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नेपाल बाढ़ त्रासदी: 1341 मौतें, करीब 5000 लापता; 1000 से ज्यादा अज्ञात शव दफनाए गए, बचाव कार्य जारी
Sun, 06 Sep 2026 04:38 PM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, काठमांडो
पीटीआई, काठमांडो
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Sun, 06 Sep 2026 04:38 PM IST
सार
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के करीब दो सप्ताह बाद भी राहत और खोज अभियान जारी है। आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है और हजारों लोग अब तक लापता हैं। दूर-दराज के इलाकों से बरामद क्षत-विक्षत शवों और मानव अवशेषों की पहचान प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। इस समस्या से निपटने के लिए पुलिस ने लापता लोगों के परिजनों के डीएनए नमूने जुटाने शुरू किए हैं।
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नेपाल बाढ़ त्रासदी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
नेपाल में भीषण बाढ़ आने के 12वें दिन भी बचावकर्मी लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। वहीं, अधिकारियों के सामने मृतकों की पहचान करने में लगातार मुश्किलें आ रही हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार, बाढ़ में मरने वालों की संख्या 1,341 हो गई है, जबकि करीब 5,000 लोग अब भी लापता हैं। अब तक 13,100 से अधिक लोगों को बचाया जा चुका है।
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों का हिमस्खलन हुआ था। इसके बाद भोटेकोशी नदी में पानी और मलबे का तेज बहाव आया, जिसने उत्तरी और मध्य नेपाल में कई बस्तियों को तबाह कर दिया। घर, वाहन, सड़कें, पुल और जलविद्युत ढांचे बह गए या क्षतिग्रस्त हो गए।
चीन ने की महज 31 लोगों की मौत की पुष्टि
चीनी मीडिया की खबरों के अनुसार, चीन की ओर कम से कम 31 लोगों की मौत हुई है, जबकि तिब्बत में 500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। अधिकारियों के अनुसार, नेपाल में बरामद शवों में कम से कम 85 बच्चे हैं। करीब 500 शव ऐसे मिले हैं, जिनके शरीर के कुछ हिस्से नहीं हैं। कई शवों की स्थिति खराब होने के कारण उनकी पहचान करने में मुश्किल हो रही है।
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नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, सबसे अधिक 362 शव चितवन जिले में बरामद हुए हैं। इसके अलावा नवलपरासी पूर्व, नवलपरासी पश्चिम, नुवाकोट, रसुवा, गोरखा, धाड़िंग और तनहूं जिलों में भी शव मिले हैं। प्राधिकरण के अनुसार, अब तक केवल 98 शवों की पहचान कर उन्हें उनके परिवारों को सौंपा जा सका है।
नेपाल में मृतकों की पहचान करना बना बड़ी चुनौती
मृतकों की पहचान करना बड़ी चुनौती बन गया है। बाढ़ में बहकर दूर पहुंचे कई शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कई शव सड़ चुके हैं या उनके केवल कुछ हिस्से ही बरामद हुए हैं। पुलिस के अनुसार, आपदा स्थल से बहुत दूर मिले शवों और पानी तथा कीचड़ में लंबे समय तक रहने वाले शवों की पहचान करना विशेष रूप से मुश्किल है।
नेपाल पुलिस ने लापता लोगों के परिजनों से डीएनए नमूने लेना शुरू कर दिया है। इन नमूनों की मदद से बाढ़ के बाद मिले लावारिस शवों और मानव अवशेषों की पहचान की जाएगी। नेपाल में परिजन काठमांडू स्थित नेपाल पुलिस अस्पताल या अपने निकटतम जिला पुलिस कार्यालय में नमूने दे सकते हैं।
लोगों से लिए जा रहे डीएनए के नमूने
