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'रहने और पढ़ने कहां जाएं?': आशियाने पर चला बुलडोजर तो मासूम का छलका दर्द, पीएम बालेंद्र शाह को लिखी चिट्ठी
Thu, 14 May 2026 01:12 AM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, काठमांडू।
पीटीआई, काठमांडू।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 14 May 2026 01:12 AM IST
सार
नेपाल में जिस 'घंटी' की सरकार को जनता ने उम्मीद समझकर चुना, आज उसी ने मासूमों के सिर से छत छीन ली। राधिका का सवाल उस व्यवस्था के गाल पर तमाचा है, जो बस्तियां उजाड़कर शहरों को खूबसूरत बनाने का ख्वाब देखती है। अगर कंक्रीट के जंगल बसाने की होड़ और विकास की नींव में बच्चों के आंसू और बेघर परिवारों की आह हो, तो वह उन्नति नहीं बल्कि एक बड़ी मानवीय त्रासदी है। पड़ोसी मुल्क नेपाल में एक बार फिर बवाल मचा है। जानिए क्यों...
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बालेंद्र शाह ‘बालेन’
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
"हमारे परिवार ने चुनाव में आपके घंटी चुनाव चिन्ह पर वोट दिया था, फिर आपने हमारा घर क्यों तोड़ दिया? अब हम कहां रहेंगे और कहां पढ़ेंगे?" यह सवाल 11 साल की मासूम राधिका महतो का है। राधिका ने यह भावनात्मक पत्र नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह को लिखा है। काठमांडू में सुकुम्बासी यानी भूमिहीन बस्तियों पर चले सरकारी बुलडोजर ने राधिका जैसे हजारों बच्चों का भविष्य अधर में लटका दिया है। तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली राधिका का परिवार थपथली बस्ती में एक अस्थायी झोपड़ी में रहता था। अब वह बेघर है। राधिका ने अपने पत्र में लिखा कि उसके परिवार के पास कमरा किराए पर लेने के पैसे नहीं हैं। सरकार के इस कदम ने उनकी स्थिति को दयनीय बना दिया है।
75 किलोमीटर दूर भेजे गए परिवार, छूटी पढ़ाई
तीन हफ्ते पहले तक राधिका थपथली के पास गुहेश्वरी बाल शिक्षा माध्यमिक विद्यालय में पढ़ती थी। प्रशासन ने बस्ती उजाड़ने के बाद इन परिवारों को काठमांडू से करीब 75 किलोमीटर पूर्व बनेपा नगरपालिका के एक होल्डिंग सेंटर में भेज दिया है। इतनी दूरी होने के कारण राधिका की पढ़ाई पूरी तरह बंद हो गई है। उसने पत्र में गुहार लगाई है कि उन्हें रहने की जगह और पढ़ने के लिए स्कूल दिया जाए।
पखवाड़े भर में 15 हजार लोग बेघर
पिछले दो हफ्तों में सरकार ने काठमांडू में करीब 4,000 अवैध ढांचे गिरा दिए हैं। इस कार्रवाई से 15,000 से अधिक लोग बेघर हो गए हैं। सरकार का तर्क है कि ये निर्माण सार्वजनिक भूमि और नदियों के किनारे अवैध रूप से किए गए थे। सुधार के नाम पर हुई इस कार्रवाई का अब चौतरफा विरोध हो रहा है। मानवाधिकार कार्यकर्ता और विपक्षी दल सरकार पर बिना पुनर्वास के कार्रवाई करने का आरोप लगा रहे हैं।
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यह भी पढ़ें: नेपाल में नई सरकार का बड़ा कदम: चीन के साथ हुए समझौतों की जांच शुरू की, नई डील पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई बुलडोजर एक्शन पर रोक
विवाद बढ़ते देख मामला नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा। जस्टिस कुमार रेग्मी और नित्यानंद पांडे की पीठ ने शुक्रवार को अंतरिम आदेश जारी किया है। शीर्ष कोर्ट ने साफ कहा कि बिना उचित पुनर्वास योजना के किसी भी सुकुम्बासी को न हटाया जाए। अदालत ने चेतावनी दी कि सुरक्षा उपायों के बिना बेदखली जारी रखना एक मानवीय संकट पैदा कर सकता है। कोर्ट ने आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया है।
पोखरा तक पहुंची विरोध की आग
काठमांडू से शुरू हुआ यह गुस्सा अब पूरे नेपाल में फैल रहा है। पोखरा में भी सैकड़ों भूमिहीन लोगों ने मशाल जुलूस निकाला। प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ लोगों में भारी आक्रोश है।
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75 किलोमीटर दूर भेजे गए परिवार, छूटी पढ़ाई
तीन हफ्ते पहले तक राधिका थपथली के पास गुहेश्वरी बाल शिक्षा माध्यमिक विद्यालय में पढ़ती थी। प्रशासन ने बस्ती उजाड़ने के बाद इन परिवारों को काठमांडू से करीब 75 किलोमीटर पूर्व बनेपा नगरपालिका के एक होल्डिंग सेंटर में भेज दिया है। इतनी दूरी होने के कारण राधिका की पढ़ाई पूरी तरह बंद हो गई है। उसने पत्र में गुहार लगाई है कि उन्हें रहने की जगह और पढ़ने के लिए स्कूल दिया जाए।
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पखवाड़े भर में 15 हजार लोग बेघर
पिछले दो हफ्तों में सरकार ने काठमांडू में करीब 4,000 अवैध ढांचे गिरा दिए हैं। इस कार्रवाई से 15,000 से अधिक लोग बेघर हो गए हैं। सरकार का तर्क है कि ये निर्माण सार्वजनिक भूमि और नदियों के किनारे अवैध रूप से किए गए थे। सुधार के नाम पर हुई इस कार्रवाई का अब चौतरफा विरोध हो रहा है। मानवाधिकार कार्यकर्ता और विपक्षी दल सरकार पर बिना पुनर्वास के कार्रवाई करने का आरोप लगा रहे हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने लगाई बुलडोजर एक्शन पर रोक
विवाद बढ़ते देख मामला नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा। जस्टिस कुमार रेग्मी और नित्यानंद पांडे की पीठ ने शुक्रवार को अंतरिम आदेश जारी किया है। शीर्ष कोर्ट ने साफ कहा कि बिना उचित पुनर्वास योजना के किसी भी सुकुम्बासी को न हटाया जाए। अदालत ने चेतावनी दी कि सुरक्षा उपायों के बिना बेदखली जारी रखना एक मानवीय संकट पैदा कर सकता है। कोर्ट ने आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया है।
पोखरा तक पहुंची विरोध की आग
काठमांडू से शुरू हुआ यह गुस्सा अब पूरे नेपाल में फैल रहा है। पोखरा में भी सैकड़ों भूमिहीन लोगों ने मशाल जुलूस निकाला। प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ लोगों में भारी आक्रोश है।
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