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Nepal: प्रधानमंत्री प्रचंड के सामने अब संसद की कसौटी, 10 जनवरी को हासिल करेंगे विश्वास मत
Mon, 02 Jan 2023 02:48 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Mon, 02 Jan 2023 02:48 PM IST
सार
प्रचंड ने नाटकीय रूप से नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व से चुनाव पूर्व हुए गठबंधन से नाता तोड़ लिया था और विपक्ष के नेता केपी शर्मा ओली के साथ हाथ मिला लिया था।
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नेपाल के नए पीएम पुष्प कमल दहल।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
नेपाल के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड के सामने अब संसद की कसौटी होगी। वह 10 जनवरी, 2023 को अपना विश्वास मत हासिल करेंगे। संसद सचिवालय के प्रवक्ता रोजनाथ पांडेय ने बताया कि विश्वास मत को लेकर प्रधानमंत्री की ओर से एक पत्र भी संसद में भेजा गया है। बता दें, भारी बहुमत से प्रधानमंत्री नियुक्त होने के बावजूद प्रचंड को 30 दिन के भीतर निचले सदन से विश्वास मत प्राप्त करना होगा।
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दरअसल, नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने नवगठित कैबिनेट की सिफारिश पर 9 जनवरी 2023 को अगला सदन सत्र बुलाने का आह्वान किया है। 20 नवंबर को हुए चुनावों के बाद पहली बार प्रतिनिधि सभा और नेशनल असेंबली की बैठक होने जा रही है।
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नाटकीय रूप से प्रचंड बने थे पीएम
बता दें, बीते महीने ‘प्रचंड’ ने तीसरी बार नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। प्रचंड ने नाटकीय रूप से नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व से चुनाव पूर्व हुए गठबंधन से नाता तोड़ लिया था और विपक्ष के नेता केपी शर्मा ओली के साथ हाथ मिला लिया था। प्रचंड और ओली के बीच बारी-बारी से सरकार का नेतृत्व करने के लिए सहमति बनी है। प्रचंड को पहले प्रधानमंत्री बनाने पर ओली ने अपनी सहमति जताई थी।
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नेपाल के मंत्रिमंडल में तीन-उप प्रधानमंत्री
नए मंत्रिमंडल में तीन उप-प्रधानमंत्री हैं, जिनमें केपी शर्मा ओली के दल सीपीएन-यूएमएल से विष्णु पौडेल, सीपीएन-माओवादी सेंटर से नारायण काजी श्रेष्ठ और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) से रवि लामिछाने का नाम शामिल है। पौडेल को वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि श्रेष्ठ को बुनियादी ढांचा एवं परिवहन मंत्रालय और लामिछाने को गृह मंत्रालय सौंपा गया है। ओली की पार्टी से ज्वाला कुमारी, दामोदर भंडारी और राजेंद्र कुमार राय को मंत्री बनाया गया है। वहीं, जनमत पार्टी के अब्दुल खान को भी मंत्री बनाया गया।