नेपाल के ऐतिहासिक पशुपतिनाथ मंदिर को नौ महीने बाद श्रद्धालुओं के लिए खोला गया
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नेपाल के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर को नौ महीने बाद बुधवार को लोगों के लिए एक बार फिर से खोल दिया गया है। ट्रस्ट ने जानकारी देते हुए बताया कि कोरोना काल में सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने की वजह से मंदिर को बंद कर दिया गया था।
बता दें कि पशुपतिनाथ मंदिर नेपाल का सबसे बड़ा मंदिर है। यह बागमती नदी के किनारे स्थित है। नेपाल और भारत से हजारों लोग रोजाना इसके दर्शन के लिये आते हैं। नेपाल सरकार ने कोरोना वायरस की रोकथाम के लिये मार्च में लॉकडाउन लागू किया था। तब से मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर पाबंदी लगी थी।
पशुपति मंदिर एरिया ट्रस्ट के प्रमुख प्रदीप ढकाल ने कहा कि काठमांडू के बाहरी इलाके में स्थित मंदिर को फिर से खोलने के लिये विशेष सुरक्षा प्रबंध किये गए हैं। बुधवार को सैंकड़ों श्रद्धालु शिव मंदिर में प्रवेश के लिये इसके दक्षिणी द्वार पर कतारबद्ध नजर आए।
मंदिर में प्रवेश के दौरान श्रद्धालुओं लिये मास्क पहनना और हाथों को सैनिटाइज करना अनिवार्य किया गया है। इसके बाद उन्हें एक कक्ष से गुजरना होगा जहां, तापमान मापने वाले स्वचालित कैमरे लगे हुए हैं। मुख्य मंदिर परिसर में प्रवेश से पहले श्रद्धालुओं को तरल साबुन से अपने हाथ धोने होंगे।
ढकाल ने कहा कि श्रद्धालुओं को सभी स्वास्थ्य सुरक्षा नियमों का पालन करने के बाद मंदिर में प्रार्थना की अनुमति दी जाएगी।
विशेष पूजा, भजन की नहीं दी गई इजाजत
मंदिर बुधवार से खुलेगा, लेकिन अभी विशेष पूजा, भजन, गाने और अनुष्ठान गतिविधियों की तुरंत इजाजत नहीं दी गई है। प्रदीप ढकाल ने कहा कि कोरोना के चलते हम खुद को प्रतिबंधित करने के लिए मजबूर थे। हम धीरे-धीरे विशेष पूजा, भजन और अन्य अनुष्ठानों को शुरू करेंगे। हालांकि, मंदिर में स्वास्थ्य सुरक्षा प्रक्रियाओं को अपनाने के चलते इन्हें अभी बंद किया गया है।
9 महीने से बंद था मंदिर
हाल ही में विश्व हिंदू महासंघ के नेतृत्व में कई धार्मिक संगठनों ने पशुपति क्षेत्र में प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन किया था। संगठनों का कहना था कि मंदिर 9 महीने से बंद था, इसलिए भक्त मंदिर में पूजा के लिए नहीं जा पा रहे थे।
पशुपति एरिया डेवलपमेंट ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. मिलन कुमार थापा ने कहा कि कोरोना वायरस के जोखिम के बीच मंदिर काफी लंबे वक्त के बाद खोला जा रहा है, ऐसे में यहां विशेष सुरक्षा सतर्कता अपनाई जानी चाहिए। मंदिर बंद होने के चलते ट्रस्ट को 70 करोड़ नेपाली रुपये का नुकसान हुआ है। हालांकि, कोरोना के दौरान भी नियमित रूप से प्रार्थना, आरती, भोजन प्रसाद जैसे अनुष्ठान मंदिर में होते रहे।