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Blindness: दुर्लभ नेत्र रोग की वजह से अंधेपन की चपेट में आने वालों के लिए इलाज संभव, वैज्ञानिकों ने खोजी दवा

Tue, 20 Dec 2022 06:09 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, वाशिंगटन।
एजेंसी, वाशिंगटन। Published by: देव कश्यप Updated Tue, 20 Dec 2022 06:09 AM IST
सार

शोधार्थियों ने बताया कि थायराइड नेत्र रोग एक दुर्लभ और दृष्टि कम करने वाली ऑटोइम्यून स्थिति है, जो आंखों के पीछे की मांसपेशियों और वसायुक्त ऊतकों में सूजन पैदा करती है। साथ ही, उसे बड़ा करने का कारण बनती है, जिससे आंखें उभरी हुई हो जाती हैं।

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New treatment discovered for rare eye disease may prevent blindness
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : ANI

विस्तार

दुर्लभ नेत्र रोग की वजह से अंधेपन की चपेट में आने वालों के लिए अब इलाज संभव हो सकेगा। एक अध्ययन के अनुसार, थायरॉयड नेत्र रोगियों में टेप्रोट्यूमैब दवा के इस्तेमाल से न्यूनतम इनवेसिव इंसुलिन जैसे विकास कारकों का उपचार किया जा सकता है। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधार्थियों ने रेंडमाइज्ड, डबल-ब्लाइंड और प्लेसीबो परीक्षण किया। अलग-अलग अस्पतालों में हुई नेत्र सर्जरी के रोगियों पर अध्ययन किया गया और इस दवा की खोज की है, जिसे हाल ही में यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा फास्ट ट्रैक ड्रग अप्रूवल दिया है जिसका विपणन टेपेज्जा ब्रांड नाम के तहत किया है। इसी के साथ ही यह इस स्थिति के लिए स्वीकृत पहली दवा बन गई।

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शोधार्थियों ने बताया कि थायराइड नेत्र रोग एक दुर्लभ और दृष्टि कम करने वाली ऑटोइम्यून स्थिति है, जो आंखों के पीछे की मांसपेशियों और वसायुक्त ऊतकों में सूजन पैदा करती है। साथ ही, उसे बड़ा करने का कारण बनती है, जिससे आंखें उभरी हुई हो जाती हैं। इसके अलावा, रोगी दोहरी दृष्टि और हल्की संवेदनशीलता का अनुभव कर सकते हैं। रोग अंधापन का कारण बन सकता है। इसकी उपचार तलाशने के लिए यह अध्ययन किया गया, जिसमें पता चला कि अगर टेप्रोट्यूमैब का उपचार किया जाए तो रोगियों के लिए नई आशा मिल सकती है।
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सर्जरी के अलावा उपचार का एक और विकल्प
एफडीए के सेंटर फॉर ड्रग इवैल्यूएशन एंड रिसर्च की डिवीजन ऑफ ट्रांसप्लांट एंड ऑप्थल्मोलॉजी प्रोडक्ट्स के उप निदेशक विली चेम्बर्स ने कहा, इस उपचार में बीमारी के पाठ्यक्रम को बदलने की क्षमता है। साथ ही रोगियों को सर्जरी के अलावा एक और उपचार का विकल्प मिलता है। उन्होंने बताया कि 21 सप्ताह तक मरीजों की निगरानी की गई थी।
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पहले तीन सप्ताह में मरीजों को सप्ताह में एक बार अंतःशिरा दवा दी गई। इसके बाद परिणाम में पता चला कि दवा लेने वाले 83% लोगों की आंखों के उभार में औसत दर्जे की कमी थी, जबकि प्लेसबो लेने वालों में 10% की कमी थी। प्लेसीबो लेने वाले 7% लोगों की तुलना में दवा लेने वालों में समग्र प्रतिक्रिया दर 78% थी।

  • अभी तक थायरॉयड नेत्र रोगियों के पास कोई वास्तविक उपचार विकल्प नहीं था। लेकिन अब यह मुमकिन हो पाया है।
  • इस दवा का नाम टेप्रोट्यूमैब है, जिसमें मोनोक्लोनल एंटीबॉडी है जो ऑटोइम्यून पैथोफिजियोलॉजी को रोकता है और थायरॉयड नेत्र रोग को कम करता है।
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