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India Germany Relations: 'जर्मनी की नई सरकार भारत के साथ रिश्ते को देगी प्राथमिकता', जर्मन राजदूत का दावा

Thu, 27 Feb 2025 07:09 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Thu, 27 Feb 2025 07:09 PM IST
सार

भारत में जर्मन के दूत फिलिप एकरमैन ने कहा कि नए शासन में भी जर्मनी की विदेश नीति में यूरोपीय एकता, ट्रांसाटलांटिक संबंध और भारत जैसे प्रमुख साझेदारों के साथ रिश्ते को प्राथमिकता दी जाएगी। भारत के प्रति जर्मनी के रुख में कोई बदलाव नहीं आएगा। हो सकता है कि आने वाले महीनों में जर्मन सरकार के सदस्य भारत की यात्रा करें।

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'new govt of Germany will give priority to relations with India', claimsGerman Ambassador.
जर्मन राजदूत फिलिप एकरमैन। - फोटो : ANI

विस्तार

जर्मनी में हुए आम चुनावों में सीडीयू के नेता फ्रेडरिक मर्ज की जीत का भारत पर होने वाले असर को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसे लेकर भारत में जर्मन के दूत फिलिप एकरमैन ने कहा कि नए शासन में भी जर्मनी की विदेश नीति में यूरोपीय एकता, ट्रांसाटलांटिक संबंध और भारत जैसे प्रमुख साझेदारों के साथ रिश्ते को प्राथमिकता दी जाएगी। भारत के प्रति जर्मनी के रुख में कोई बदलाव नहीं आएगा। 
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जर्मनी के राजदूत ने कहा कि यह कहना काफी आसान है कि जर्मनी में विदेश नीति आम सहमति पर तय होती है। चाहे विदेश नीति की निरंतरता बनी रहती हैञ चाहे वह कंजर्वेटिव पार्टी हो या वामपंथी दल की सरकार हो। जर्मनी में आखिरी कंजर्वेटिव चांसलर एंजेला मर्केल थीं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार के साथ उनके बहुत अच्छे संबंध थे। नई सरकार से भी मुझे यही उम्मीद है।  उन्होंने कहा कि भारत के प्रति रुख और विश्वास में कोई बदलाव नहीं आएगा। भारत हमारा बहुत महत्वपूर्ण साझेदार है। हो सकता है कि आने वाले महीनों में जर्मन सरकार के सदस्य भारत की यात्रा करें।
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एकरमैन ने कहा कि फ्रेडरिक मर्ज कंज़र्वेटिव पार्टी के प्रमुख थे। संभवतः वे नए जर्मन चांसलर होंगे। उन्हें संसद में चुना जाना है। जिसका गठन चुनाव के 30 दिनों के भीतर मार्च के अंत तक होना है। मगर फ्रेडरिक मर्ज अपनी पार्टी के साथ अकेले शासन नहीं कर पाएंगे क्योंकि उन्हें लगभग 30 प्रतिशत वोट मिले हैं, इसलिए उन्हें गठबंधन सहयोगी की आवश्यकता होगी। 
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रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त होने से सबको होगी खुशी
रूस-यूक्रेन युद्ध की समाप्ति को लेकर जर्मन राजदूत ने कहा कि जर्मनी शांति वार्ता में यूक्रेन की भागीदारी की बात करेगा। अगर रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त हो जाता है तो दुनिया भर में हर कोई खुश होगा। आप जानते हैं जिस देश पर आक्रमण किया गया था, जिस देश ने बहुत से लोगों की जान गंवाई वह यूक्रेन है। इस मामले में उसे शांति वार्ता में शामिल होना चाहिए। ऐसा कोई तरीका नहीं है जिससे यूक्रेन के साथ किसी तरह की निर्धारित शांति हो। हम उम्मीद करते हैं कि किए जा रहे सभी प्रयास इस तथ्य की ओर ले जाएंगे कि यूक्रेन को शांति वार्ता में उचित स्थान मिलेगा। 

ट्रंप की यूरोपीय संघ पर टैरिफ लगाने की धमकी पर भी बोले
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से यूरोपीय संघ पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने पर जर्मनी के राजदूत ने कहा कि हम इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि जमीनी स्तर पर वास्तव में क्या किया जाता है। हमने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का पिछला कार्यकाल देखा है। जब शब्दों की बात आती है तो वे बहुत मजबूत हैं। उनके पास बहुत मजबूत विचार हैं। लेकिन हमें देखना होगा कि वास्तव में जमीन पर क्या होता है? मुझे पूरा विश्वास है कि, वर्तमान अमेरिकी प्रशासन जो प्रयास कर रहा है, उसमें प्रासंगिक भागीदार शामिल होंगे। यूरोप मूल रूप से एक प्रासंगिक भागीदार है।

एकरमैन ने कहा कि हमें नहीं भूलना चाहिए कि यूरोप ने इसका बोझ उठाया है। यूक्रेन में जो भी पैसा गया है, उसका सबसे बड़ा हिस्सा यूरोप का है, चाहे वह रक्षा उपकरणों के लिए हो या मानवीय सहायता या अन्य सहायता के लिए। इसलिए पिछले तीन वर्षों में यूरोप यूक्रेन का बहुत ही दृढ़ साझेदार रहा है और आगे भी ऐसा ही रहेगा। इसलिए यूरोप को भी यूक्रेन मामले में अपनी बात रखनी चाहिए।

यूरोपीय संघ की अध्यक्ष की यात्रा संबंधों की मजबूती का संकेत
यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की भारत यात्रा को लेकर राजदूत ने कहा कि यह भारत से मजबूत होते संबंधों का संकेत है। पूरा कॉलेजियम उनके नेतृत्व में भारत आ रहा है। मैंने पहले जीवन में ऐसा कुछ नहीं देखा है। यह एक बहुत ही मजबूत संकेत है कि वह यह बता रही हैं कि यूरोप भारत की ओर देख रहा है। यह संकेत है कि इस अनिश्चित समय में भारत और यूरोप को एक साथ मिलकर काम करना होगा और बेहतर तरीके से काम करने की कोशिश करनी होगी।


एफटीए पर बोले
बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर राजदूत ने कहा कि इस पर प्रगति करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति है। मुझे लगता है कि सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक एफटीए है। मुझे लगता है कि एफटीए के साथ और अधिक प्रगति करने के लिए एक निश्चित स्तर तक पहुंचने के लिए दोनों पक्षों की राजनीतिक इच्छाशक्ति अहम है। इसलिए मुझे लगता है कि निकट भविष्य में एफटीए के लिए इस प्रतिबद्धता को सुदृढ़ और नवीनीकृत करने का यह एक शानदार अवसर है। 

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