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Nepal: नेपाल नहीं हटाएगा एक रुपये के सिक्के से विवादित नक्शा, भारत की किन जगहों को बताया अपना?
Sat, 25 Jul 2026 10:28 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, काठमांडू
पीटीआई, काठमांडू
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sat, 25 Jul 2026 10:28 PM IST
सार
नेपाल राष्ट्र बैंक ने स्पष्ट किया है कि नए डिजाइन वाले एक रुपये के सिक्के पर देश का वही नक्शा रहेगा, जिसमें लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है। इससे पहले सरकार ने सिक्के पर नक्शे की जगह बौद्ध मठ का चित्र लगाने का प्रस्ताव मंजूर किया था, लेकिन राजनीतिक और सार्वजनिक विरोध के बाद फैसला बदल दिया गया।
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भारत-नेपाल सीमा विवाद
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
नेपाल अपने नए डिजाइन वाले एक रुपये के सिक्के पर विवादित नक्शा ही जारी रखेगा। नेपाल राष्ट्र बैंक (एनआरबी) ने शनिवार को कहा कि नए सिक्के पर लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को नेपाल के हिस्से के रूप में दिखाया जाएगा। नेपाल इन क्षेत्रों पर अपना दावा करता है, जबकि भारत का कहना है कि लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी उत्तराखंड का हिस्सा हैं। भारत का यह भी कहना है कि इस मुद्दे का समाधान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता के जरिए होना चाहिए।
नेपाल में तत्कालीन के.पी. शर्मा ओली सरकार ने मई 2020 में इन क्षेत्रों को अपने आधिकारिक नक्शे में शामिल किया था। नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल ने कहा कि केंद्रीय बैंक देश के नए नक्शे वाला एक रुपये का सिक्का जारी करेगा, जिसमें इन क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा दिखाया जाएगा।
जनता और विपक्षी दलों के दबाव में झुकी नेपाल सरकार
20 जुलाई को नेपाल सरकार ने एक रुपये के सिक्के पर बने नेपाल के नक्शे की जगह एक बौद्ध मठ की तस्वीर लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। हालांकि, विपक्षी दलों और आम जनता के दबाव के बाद सरकार ने अपने फैसले में बदलाव करते हुए एक रुपये के सिक्के पर नक्शा बरकरार रखने का निर्णय लिया।
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पौडेल ने कहा कि केंद्रीय बैंक को अभी तक सिक्के का नया डिजाइन आधिकारिक रूप से नहीं मिला है, लेकिन उन्हें पूरा विश्वास है कि नए सिक्के पर नेपाल का वही नक्शा होगा। उन्होंने बताया कि नए सिक्के का आकार और धातु बदली जाएगी। यह पहले के सिक्के की तुलना में छोटा और हल्का होगा।
क्या है भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद?
भारत और नेपाल के बीच लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को लेकर सीमा विवाद कई दशकों से चला आ रहा है। यह क्षेत्र भारत के उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले और नेपाल के सुदूर-पश्चिमी हिस्से के बीच स्थित है। विवाद की जड़ 1816 की सुगौली संधि है, जिसके अनुसार महाकाली (काली) नदी को दोनों देशों की सीमा माना गया था। असली मतभेद इस बात पर है कि काली नदी का वास्तविक उद्गम स्थल कौन-सा है।
नेपाल का दावा है कि नदी का स्रोत लिम्पियाधुरा है, इसलिए लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी उसके क्षेत्र में आते हैं। वहीं भारत का कहना है कि नदी का उद्गम कालापानी के पास है, इसलिए यह इलाका भारतीय सीमा का हिस्सा है। भारत 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद से कालापानी क्षेत्र में सुरक्षा बल तैनात किए हुए है।
नेपाल के नक्शे पर भारत जता चुका है विरोध
वर्ष 2020 में भारत द्वारा लिपुलेख तक सड़क बनाए जाने के बाद नेपाल ने विरोध जताया और अपने नए राजनीतिक मानचित्र में इन तीनों क्षेत्रों को शामिल कर लिया। भारत ने इस कदम को स्वीकार नहीं किया और इसे एकतरफा कार्रवाई बताया। दोनों देशों का आधिकारिक रुख है कि इस विवाद का समाधान द्विपक्षीय वार्ता और कूटनीतिक बातचीत के माध्यम से ही किया जाएगा।
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नेपाल में तत्कालीन के.पी. शर्मा ओली सरकार ने मई 2020 में इन क्षेत्रों को अपने आधिकारिक नक्शे में शामिल किया था। नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल ने कहा कि केंद्रीय बैंक देश के नए नक्शे वाला एक रुपये का सिक्का जारी करेगा, जिसमें इन क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा दिखाया जाएगा।
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जनता और विपक्षी दलों के दबाव में झुकी नेपाल सरकार
20 जुलाई को नेपाल सरकार ने एक रुपये के सिक्के पर बने नेपाल के नक्शे की जगह एक बौद्ध मठ की तस्वीर लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। हालांकि, विपक्षी दलों और आम जनता के दबाव के बाद सरकार ने अपने फैसले में बदलाव करते हुए एक रुपये के सिक्के पर नक्शा बरकरार रखने का निर्णय लिया।
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पौडेल ने कहा कि केंद्रीय बैंक को अभी तक सिक्के का नया डिजाइन आधिकारिक रूप से नहीं मिला है, लेकिन उन्हें पूरा विश्वास है कि नए सिक्के पर नेपाल का वही नक्शा होगा। उन्होंने बताया कि नए सिक्के का आकार और धातु बदली जाएगी। यह पहले के सिक्के की तुलना में छोटा और हल्का होगा।
क्या है भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद?
भारत और नेपाल के बीच लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को लेकर सीमा विवाद कई दशकों से चला आ रहा है। यह क्षेत्र भारत के उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले और नेपाल के सुदूर-पश्चिमी हिस्से के बीच स्थित है। विवाद की जड़ 1816 की सुगौली संधि है, जिसके अनुसार महाकाली (काली) नदी को दोनों देशों की सीमा माना गया था। असली मतभेद इस बात पर है कि काली नदी का वास्तविक उद्गम स्थल कौन-सा है।
नेपाल का दावा है कि नदी का स्रोत लिम्पियाधुरा है, इसलिए लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी उसके क्षेत्र में आते हैं। वहीं भारत का कहना है कि नदी का उद्गम कालापानी के पास है, इसलिए यह इलाका भारतीय सीमा का हिस्सा है। भारत 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद से कालापानी क्षेत्र में सुरक्षा बल तैनात किए हुए है।
नेपाल के नक्शे पर भारत जता चुका है विरोध
वर्ष 2020 में भारत द्वारा लिपुलेख तक सड़क बनाए जाने के बाद नेपाल ने विरोध जताया और अपने नए राजनीतिक मानचित्र में इन तीनों क्षेत्रों को शामिल कर लिया। भारत ने इस कदम को स्वीकार नहीं किया और इसे एकतरफा कार्रवाई बताया। दोनों देशों का आधिकारिक रुख है कि इस विवाद का समाधान द्विपक्षीय वार्ता और कूटनीतिक बातचीत के माध्यम से ही किया जाएगा।