नेपाल की संसद ने दी विवादित नक्शे को मंजूरी, भारत ने दिया सख्त जवाब
नेपाल की संसद में नए मानचित्र को शामिल करने के लिए पेश संवैधानिक संशोधन बिल शनिवार को पारित हो गया। नए मानचित्र में भारत के उत्तराखंड राज्य के तीन इलाकों कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को शामिल किया गया है। निचले सदन में विपक्षी नेपाली कांग्रेस और जनता समाजवादी पार्टी नेपाल ने संविधान की तीसरी अनुसूची में संशोधन से संबंधित सरकार के विधेयक का समर्थन दिया।
Nepal’s Parliament passes amendment to include the new map which includes Kalapani, Lipulekh and Limpiyadhura in the Constitution of Nepal. pic.twitter.com/ZnDR6F2boi
— ANI (@ANI) June 13, 2020विज्ञापन
नेपाली कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता पार्टी-नेपाल और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी समेत प्रमुख विपक्षी दलों ने नए विवादित नक्शे को शामिल करते हुए राष्ट्रीय प्रतीक को अद्यतन करने के लिए संविधान की तीसरी अनुसूची को संशोधित करने संबंधी सरकारी विधेयक के पक्ष में मतदान किया।
देश के 275 सदस्यों वाले निचले सदन में विधेयक को पारित करने के लिये दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। संसद ने नौ जून को आम सहमति से इस विधेयक के प्रस्ताव पर विचार करने पर सहमति जताई थी जिससे नए नक्शे को मंजूर किये जाने का रास्ता साफ हुआ।
विधेयक को नेशनल असेंबली में भेजा जाएगा, जहां उसे एक बार फिर इसी प्रक्रिया से होकर गुजरना होगा। सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के पास नेशनल असेंबली में दो तिहाई बहुमत है। नेशनल असेंबली को विधेयक के प्रावधानों में संशोधन प्रस्ताव, अगर कोई हो तो, लाने के लिये सांसदों को 72 घंटे का वक्त देना होगा।
नेशनल असेंबली से विधेयक के पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद इसे संविधान में शामिल किया जाएगा। सरकार ने बुधवार को विशेषज्ञों की एक नौ सदस्यीय समिति बनाई थी जो इलाके से संबंधित ऐतिहासिक तथ्य और साक्ष्यों को जुटाएगी।
कूटनीतिज्ञों और विशेषज्ञों ने सरकार के इस कदम पर सवाल उठाते हुए हालांकि कहा कि नक्शे को जब मंत्रिमंडल ने पहले ही मंजूर कर जारी कर दिया है तो फिर विशेषज्ञों के इस कार्यबल का गठन किस लिये किया गया?
भारत का जवाब
वहीं, नेपाल के इस कदम पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम इस मामले में अपना पक्ष साफ कर चुके हैं। इस तरह का कृत्रिम विस्तार ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं है। यह कदम सीमा मुद्दे पर आपसी बातचीत और समझ के खिलाफ भी है।
This artificial enlargement of claims is not based on historical fact or evidence and is not tenable. It is also violative of our current understanding to hold talks on outstanding boundary issue: Ministry of External Affairs https://t.co/tW9jfddhwW
— ANI (@ANI) June 13, 2020
सीमा विवाद के कारण तनावपूर्ण रिश्ते
भारत और नेपाल के रिश्ते सीमा विवाद के कारण तनावपूर्ण चल रहे हैं। भारत इस नक्शे पर लगातार आपत्ति जता रहा है। नेपाल ने यह विवाद तब शुरू किया, जब भारत ने कैलाश-मानसरोवर जाने वाले बीहड़ मार्ग पर सड़क बनाते हुए चीन सीमा तक गाड़ी से पहुंचने की उपलब्धि का उद्घाटन किया था। नेपाल का आरोप है कि भारत ने यह सड़क उसकी संप्रभुता वाले क्षेत्र में बनाई है। हालांकि भारत ने उसके दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया।
नेपाल ने लिपुलेख को अपना हिस्सा बताते हुए विरोध किया और 18 मई को नया नक्शा जारी किया। इसमें भारत के तीन इलाके लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को अपना हिस्सा बताया। नेपाल के इस कदम पर भारत ने साफ कर दिया है कि नेपाल का दावा ऐतिहासिक साक्ष्यों पर आधारित नहीं है। भारत के लगातार कड़े विरोध के बावजूद नेपाल अब इस नक्शे पर अड़ गया है।