अधिकारियों ने बताया कि डीएनए नमूने लेने के बाद 1,000 से अधिक अज्ञात शवों को दफना दिया गया है, ताकि भविष्य में उनकी पहचान की जा सके। नेपाल के सूचना एवं संचार मंत्री बिक्रम तिमिल्सिना ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि रसुवा में बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री की कमी न हो और उसके वितरण में कोई कुप्रबंधन न हो।
सरकारी समाचार पत्र गोरखापत्र के ऑनलाइन संस्करण से बातचीत में तिमिल्सिना ने कहा कि आपदा के बड़े पैमाने के बावजूद सरकार राहत और पुनर्वास के काम में सक्रिय रूप से जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि फिलहाल राहत सामग्री की कोई कमी नहीं है और सरकार संसाधनों के प्रबंधन में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होने देगी।
मंत्री ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों के लिए स्कूलों और अस्पतालों की इमारतों में अस्थायी आवास की व्यवस्था की गई है। उनके दीर्घकालिक पुनर्वास की योजना भी तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में बाधित संचार, बिजली और सड़क नेटवर्क को बहाल करने के लिए सरकार अपने बलों और व्यवस्थाओं को जुटा रही है।
एक दिन पहले फिर आई थी बाढ़
वहीं, रविवार को गोरखा जिले में आई एक और बाढ़ में चार मकान और एक झूला पुल बह गया। हालांकि, इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। पुलिस के अनुसार, नामरुंग खोला नदी में पानी बढ़ने के बाद चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका-4 में बाढ़ आई। स्थानीय लोगों को बाढ़ के आने का पता चल गया था, इसलिए वे सुरक्षित स्थानों पर चले गए। इसके बाद चार मकान बह गए।
अधिकारियों ने बताया कि नदी के उद्गम के पास कुछ समय के लिए पानी का रास्ता रुक गया होगा और बाद में मिट्टी तथा मलबे के साथ तेज बहाव नीचे की ओर आया। नामरुंग खोला आगे जाकर बुधीगंडकी नदी में मिलती है। स्थानीय खबरों के अनुसार, नामरुंग इलाके में दो छोटी जलविद्युत परियोजनाएं भी बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुई हैं। झूला पुल बहने के कारण इलाके में आवाजाही भी प्रभावित हुई है।
दक्षिण कोरिया ने नेपाल के बाढ़ बाद पुनर्निर्माण में मदद का भरोसा दिया
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने रविवार को हिमालयी देश में आई भीषण बाढ़ के बाद जारी खोज, बचाव और राहत अभियानों पर चर्चा की। इस आपदा में 1,300 से अधिक लोगों की मौत हुई है और करीब 5,000 लोग अब भी लापता हैं। काठमांडू में हुई बैठक में दोनों नेताओं ने लापता दक्षिण कोरियाई नागरिकों का पता लगाने के प्रयासों पर भी विस्तार से चर्चा की।
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26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों का हिमस्खलन हुआ था। इसके बाद भोटेकोशी नदी में पानी और मलबे का तेज बहाव आया, जिसने उत्तरी और मध्य नेपाल में कई बस्तियों को तबाह कर दिया। घर, वाहन, सड़कें, पुल और जलविद्युत ढांचे बह गए या क्षतिग्रस्त हो गए।
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चीन ने की महज 31 लोगों की मौत की पुष्टि
चीनी मीडिया की खबरों के अनुसार, चीन की ओर कम से कम 31 लोगों की मौत हुई है, जबकि तिब्बत में 500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। अधिकारियों के अनुसार, नेपाल में बरामद शवों में कम से कम 85 बच्चे हैं। करीब 500 शव ऐसे मिले हैं, जिनके शरीर के कुछ हिस्से नहीं हैं। कई शवों की स्थिति खराब होने के कारण उनकी पहचान करने में मुश्किल हो रही है।
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नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, सबसे अधिक 362 शव चितवन जिले में बरामद हुए हैं। इसके अलावा नवलपरासी पूर्व, नवलपरासी पश्चिम, नुवाकोट, रसुवा, गोरखा, धाड़िंग और तनहूं जिलों में भी शव मिले हैं। प्राधिकरण के अनुसार, अब तक केवल 98 शवों की पहचान कर उन्हें उनके परिवारों को सौंपा जा सका है।
