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सियासत: ज्ञानेंद्र कट्टरपंथियों के सहारे राजशाही बहाली की ताक में; पूर्व राजा के खिलाफ बोला नेपाली नागरिक समाज
Tue, 25 Mar 2025 02:20 AM IST
ज्योति भास्कर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Tue, 25 Mar 2025 02:20 AM IST
सार
नेपाल की राजनीतिक गतिविधियां लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। ताजा घटनाक्रम में पूर्व राजा ज्ञानेंद्र पर कट्टरपंथियों के समर्थन से राजशाही बहाल करने की साजिश रचने का आरोप लगा है। ज्ञानेंद्र पर भारत के लोगों से समर्थन लेने का आरोप भी लगा है। आठ नागरिक समाज के नेताओं ने कहा है कि ऐसी हरकतों के कारण देश की संप्रभुता खतरे में पड़ जाएगी।
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नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र (फाइल)
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
नेपाल के नागरिक समाज के नेताओं के एक समूह ने सोमवार को राजशाही बहाल करने की कोशिश के लिए पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह की कड़ी आलोचना की। उन्होंने ज्ञानेंद्र पर इसके लिए भारत के धार्मिक कट्टरपंथियों का समर्थन लेने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि ज्ञानेंद्र भारत के राजनीतिक प्रतिष्ठानों से नेपाल में सिंहासन वापस पाने के लिए लॉबिंग कर रहे हैं।
खतरे में है नेपाल की संप्रभुता और स्वतंत्रता
पूर्व राजा ज्ञानेंद्र पर सनसनीखेज आरोप लगाने वाले नेताओं के इस समूह ने चेतावनी दी कि हिंदुवादी कट्टरपंथियों के समर्थन से राजशाही की वापसी नेपाल की संप्रभुता और स्वतंत्रता को कमजोर करेगी। आठ नागरिक समाज नेताओं ने एक संयुक्त बयान में कहा, ज्ञानेंद्र शाह का राजनीतिक सक्रियता में उतरना उनके पूर्वजों के राष्ट्र-निर्माण प्रयासों को कमजोर करता है। इससे नेपाल के कमजोर होने का खतरा पैदा होता है।
ज्ञानेंद्र संविधान, भारत के धार्मिक कट्टरपंथियों से ले रहे समर्थन
उन्होंने कहा, ऐसे समय में जब नेपाल के विदेशी मामले और पड़ोसी देशों के साथ संबंध सबसे कमजोर स्थिति में हैं, राजशाही समर्थक पक्ष देश को राजनीतिक रूप से खतरे में डालने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया गया कि ज्ञानेंद्र संविधान के खिलाफ, अवसरवादियों के लाभ के लिए अराजकता पैदा करने और भारत के धार्मिक कट्टरपंथियों के समर्थन से राजशाही बहाल करने के लिए सक्रिय हैं।
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खतरे में है नेपाल की संप्रभुता और स्वतंत्रता
पूर्व राजा ज्ञानेंद्र पर सनसनीखेज आरोप लगाने वाले नेताओं के इस समूह ने चेतावनी दी कि हिंदुवादी कट्टरपंथियों के समर्थन से राजशाही की वापसी नेपाल की संप्रभुता और स्वतंत्रता को कमजोर करेगी। आठ नागरिक समाज नेताओं ने एक संयुक्त बयान में कहा, ज्ञानेंद्र शाह का राजनीतिक सक्रियता में उतरना उनके पूर्वजों के राष्ट्र-निर्माण प्रयासों को कमजोर करता है। इससे नेपाल के कमजोर होने का खतरा पैदा होता है।
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ज्ञानेंद्र संविधान, भारत के धार्मिक कट्टरपंथियों से ले रहे समर्थन
उन्होंने कहा, ऐसे समय में जब नेपाल के विदेशी मामले और पड़ोसी देशों के साथ संबंध सबसे कमजोर स्थिति में हैं, राजशाही समर्थक पक्ष देश को राजनीतिक रूप से खतरे में डालने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया गया कि ज्ञानेंद्र संविधान के खिलाफ, अवसरवादियों के लाभ के लिए अराजकता पैदा करने और भारत के धार्मिक कट्टरपंथियों के समर्थन से राजशाही बहाल करने के लिए सक्रिय हैं।
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