नीति दस्तावेज में खुलासा: अब अंतरिक्ष में युद्ध के लिए कमर कस रही हैं महाशक्तियां
विश्लेषकों ने कहा है कि ये नीति इस बात का प्रमाण है कि अंतरिक्ष में अधिक देशों की मौजूदगी बढ़ने से महाशक्तियां चिंतित हैं। अब चीन, रूस, भारत, और कई दूसरे देशों ने अंतरिक्ष की कक्षाओं में अपने केंद्र स्थापित करने के प्रयास तेज कर दिए हैं...
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अमेरिकी नेतृत्व वाले सैनिक गठबंधन- नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) की नई अंतरिक्ष नीति से अंतरिक्ष में सैन्य टकराव की आशंकाओं को और बल मिला है। नाटो ने अपनी अंतरिक्ष नीति इसी हफ्ते सार्वजनिक की है। उसमें साफ कहा गया है कि अगर नाटो के किसी सदस्य देश की अंतरिक्ष में स्थित संपत्ति पर हमला किया गया, तो नाटो उसे अपने ऊपर हमला मानेगा।
विश्लेषकों ने कहा है कि ये नीति इस बात का प्रमाण है कि अंतरिक्ष में अधिक देशों की मौजूदगी बढ़ने से महाशक्तियां चिंतित हैं। अब चीन, रूस, भारत, और कई दूसरे देशों ने अंतरिक्ष की कक्षाओं में अपने केंद्र स्थापित करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। ये देश इसके लिए जरूरी वैज्ञानिक और सैनिक तैयारियों में ज्यादा ताकत लगा रहे हैं। इससे पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ी है।
नाटो के नए नीति दस्तावेज में खुलासा
दो महीने पहले अमेरिका ने आरोप लगाया था कि रूस ने अपने एक बेकार हो गए उपग्रह पर उपग्रह-भेदी हथियार का परीक्षण किया। तब आरोप लगाया गया था कि उस रूसी परीक्षण से एक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र और उस पर मौजूद लोगों के लिए खतरा पैदा हो गया था। इस बीच यूक्रेन और कई दूसरे मुद्दों पर रूस के साथ पश्चिमी देशों का तनाव काफी बढ़ गया है। चीन के साथ भी इन देशों का तनाव बढ़ा है। इसीलिए विश्लेषक नाटो के ताजा नीति दस्तावेज को एक बड़े टकराव के संदर्भ में देख रहे हैं।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक नाटो ने सबसे पहले 2019 में एक अंतरिक्ष नीति बनाई थी। लेकिन तब उसके दस्तावेज को गोपनीय रखा गया था। 2021 में नाटो ने अंतरिक्ष के बारे में एक बयान जारी किया था। उसमें कहा गया था कि अगर अंतरिक्ष में नाटो के किसी सदस्य देश के ठिकाने पर हमला हुआ, तो उसे पूरा नाटो खुद पर हमला मानेगा। अब यही बात ताजा नीति दस्तावेज में दोहराई गई है।
स्वायत्ता भूमिका नहीं
जानकारों के मुताबिक ताजा नीति में नाटो जमीन, समुद्र, वायु और साइबर स्पेस के साथ ही अंतरिक्ष को भी अपनी ‘सुरक्षा’ नीति में शामिल किया है। इसमें इन सभी क्षेत्रों में तालमेल से कदम उठाने की बात कही गई है। इसमें कहा गया है कि नाटो अंतरिक्ष का इस्तेमाल शांतिपूर्ण उद्देश्यों और सभी देशों के साझा हित में करना चाहता है। इसमें इस सिद्धांत को दोहराया गया है कि अंतरिक्ष पर कोई देश अपना दावा नहीं ठोक सकता। दस्तावेज के मुताबिक नाटो भी अंतरिक्ष में ‘स्वायत्ता भूमिका’ निभाने की तैयारी में नहीं है। बल्कि वह इस मामले में सदस्य देशों के साथ तालमेल बनाना चाहता है। इसके बावजूद विश्लेषकों की राय है कि नीति दस्तावेज की भाषा आक्रामक है।
थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज से जुड़ीं वरिष्ठ अंतरिक्ष नीति विशेषज्ञ कैटलिन जॉनसन का कहना है कि नाटो ने अभी यह नहीं बताया है कि अंतरिक्ष में किस गतिविधि को वह हमला मानेगा। उन्होंने पूछा- अगर किसी उपग्रह को नष्ट करने के बजाय थोड़ी देर के लिए कोई देश उससे संपर्क भंग कर देता है, तो क्या नाटो इसे हमला समझेगा। अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से बातचीत में जॉनसन ने कहा- ‘मुझे लगता है कि नाटो ने जानबूझ कर इस बारे में अस्पष्टता बरती है, ताकि उसके विकल्प खुले रहें।’