नेपाल में मृतकों की पहचान करना बना बड़ी चुनौती
मृतकों की पहचान करना बड़ी चुनौती बन गया है। बाढ़ में बहकर दूर पहुंचे कई शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कई शव सड़ चुके हैं या उनके केवल कुछ हिस्से ही बरामद हुए हैं। पुलिस के अनुसार, आपदा स्थल से बहुत दूर मिले शवों और पानी तथा कीचड़ में लंबे समय तक रहने वाले शवों की पहचान करना विशेष रूप से मुश्किल है।
नेपाल पुलिस ने लापता लोगों के परिजनों से डीएनए नमूने लेना शुरू कर दिया है। इन नमूनों की मदद से बाढ़ के बाद मिले लावारिस शवों और मानव अवशेषों की पहचान की जाएगी। नेपाल में परिजन काठमांडू स्थित नेपाल पुलिस अस्पताल या अपने निकटतम जिला पुलिस कार्यालय में नमूने दे सकते हैं।
लोगों से लिए जा रहे डीएनए के नमूने
अधिकारियों ने बताया कि डीएनए नमूने लेने के बाद 1,000 से अधिक अज्ञात शवों को दफना दिया गया है, ताकि भविष्य में उनकी पहचान की जा सके। नेपाल के सूचना एवं संचार मंत्री बिक्रम तिमिल्सिना ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि रसुवा में बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री की कमी न हो और उसके वितरण में कोई कुप्रबंधन न हो।
सरकारी समाचार पत्र गोरखापत्र के ऑनलाइन संस्करण से बातचीत में तिमिल्सिना ने कहा कि आपदा के बड़े पैमाने के बावजूद सरकार राहत और पुनर्वास के काम में सक्रिय रूप से जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि फिलहाल राहत सामग्री की कोई कमी नहीं है और सरकार संसाधनों के प्रबंधन में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होने देगी।
मंत्री ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों के लिए स्कूलों और अस्पतालों की इमारतों में अस्थायी आवास की व्यवस्था की गई है। उनके दीर्घकालिक पुनर्वास की योजना भी तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में बाधित संचार, बिजली और सड़क नेटवर्क को बहाल करने के लिए सरकार अपने बलों और व्यवस्थाओं को जुटा रही है।
एक दिन पहले फिर आई थी बाढ़
वहीं, रविवार को गोरखा जिले में आई एक और बाढ़ में चार मकान और एक झूला पुल बह गया। हालांकि, इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। पुलिस के अनुसार, नामरुंग खोला नदी में पानी बढ़ने के बाद चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका-4 में बाढ़ आई। स्थानीय लोगों को बाढ़ के आने का पता चल गया था, इसलिए वे सुरक्षित स्थानों पर चले गए। इसके बाद चार मकान बह गए।
अधिकारियों ने बताया कि नदी के उद्गम के पास कुछ समय के लिए पानी का रास्ता रुक गया होगा और बाद में मिट्टी तथा मलबे के साथ तेज बहाव नीचे की ओर आया। नामरुंग खोला आगे जाकर बुधीगंडकी नदी में मिलती है। स्थानीय खबरों के अनुसार, नामरुंग इलाके में दो छोटी जलविद्युत परियोजनाएं भी बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुई हैं। झूला पुल बहने के कारण इलाके में आवाजाही भी प्रभावित हुई है।
दक्षिण कोरिया ने नेपाल के बाढ़ बाद पुनर्निर्माण में मदद का भरोसा दिया
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने रविवार को हिमालयी देश में आई भीषण बाढ़ के बाद जारी खोज, बचाव और राहत अभियानों पर चर्चा की। इस आपदा में 1,300 से अधिक लोगों की मौत हुई है और करीब 5,000 लोग अब भी लापता हैं। काठमांडू में हुई बैठक में दोनों नेताओं ने लापता दक्षिण कोरियाई नागरिकों का पता लगाने के प्रयासों पर भी विस्तार से चर्चा की।