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नेपाल: चुनाव की तारीखों को लेकर गहरे ऊहापोह में फंस गए हैं प्रधानमंत्री देउबा

Tue, 25 Jan 2022 04:04 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 25 Jan 2022 04:04 PM IST
सार

कई संवैधानिक और कानूनी विशेषज्ञों ने भी राय जताई है कि स्थानीय चुनाव अप्रैल-मई में कराना अनिवार्य है। इस मद्दे पर पैदा हुए भ्रम के बीच सत्ताधारी गठबंधन ने पिछले शुक्रवार को कहा था कि वह इस मामले में संवैधानिक विशेषज्ञों की राय लेगा। इस बीच एक राय यह भी जताई गई है कि संघीय, प्रांतीय, और स्थानीय- तीनों स्तरों के चुनाव को एक साथ ही कराए जाएं...

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Nepal: Prime Minister Sher Bahadur Deuba is in deep confusion over election dates
शेर बहादुर देउबा, पीएम नेपाल - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

अगले चुनाव के समय को लेकर सत्ताधारी नेपाली कांग्रेस और उसकी सहयोगी कम्युनिस्ट पार्टियों के बीच खींचतान बढ़ती जा रही है। बताया जाता है कि इससे प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। देउबा अपनी पार्टी या अपने सहयोगी दलों दोनों में से किसी को नाखुश करने की स्थिति में नहीं हैं।

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सत्ताधारी गठबंधन में शामिल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के नेता पुष्प कमल दहल ने ये प्रस्ताव रखा है कि संसदीय चुनाव अप्रैल-मई में कराए जाएं। उन्होंने कहा है कि स्थानीय चुनाव संसदीय चुनाव के बाद होने चाहिए। सूत्रों के मुताबिक दहल के इस प्रस्ताव से नेपाली कांग्रेस के भीतर गहरे भ्रम की स्थिति बन गई है। इस बीच ऐसे संकेत भी हैं कि इस मुद्दे पर नेपाली कांग्रेस के भीतर भी मतभेद पैदा हो गया है। प्रधानमंत्री देउबा के समर्थक खेमे और असंतुष्ट नेता शेखर कोइराला के समर्थक खेमे की बीच इस मुद्दे पर अलग राय सामने आई है।

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चुनावों को अप्रैल-मई में कराने की योजना

बताया जाता है कि देउबा को इस प्रस्ताव को एतराज नहीं है कि स्थानीय चुनाव की तारीख खिसका दी जाए। लेकिन उनका विरोधी खेमा इस प्रस्ताव से सहमत नहीं है। निर्वाचन आयोग ने इन चुनावों को अप्रैल-मई में कराने की योजना पेश की है। नेपाली कांग्रेस के महासचिव गगन थापा ने एक सार्वजनिक बयान में कहा है कि स्थानीय चुनाव को निर्वाचन आयोग की योजना के मुताबिक कराया जाना चाहिए, ताकि शासन के इस स्तर पर खालीपन पैदा ना हो।

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कई संवैधानिक और कानूनी विशेषज्ञों ने भी राय जताई है कि स्थानीय चुनाव अप्रैल-मई में कराना अनिवार्य है। इस मद्दे पर पैदा हुए भ्रम के बीच सत्ताधारी गठबंधन ने पिछले शुक्रवार को कहा था कि वह इस मामले में संवैधानिक विशेषज्ञों की राय लेगा। इस बीच एक राय यह भी जताई गई है कि संघीय, प्रांतीय, और स्थानीय- तीनों स्तरों के चुनाव को एक साथ ही कराए जाएं। सत्ताधारी दल के कुछ नेताओं ने इसके लिए सितंबर-अक्तूबर का समय सुझाया है।

नेपाली कांग्रेस के उपाध्यक्ष पूर्ण बहादुर खड़का ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘अलग-अलग स्तरों पर इस मुद्दे पर विचार-विमर्श चल रहा है। लेकिन इस बारे में कोई ठोस फैसला नेशनल असेंबली के चुनाव के बाद ही होगा।’ नेशनल असेंबली नेपाल की संसद का ऊपरी सदन है। उसके 19 सदस्यों के निर्वाचन के लिए मतदान 26 जनवरी को होगा। सत्ताधारी गठबंधन में शामिल पांचों पार्टियां ये चुनाव साझा तौर पर लड़ रही हैं।

पार्टी के अंदर एक राय नहीं

नेपाली कांग्रेस के कई नेताओं ने मीडिया से अलग-अलग बातचीत में इस बात की पुष्टि की है कि चुनाव के समय को लेकर पार्टी के अंदर एक राय नहीं है। संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक देश में संघीय, प्रांतीय और स्थानीय स्तर के चुनाव इस वर्ष की समाप्ति से पहले संपन्न कराना अनिवार्य है। 2017 में स्थानीय चनाव मई से सितंबर के बीच कराए गए थे। उस वर्ष संघीय और प्रांतीय चुनाव 26 नवंबर और सात दिसंबर को हुए थे।



बताया जाता है कि सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दोनों कम्युनिस्ट पार्टियां- माओइस्ट सेंटर और यूनिफाइड सोशलिस्ट चुनावों के लिए तैयार नहीं हैँ। इसलिए वे इसमें देर करना चाहती हैं। नेपाली कांग्रेस में इस मुद्दे पर अलग-अलग राय है। उधर विपक्षी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) जल्द से जल्द चुनाव की मांग कर रही है। उसका आरोप है कि सत्ताधारी गठबंधन जनता का सामना करने से डर रहा है।

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