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Nepal Violence: झूठी सूचनाओं से महामारी की तरह फैली अराजकता, आंदोलन के दौरान नेपाल भी बना इंफोडेमिक का शिकार

Tue, 16 Sep 2025 06:56 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 16 Sep 2025 06:56 AM IST
सार

जेन-जी आंदोलन के दौरान नेपाल इंफोडेमिक यानी सूचना महामारी की चपेट में आ गया। टीवी और सोशल मीडिया पर झूठी खबरों और अफवाहों से अराजकता फैल गई। पूर्व प्रधानमंत्री की पत्नी की मौत जैसी खबरें भी गलत निकलीं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि ऐसे समय में गलत सूचनाओं से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी है।

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Nepal Violence False information spread chaos like an epidemic also became a victim of infodemic
नेपाल में हिंसा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जेन-जी आंदोलन के दौरान नेपाल एक और संकट इंफोडेमिक यानी सूचना महामारी से भी जूझ रहा था। हालात की जानकारी के लिए लोग टीवी और मोबाइल फोन की स्क्रीन से चिपके थे, पर उन्हें कतई अंदाजा नहीं था कि वे जो खबरें देख रहे हैं, उनमें कई झूठी और भ्रामक हैं। जैसे-जैसे भ्रामक सूचनाओं का प्रसार बढ़ता गया, अराजकता और दहशत भी बढ़ती गई। इंफोडेमिक शब्द पहली बार कोविड-19 महामारी के दौरान उभरा था, पर विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल पिछले हफ्ते व्यापक पैमाने पर इसका शिकार बना।
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काठमांडो पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, देश-दुनिया में मुख्यधारा के मीडिया तक ने इन सूचनाओं पर भरोसा कर लिया कि पूर्व प्रधानमंत्री झाला नाथ खनाल की पत्नी राजलक्ष्मी चित्रकार की मौत हो गई है। बाद में कीर्तिपुर अस्पताल की निदेशक किरण नकर्मी ने पुष्टि की कि हमले में बुरी तरह जलने के कारण चित्रकार की हालत गंभीर है और वह आईसीयू में भर्ती हैं। इसी तरह, कुछ वायरल वीडियो में राजशाही बहाल होने और हामी नेपाल के प्रमुख सुदन गुरुंग के भारतीय नागरिक होने की अफवाहें भी शामिल रहीं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि ऐसे संवेदनशील समय में जनता को संभावित गलत सूचनाओं के प्रति पहले से ही सचेत करने के उपाय किए जाने चाहिए।
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सैन्य गतिविधियों तक हावी रही झूठी सूचनाएं
कॉरपोरेट बाजार नामक फेसबुक पेज पर वीडियो शेयर कर दावा किया गया कि प्रदर्शनकारियों ने पशुपतिनाथ मंदिर में तोड़फोड़ की कोशिश की है। इसमें मंदिर के दरवाजे पर उमड़ते लोग दिख रहे हैं। फैक्ट चेक में पता चला कि इसे करीब दो माह पूर्व वत्सलेश्वरी जात्रा के मौके पर अपलोड किया गया था। 11 सितंबर को तेज बिक्रम कार्की ने फेसबुक पेज पर लाइव वीडियो साझा किया, जिसमें बिना नंबर प्लेट वाली बख्तरबंद गाड़ियां हेटौडा से काठमांडो की ओर जाती दिख रही हैं। इसके बाद दावा किया जाने लगा कि सेना सत्ता संभालने की तैयारी कर रही है। राजशाही फिर स्थापित हो सकती है।


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फैक्ट चेक में ये बातें आई सामने
फैक्ट चेक में पाया गया कि आवाजाही सिमारा बेस से पंचखाल सेंट्रल कैंप तक नियमित रसद सामग्री पहुंचाने का हिस्सा थी। भट-भटेनी के बारे में 13 सितंबर को फेसबुक उपयोगकर्ता विनय लामा ने दावा किया कि स्टोर से 35 से ज्यादा कंकाल मिले हैं। पुलिस प्रवक्ता एसपी अपिलराज बोहरा ने पुष्टि की कि केवल छह जले हुए शव बरामद हुए हैं।

सीएमआर नेपाल पत्रकारिता अकादमी के निदेशक और नेपालफैक्टचेक.ऑर्ग के प्रमुख उज्ज्वल आचार्य कहते हैं कि सटीक अपडेट की चाह में लोग झूठी सूचनाओं के जाल में उलझ गए। समझ नहीं पा रहे थे कि क्या सच है और क्या झूठ। डिजिटल राइट्स नेपाल के कार्यकारी निदेशक संतोष सिगडेल कहते हैं कि सोशल मीडिया पर अस्थिर सामग्री पर अंकुश की ठोस व्यवस्था न होने से स्थिति बिगड़ती है।
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