नेपाल में नया दांवपेंच: अब प्रधानमंत्री देउबा को धमकाने पर उतर आए हैं पुष्प कमल दहल
माओइस्ट सेंटर के प्रमुख पुष्प कमल दहल ने यह दावा भी किया है कि अब देश में सत्ता की चाबी उनकी पार्टी के हाथ में है। दहल के ताजा बयान को नेपाल की राजनीति में शुरू हुई दांवपेच की नई मिसाल के रूप में देखा जा रहा है...
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नेपाल में सत्ताधारी गठबंधन के घटक कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) ने प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की पार्टी नेपाली कांग्रेस को चेतावनी दी है कि वह अहंकार ना दिखाए। माओइस्ट सेंटर के प्रमुख पुष्प कमल दहल ने यह दावा भी किया है कि अब देश में सत्ता की चाबी उनकी पार्टी के हाथ में है। दहल के ताजा बयान को नेपाल की राजनीति में शुरू हुई दांवपेच की नई मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
दहल ने ये टिप्पणियां स्थानीय चुनावों में माओइस्ट सेंटर के निर्वाचित हुए प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए की। उन्होंने कहा- ‘जनता ने नेपाली राजनीति की चाबी माओइस्ट सेंटर के हाथ में सौप दी है। माओइस्ट सेंटर ने नेपाली कांग्रेस को सत्ता में लाने के लिए बड़े प्रयास किए थे। लेकिन अगर ये पार्टी भी सीपीएन-यूएमएल की तरह अहंकार दिखाती है, तो हम उसकी हैसियत बता देंगे। हम उम्मीद करते हैं कि हमारे ऐसा करने की नौबत नहीं आएगी।’
स्थानीय चुनावों को सबसे ज्यादा सीटें नेपाली कांग्रेस को
दहल के इस बयान को प्रधानमंत्री देउबा और नेपाली कांग्रेस के लिए सीधी धमकी के रूप में देखा गया है। पिछले महीने हुए स्थानीय चुनावों में माओइस्ट सेंटर पार्टी तीसरी सबसे बड़ी ताकत बन कर उभरी। सबसे ज्यादा सीटें नेपाली कांग्रेस को मिलीं। उसके बाद विपक्षी दल और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की पार्टी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) का नंबर रहा। विश्लेषकों के मुताबिक इन चुनाव नतीजों से माओइस्ट सेंटर में ये भरोसा मजबूत हुआ है कि इसी साल के अंत में होने वाले संसदीय आम चुनाव में भी वह तीसरी सबसे बड़ी ताकत बन कर उभरेगी। उस स्थिति में किसी सरकार बनेगी, यह तय करने की ताकत उसके पास होगी।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक संसदीय चुनाव की तारीख तय करने के बारे में सत्ताधारी गठबंधन में शामिल पार्टियों के बीच विचार-विमर्श शुरू हो गया है। सत्ताधारी गठबंधन में नेपाली कांग्रेस और माओइस्ट सेंटर के अलावा कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट), जनता समाजवादी पार्टी, और जन मोर्चा नेपाल शामिल हैं। इन पांचों दलों ने स्थानीय चुनाव आपसी तालमेल से लड़ा था। लेकिन अब यूनिफाइड सोशलिस्ट पार्टी भी नाराज बताई जाती है। उसने शिकायत जताई है कि स्थानीय चुनावों में नेपाली कांग्रेस और माओइस्ट सेंटर ने ईमानदारी से उसके उम्मीदवारों का समर्थन नहीं किया।
फिर से ‘लेफ्ट गठबंधन’ बनाने की चर्चा
कुछ मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कम्युनिस्ट पार्टियों के बीच एक बार फिर से ‘लेफ्ट गठबंधन’ बनाने की चर्चा शुरू हो गई है। इससे नेपाली कांग्रेस परेशान बताई जाती है। नेपाली कांग्रेस के कई नेताओं ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा है कि दहल की सियासी महत्त्वाकांक्षाएं बढ़ गई हैं। इसीलिए अब वे कड़ी सौदेबाजी करने का इरादा दिखा रहे हैं। नेपाली कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने कहा- ‘प्रधानमंत्री देउबा दहल और ओली की पार्टियों के बीच लेफ्ट गठबंधन बनने की संभावना को लेकर चिंतित हैं।’
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अतीत में दहल और ओली के बीच जैसी कड़वाहट रही है, उसे देखते हुए उन दोनों की पार्टियों में अगले संसदीय चुनाव के लिए गठबंधन बन पाना दूर की संभावना ही है। लेकिन राजनीति में चूंकि किसी स्थिति को असंभव नहीं माना जाता, इसलिए नेपाली कांग्रेस अभी चल रही चर्चाओं से चिंतित नजर आ रही है।