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न्यूजीलैंड: पर्यावरण और किसानों के हित आमने-सामने, सरकार के लिए जटिल चुनौती
Sat, 17 Jul 2021 06:26 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वेलिंग्टन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वेलिंग्टन
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Sat, 17 Jul 2021 06:26 PM IST
सार
न्यूजीलैंड की मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि इतने बड़े पैमाने पर किसान प्रतिरोध इस देश में पहले कभी नहीं देखा गया था। किसान ट्रैक्टरों को चलाते हुए शहरों के बीच में पहुंच गए, जिससे वहां ट्रैफिक में रुकावट आई। रिपोर्टों के मुताबिक छोटे-बड़े 51 शहरों में ये प्रदर्शन हुए...
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न्यूजीलैंड में किसान ट्रैक्टर रैली
- फोटो : Agency
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विस्तार
पर्यावरण रक्षा के लिए लागू किए गए नियमों से न्यूजीलैंड के किसान भड़क उठे हैँ। शुक्रवार को जब उन्होंने अपने ट्रैक्टरों के साथ देशभर में प्रदर्शन किया, तो इस मुद्दे ने दुनिया का ध्यान खींचा। पर्यवेक्षकों के मुताबिक न्यूजीलैंड में ऐसा लगता है कि पर्यावरण रक्षा और किसानों के हित एक-दूसरे से टकरा रहे हैं। ऐसे में इस मसले का प्रधानमंत्री जेसिंडा ऑर्डेन की सरकार कैसे समाधान निकालती है, यह देखना सारी दुनिया की दिलचस्पी का विषय है।
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न्यूजीलैंड की मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि इतने बड़े पैमाने पर किसान प्रतिरोध इस देश में पहले कभी नहीं देखा गया था। किसान ट्रैक्टरों को चलाते हुए शहरों के बीच में पहुंच गए, जिससे वहां ट्रैफिक में रुकावट आई। रिपोर्टों के मुताबिक छोटे-बड़े 51 शहरों में ये प्रदर्शन हुए। लेकिन किसानों ने राजधानी वेलिंग्टन को प्रदर्शन से बाहर रखा। प्रदर्शनों का आयोजन ग्राउंडस्वेल एनजेड नाम के संगठन ने किया। इस संगठन में किसानों के अलावा कृषि मजदूर, ठेकेदार और कृषि कारोबार से जुड़े समूह शामिल हैं। ग्राउंडस्वेल एनजेड का आरोप है कि सरकार ने जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए ऐसे नियम लागू किए हैं, जो व्यावहारिक नहीं है। उसके मुताबिक इन नियमों की वजह से कृषि लागत बढ़ी है।
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प्रधानमंत्री आर्डेन ने कहा है कि वे पर्यावरण संबंधी चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए किसानों के साथ मिल कर काम कर रही हैं। उन्होंने कहा- ‘इस बात को मैं स्वीकार करती हूं कि हमारे सामने एक राष्ट्रीय चुनौती है। मेरे दिमाग में इसको लेकर कोई संदेह नहीं है कि कृषि क्षेत्र न्यूजीलैंड के लिए निर्णायक महत्व का है। इस क्षेत्र ने कोविड-19 महामारी के दौरान हमारी मदद की है। लेकिन दुर्भाग्यवश पर्यावरण संबंधी चुनौतियां भी हमारे सामने बनी हुई हैं।’
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न्यूजीलैंड सरकार ने पर्यावरण रक्षा के नियम लागू किए हैं। उसके तहत जल स्रोतों के दूषित होने पर रोक लगाने, जैव विविधता का क्षय रोकने, जोखिम भरे कृषि और औद्योगिक चलन पर रोक लगाने, और कार्बन उत्सर्जन को घटाने के नियम शामिल हैं। आंदोलनकारी किसानों के एक नेता ब्राइस मैकेंजी ने मीडिया से बातचीत मे कहा कि खेती के तौर-तरीकों मे बदलाव लाने की जरूरत से किसान वाकिफ हैं। लेकिन सभी जगह एक जैसे तरीकों को ही नहीं थोपा जा सकता है।
न्यूजीलैंड में 2019 में जारी एक सरकारी रिपोर्ट में देश के पर्यावरण को लेकर चिंताजनक तस्वीर पेश की गई थी। उसमें बताया गया था कि चार हजार देसी प्रजातियां खतरे में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक देश के इकॉसिस्टम का दो तिहाई हिस्सा खतरे में है। इसके अलावा खेती और उद्योग में जल के अनियंत्रित इस्तेमाल के कारण देश के जल स्रोतों में 10 फीसदी समाप्त हो चुके हैं।
न्यूजीलैंड जलवायु रक्षा योजना के तहत अपनी अंतरराष्ट्रीय वचनबद्धताओं को निभाने में भी पिछड़ा रहा है। क्लाइमेट चेंज परफॉर्मेंस इंडेक्स में वह 28वें नंबर पर है। इन्हीं कारणों से जेसिंडा ऑर्डेन की सरकार ने पर्यावरण संबंधी नियमों पर सख्ती से अमल शुरू किया है। लेकिन उससे किसानों के साथ-साथ पशुपालक भी नाराज हो गए हैँ। शुक्रवार के आंदोलन में शामिल हुए एक भेड़ पालक किसान ने कहा कि सरकार ने जो नियम लागू किए हैं, वे हास्यास्पद हैं।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि ये आंदोलन ऑर्डेन सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। उनके मुताबिक न्यूजीलैंड सरकार पर्यावरण और ग्रामीण हितों के बीच कैसे तालमेल बनाती है, उसे देखने पर दुनिया भर की निगाहें टिकी होंगी।