फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   nepal: responsibility of conveying the decision of the cabinet to the US in the SPP case now come to Ministry of External Affairs

US-Nepal Partnership: अमेरिकी नाराजगी से नेपाल चिंतित, एसपीपी संबंधी फैसला बताने को लेकर असमंजस

Fri, 24 Jun 2022 04:57 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 24 Jun 2022 04:57 PM IST
सार

काठमांडू स्थित अमेरिकी राजनयिकों ने इस बारे में अपनी नाराजगी नेपाल सरकार को बताई है। कुछ खबरों में कहा जा रहा है कि इस नाराजगी के कारण नेपाल का विदेश मंत्रालय असमंजस में है। इसी वजह से कैबिनेट का फैसला बताने के लिए अमेरिका को पत्र लिखने में देर हो रही है...

विज्ञापन
nepal: responsibility of conveying the decision of the cabinet to the US in the SPP case now come to Ministry of External Affairs
अमेरिकी दल के साथ शेर बहादुर देउबा - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

अमेरिका के स्टेट पार्टनरशिप प्रोग्राम (एसपीपी) के जंजाल से नेपाल सरकार अभी तक बाहर नहीं निकल पाई है। देश में तीखे विवाद के बाद बीते सोमवार को सरकार ने फैसला किया था कि नेपाली सेना एसपीपी में शामिल होने के लिए अब और आगे कदम नहीं बढ़ाएगी। लेकिन अब सवाल ये उठा खड़ा हुआ है कि ऐसा कैसे किया जाए। नेपाल के विदेश मंत्रालय को एसपीपी से बाहर निकलने संबंधी फैसले का पत्र गुरुवार को प्राप्त हुआ। अब विदेश मंत्रालय को ये तय करना है कि इस निर्णय के अनुरूप वह कैसे कदम उठाए।

विज्ञापन


विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने मीडियाकर्मियों को बताया- ‘हमें प्रधानमंत्री कार्यालय और मंत्रिमंडल से इस बारे में संदेश मिला है। हम राजनीतिक नेतृत्व के साथ संपर्क कर रहे हैं। हम इस फैसले पर विचार-विमर्श कर रहे हैं, क्योंकि हमें जो संदेश मिला है, उसमें स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बताया गया है।’ अधिकारी ने कहा कि विदेश मंत्रालय इस मामले की गंभीरता को समझता है। इसलिए राजनीतिक नेतृत्व से मिले निर्देश के मुताबिक वह कदम उठाएगा।

विज्ञापन

अब विदेश मंत्रालय संभालेगा कमान

बीते सोमवार को मंत्रिमंडल ने यह फैसला भी लिया था कि आगे से दूसरे देशों की सरकारों से सारा पत्राचार सिर्फ विदेश मंत्रालय करेगा। इसलिए एसपीपी मामले में अमेरिका को कैबिनेट का फैसला बताने की जिम्मेदारी अब विदेश मंत्रालय पर आ गई है। इस बीच काठमांडू के राजनीतिक हलकों में ये चर्चा तेज हो गई है कि कैबिनेट के इस फैसले से अमेरिका नाराज है। काठमांडू स्थित अमेरिकी राजनयिकों ने इस बारे में अपनी नाराजगी नेपाल सरकार को बताई है। कुछ खबरों में कहा जा रहा है कि इस नाराजगी के कारण नेपाल का विदेश मंत्रालय असमंजस में है। इसी वजह से कैबिनेट का फैसला बताने के लिए अमेरिका को पत्र लिखने में देर हो रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन


पिछले दिनों ये खबर लीक हुई थी कि अमेरिका नेपाल की सेना पर उसके नेशनल गार्ड के साथ एसपीपी में शामिल होने के लिए दबाव डाल रहा है। इसको लेकर नेपाल में जोरदार विवाद खड़ा हो गया। लगभग सभी राजनीतिक दलों ने नेपाल के अमेरिका के साथ किसी सैनिक गठबंधऩ में शामिल होने का विरोध किया। उसके बाद ही नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने एसपीपी में शामिल ना होने का निर्णय लिया।

फैसले से नेपाल हुआ खुश

गुरुवार को चीन ने इस फैसले का स्वागत किया। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि चीन नेपाल की गुटनिरपेक्ष नीति का हमेशा समर्थन करता रहेगा। प्रवक्ता ने कहा- ‘नेपाल के विभिन्न राजनीतिक दलों और समूहों, सरकार, सेना, और नेपाली समाज ने एसपीपी को एक सैनिक और सुरक्षा पहल के रूप में देखा है, जिसका संबंध अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति से है। वहां ये राय बनी है कि इसमें शामिल होना नेपाल के राष्ट्रीय हित, लंबे समय से अपनाई गई गुटनिरपेक्षता की नीति, और संतुलित विदेश नीति के खिलाफ है।’



इसके पहले काठमांडू स्थित अमेरिकी दूतावास की प्रवक्ता अना रिचे-एलेन ने नेपाल के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था- एसपीपी में शामिल होना या नहीं होना, यह नेपाल के ऊपर है। दुनिया भर में एसपीपी अमेरिका के नेशनल गार्ड और सैनिक/ नागरिक कर्मियों को विभिन्न प्रकार की ट्रेनिंग के लिए करीब लाता है। लगभग 90 देश एसपीपी में शामिल हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed