बने रहे। वह 2005 में अपने भाई महिंदा राजपक्षे के राष्ट्रपति चुनाव अभियान में मदद के लिए स्वदेश लौटे और श्रीलंका की दोहरी नागरिकता ली। 

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