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Nepal: नेपाल में ओली की सत्ता रहेगी बरकरार, प्रधानमंत्री केपी शर्मा ने 188 मतों से साबित किया बहुमत
Sun, 21 Jul 2024 06:55 PM IST
पवन पांडेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 21 Jul 2024 06:55 PM IST
सार
नेपाल के नवनियुक्त प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली ने रविवार को संसद में आसानी से विश्वास मत हासिल कर लिया। करीब एक सप्ताह पहले उन्होंने यूएमएल पार्टी के साथ गठबंधन कर देश में नई सरकार का गठन किया था।
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नेपाल के पीएम ने हासिल किया विश्वास मत
- फोटो : ANI
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विस्तार
नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में 188 वोट हासिल करके विश्वास मत जीत लिया है। बता दें कि उन्हें विश्वास मत जीतने के लिए 138 वोटों की जरूरत थी, जो उन्हें मिले वोटों से 50 ज्यादा है। जानकारी के मुताबिक संसद में मौजूद 263 सांसदों में से 188 ने विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि 74 ने इसके विरोध में मतदान किया वहीं एक सांसद ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।
केपी शर्मा ओली के लिए आसान था विश्वास मत
नेपाल के संविधान के अनुसार, के.पी. शर्मा ओली को नियुक्ति के 30 दिनों के भीतर संसद से विश्वास मत हासिल करना जरूरी था। करीब एक हफ्ते पहले नेपाल के दिग्गज कम्युनिस्ट नेता ने चौथी बार हिमालयी राष्ट्र के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्हें कैबिनेट के 21 अन्य सदस्यों के साथ पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई थी। बता दें कि 275 सदस्यों वाली नेपाल की संसद में सरकार को विश्वास मत के लिए 138 सदस्यों का वोट प्राप्त करना होता है। वहीं नए गठबंधन नेपाली कांग्रेस और सीपीएन-यूएमएल के पास कुल 167 सदस्य हैं। इसके अलावा इस गठबंधन को दो अन्य दलों का भी समर्थन प्राप्त है। जिनके पास 11 सदस्य हैं। देश की सबसे बड़ी पार्टी नेपाली कांग्रेस के पास 89 सीटें हैं, जबकि सहयोगी दल सीपीएन-यूएमएल के पास 78 सीटें हैं।
प्रचंड सरकार से ओली की पार्टी ने वापस लिया था समर्थन
वहीं इससे पहले नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-माओवादी सेंटर से केपी शर्मा ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-यूनिफाइड मार्क्सवादी लेनिनवादी (सीपीएन-यूएमएल) ने समर्थन वापस ले लिया था। इसके बाद संसद में विश्वास मत हारने के बाद पुष्प कमल दहल प्रचंड ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया था।
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दोनों पार्टियों के बीच में हुए ये अहम समझौते
नेपाल में हाल ही में पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की नेपाली कांग्रेस और ओली की सीपीएन-यूएमएल ने नया गठबंधन बनाया था। जिसमें दोनों नेताओं ने बारी-बारी से देश की सत्ता संभालने के लिए सहमति बनाई है। दोनों पार्टियों की बीच बनी सहमति में संसद के बचे हुए तीन साल के कार्यकाल को दोनों दलों के बीच साझा करना, मंत्रिस्तरीय विभाजन, प्रांतीय नेतृत्व की भूमिकाएं और प्रधानमंत्री पद के लिए रोटेशन शामिल है।
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केपी शर्मा ओली के लिए आसान था विश्वास मत
नेपाल के संविधान के अनुसार, के.पी. शर्मा ओली को नियुक्ति के 30 दिनों के भीतर संसद से विश्वास मत हासिल करना जरूरी था। करीब एक हफ्ते पहले नेपाल के दिग्गज कम्युनिस्ट नेता ने चौथी बार हिमालयी राष्ट्र के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्हें कैबिनेट के 21 अन्य सदस्यों के साथ पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई थी। बता दें कि 275 सदस्यों वाली नेपाल की संसद में सरकार को विश्वास मत के लिए 138 सदस्यों का वोट प्राप्त करना होता है। वहीं नए गठबंधन नेपाली कांग्रेस और सीपीएन-यूएमएल के पास कुल 167 सदस्य हैं। इसके अलावा इस गठबंधन को दो अन्य दलों का भी समर्थन प्राप्त है। जिनके पास 11 सदस्य हैं। देश की सबसे बड़ी पार्टी नेपाली कांग्रेस के पास 89 सीटें हैं, जबकि सहयोगी दल सीपीएन-यूएमएल के पास 78 सीटें हैं।
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प्रचंड सरकार से ओली की पार्टी ने वापस लिया था समर्थन
वहीं इससे पहले नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-माओवादी सेंटर से केपी शर्मा ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-यूनिफाइड मार्क्सवादी लेनिनवादी (सीपीएन-यूएमएल) ने समर्थन वापस ले लिया था। इसके बाद संसद में विश्वास मत हारने के बाद पुष्प कमल दहल प्रचंड ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया था।
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दोनों पार्टियों के बीच में हुए ये अहम समझौते
नेपाल में हाल ही में पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की नेपाली कांग्रेस और ओली की सीपीएन-यूएमएल ने नया गठबंधन बनाया था। जिसमें दोनों नेताओं ने बारी-बारी से देश की सत्ता संभालने के लिए सहमति बनाई है। दोनों पार्टियों की बीच बनी सहमति में संसद के बचे हुए तीन साल के कार्यकाल को दोनों दलों के बीच साझा करना, मंत्रिस्तरीय विभाजन, प्रांतीय नेतृत्व की भूमिकाएं और प्रधानमंत्री पद के लिए रोटेशन शामिल है।