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Hindi News ›   World ›   Nepal Tragedy Mourning in New York-New Jersey families Amita always used to say she is on final journey

न्यूयॉर्क-न्यूजर्सी के परिवारों में मातम: हमेशा अंतिम यात्रा बता कैलाश जाती थीं अमिता...इस बार नहीं लौटीं

Mon, 31 Aug 2026 09:40 AM IST
ज्योति भास्कर लॉरेन मैकगॉगी/जॉर्जिया जी, द न्यूयॉर्क टाइम्स।
लॉरेन मैकगॉगी/जॉर्जिया जी, द न्यूयॉर्क टाइम्स। Published by: ज्योति भास्कर Updated Mon, 31 Aug 2026 09:40 AM IST
सार

21,778 फीट ऊंचे शिव धाम पर सैलाब का पहरा, न्यूयॉर्क-न्यूजर्सी के परिवारों में मातम, टूर ऑपरेटर से बुधवार सुबह हुई थी आखिरी बार बातचीत।

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Nepal Tragedy Mourning in New York-New Jersey families Amita always used to say she is on final journey
नेपाल में गए तीर्थयात्रियों की तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला प्रिंट-एजेंसी

विस्तार

कैलाश पर्वत की परिक्रमा कर मोक्ष और आत्मिक शांति पाने के लिए अमेरिका के न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी से निकले भारतीय मूल के श्रद्धालुओं का एक दल नेपाल के विनाशकारी सैलाब में लापता हो गया। इनमें न्यूयॉर्क की अमिता अमीन, न्यूजर्सी की तेजल पटेल और क्वींस के बुजुर्ग दंपती नीलम व रमेश शर्मा शामिल हैं।

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ये सभी श्रद्धालु नेपाल के रास्ते तिब्बत स्थित 21,778 फीट ऊंचे पवित्र कैलाश पर्वत और मानसरोवर की यात्रा पर निकले थे। यात्रा का आयोजन करने वाली कंपनी चलाने वाले दीपक लामिछाने के अनुसार, यह समूह बुधवार सुबह सीमा पर था। उसी समय उनकी आखिरी बार बात हुई थी। ठीक एक घंटे बाद हिमालय की घाटियों में मलबे और पानी की भीषण दीवार टूट पड़ी। इसके बाद टूर ऑपरेटर के दामाद समेत तीनों नेपाली गाइड और तीर्थयात्री दल का कोई अता-पता नहीं है।
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अमिता अमीन के बेटे ध्रुव रुंधे गले से कहते हैं, जब भी मैं ईश्वर के बारे में सोचता हूं, मेरी आंखों के सामने वही पर्वत आ जाता है। मां जब भी इस दुर्गम यात्रा पर निकलती थीं, हमेशा कहती थीं कि शायद यह उनकी आखिरी यात्रा हो। ध्रुव ने 2010 में अपनी मां के साथ कैलाश यात्रा की थी। उनका परिवार अब भी यह उम्मीद लगाए बैठा है कि शायद उनकी मां और बाकी तीर्थयात्री तिब्बत सीमा के उस पार फंसे हों, जहां पुल टूटने और मोबाइल नेटवर्क ठप होने की वजह से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
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ईश्वर के करीब रहना चाहती थीं
न्यूयॉर्क की अमिता अमीन (67) के लिए यह कोई पहली यात्रा नहीं थी। यह उनका कैलाश का 7वां और इस साल का दूसरा दौरा था। बहू अदिति पटेल बताती हैं, वह ईश्वर में अटूट विश्वास रखती थीं और जितना हो सके महादेव के इस पवित्र धाम के करीब रहना चाहती थीं।

6 महीने से चल रही थी तैयारी
इस बार अमिता की समधन तेजल पटेल (64) ने भी कैलाश जाने का फैसला किया। फिर श्रद्धालुओं के इस समूह ने पूरे जोश से तैयारियां शुरू कर दीं। तेजल ने छह महीने पहले से जिम जाकर खुद को फिट करना शुरू किया था ताकि कठिन चढाई में दिक्कत न हो।

परिक्रमा का लिया था संकल्प
क्वींस के रहने वाले रमेश और नीलम शर्मा ने अपनी नौकरी से रिटायर होने के बाद जीवन के इस पड़ाव पर कैलाश परिक्रमा का संकल्प लिया था। उनके परिवार ने बताया कि साठ की उम्र के इस जोड़े का भी बाढ़ के बाद से कोई पता नहीं चल पाया है।

शिव-पार्वती का स्थायी निवास...बेहद दुर्गम यात्रा

  • धार्मिक मान्यता है कि यह शिव और पार्वती का स्थायी निवास है। श्रद्धालु कई दिनों तक करीब 53 किमी का दुर्गम और पथरीला रास्ता पैदल या दंडवत प्रणाम करते हुए तय करते हैं।
  • इस पर्वत के शिखर पर चढ़ना पूरी तरह वर्जित है। मानसरोवर झील के पवित्र जल में स्नान को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति का मार्ग माना जाता है। यह बौद्ध, जैन और सिख धर्म के लिए भी समान रूप से पूजनीय है।

पांच धर्मों की आस्था का केंद्र

  • हिंदू : परिक्रमा से पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • तिब्बती बौद्ध : तांत्रिक देवताओं का वास; आत्मज्ञान का केंद्र।
  • जैन : प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की निर्वाण स्थली।
  • सिख : गुरुनानक देव का हिमालयी योगियों और सिद्धों के साथ ऐतिहासिक संवाद स्थल।
  • बॉन परंपरा : तिब्बत की बॉन परंपरा में यह नौमंजिला स्वास्तिक पर्वत और जीवात्मा है।
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