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Nepal Violence: नेपाल में सांप्रदायिक हिंसा पर PM बालेन की शांति की अपील, दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा

Fri, 31 Jul 2026 04:59 AM IST
Pavan आईएएनएस, काठमांडू
आईएएनएस, काठमांडू Published by: Pavan Updated Fri, 31 Jul 2026 04:59 AM IST
सार

नेपाल के मधेश प्रांत में हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच भड़की सांप्रदायिक हिंसा में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने शांति बनाए रखने की अपील करते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है। कई जिलों में कर्फ्यू लागू है, जबकि विपक्ष सरकार पर संकट से निपटने में विफल रहने का आरोप लगा रहा है।

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Nepali PM urges calm as communal violence spreads across southern districts
बालेन शाह, पीएम, नेपाल - फोटो : X @ShahBalen

विस्तार

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने देश के दक्षिण-पूर्वी मधेश प्रांत में फैली सांप्रदायिक हिंसा के बीच लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच शुरू हुई झड़पों में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई पुलिसकर्मी और आम लोग घायल हुए हैं। हालात को देखते हुए कई इलाकों में कर्फ्यू और निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि सरकार इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है। उन्होंने हिंसा में मारे गए जय प्रकाश मेहता, ओम प्रकाश मेहता और गणेश यादव के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के बाद कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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जांच समिति बनाई गई
प्रधानमंत्री ने बताया कि गृह मंत्रालय ने घटना की जांच के लिए एक समिति का गठन कर दिया है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग को सभी घायलों का बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से अफवाहें, अपुष्ट जानकारी या सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने वाली सामग्री साझा न करें।
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सरकार पर लापरवाही के आरोप
हिंसा बढ़ने के बाद विपक्ष ने प्रधानमंत्री शाह की सरकार पर निष्क्रिय रहने का आरोप लगाया है। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार ने समय रहते सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाई और राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व दिखाने में विफल रही। आलोचकों ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री बुधवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में शामिल नहीं हुए। हालांकि, गुरुवार को प्रधानमंत्री बालेन शाह ने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल से मुलाकात कर उन्हें सुरक्षा स्थिति की जानकारी दी।

कई जिलों में तनाव, कर्फ्यू लागू
मधेश प्रांत के सिराहा, धनुषा और सुनसरी समेत कई जिलों में गुरुवार को भी तनाव बना रहा। सिराहा के गोलबाजार और लहान तथा धनुषा के जनकपुरधाम में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। सिराहा में गोली लगने से किशोर  गणेश यादव  की मौत हो गई। वहीं सुनसरी में पहले हुई हिंसा में घायल  जय प्रकाश मेहता  ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इससे पहले  ओम प्रकाश मेहता  की भी मौत हो चुकी थी। हिंसा के दौरान आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं। हालात को देखते हुए सिराहा और जनकपुरधाम के कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया, जबकि भारत से सटे पर्सा जिले में निषेधाज्ञा लागू की गई है।

कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह हिंसा  26 जुलाई  को सुनसरी जिले के देवानगंज ग्रामीण नगरपालिका के कप्तानगंज इलाके में शुरू हुई। सावन महीने में  बोलबम यात्रा  के दौरान हिंदू श्रद्धालु डीजे बजाते हुए पवित्र जल लेकर जा रहे थे। पुलिस के अनुसार, तेज आवाज में बज रहे डीजे का कुछ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने विरोध किया। पहले दोनों पक्षों में बहस हुई, जो बाद में मारपीट और हिंसा में बदल गई। देखते ही देखते दोनों समुदायों के बड़ी संख्या में लोग लाठी, पत्थर, बांस और लोहे की रॉड लेकर मौके पर पहुंच गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। इसी दौरान पुलिस की गोली लगने से ओम प्रकाश मेहता की मौत हो गई।


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राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक
गुरुवार को प्रधानमंत्री बालेन शाह की अध्यक्षता में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएससी) की बैठक भी हुई। बैठक में नेपाल की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की गई और फैसला लिया गया कि सुरक्षा एजेंसियों तथा अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय बढ़ाया जाएगा, ताकि सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता बनाए रखी जा सके।

विपक्ष ने फिर साधा निशाना
पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के नेता  पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' ने भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि संकट के समय सभी राजनीतिक दलों के बीच संवाद और सहयोग नेपाल की परंपरा रही है, लेकिन मौजूदा सरकार इस परंपरा को निभाने में असफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री बालेन शाह मौजूदा संकट के दौरान अपेक्षित नेतृत्व देने में विफल रहे।
 
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