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नेपाल: टूट के कगार पर एनसीपी, राजनीतिक संकट को भुनाने की कोशिश में लगा चीन

Fri, 10 Jul 2020 03:08 AM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: संजीव कुमार झा Updated Fri, 10 Jul 2020 03:08 AM IST
सार

  • ओली-प्रचंड एक हफ्ते बार बातचीत के बाद भी नहीं सुलझा पाए मतभेद
  • राजनीतिक संकट से उबरने के लिए आज फिर प्रस्तावित है पार्टी की बैठक
  • ओली की भारत विरोधी टिप्पणी लगातार उन पर भारी पड़ती जा रही है

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Nepal news, Nepal communist party about to split, Oli, Prachanda talks fail, Chinese diplomat hou yanqi becomes mediater
नेपाल राजनीतिक संकट

विस्तार

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल प्रचंड की बातचीत नाकाम होने के बाद सत्ताधारी पार्टी में टूट के प्रबल आसार दिखाई दे रहे हैं। इस बीच चीन भी पूरी ताकत से लगा हुआ है कि चीनी झुकाव वाली ओली की सरकार किसी प्रकार बची रहे। इसलिए नेपाल में चीन की राजदूत हो यांक्वी मध्यस्थता के लिए आगे आई हैं। अब ओली का भविष्य शुक्रवार को होने वाली नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) की अहम बैठक पर टिका हुआ है।

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ओली की भारत विरोधी टिप्पणी लगातार उन पर भारी पड़ती जा रही है। ओली की ही पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ द्वारा उनसे इस्तीफा मांगने के बाद दोनों नेताओं के बीच छह दौर की वार्ता लगातार नाकाम रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी के दोनों शीर्ष नेताओं में एक हफ्ते में छह से ज्यादा बैठकों के बाद भी मतभेद दूर नहीं हुए।
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वरिष्ठ नेताओं और पूर्व पीएम माधव कुमार नेपाल व झलनाथ खनाल समर्थित प्रचंड गुट, ओली के इस्तीफे की मांग पर अड़ा है। उन्होंने कहा कि ओली की हालिया भारत विरोधी टिप्पणी न तो सियासी रूप से सही है और न राजनयिक रूप से। एनसीपी के दो गुटों में मतभेद सत्ता के बंटवारे के मुद्दे को लेकर चरम पर हैं। द काठमांडो पोस्ट के मुताबिक, प्रचंड के साथ किसी तरह का विरोध-प्रदर्शन न करने के समझौते के बावजूद ओली समर्थकों ने बुधवार को देशभर में छिटपुट प्रदर्शन किए।
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पार्टी को भरोसे में नहीं लेते ओली
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम ओली को लेकर पार्टी में उनके विरोधियों ने कहा कि उनकी नाकामी का एक बड़ा कारण यह है कि वे पार्टी को भरोसे में लिए बिना फैसले लेते हैं। भारत और चीन के हाल के विवाद में उनका रवैया गलत था। भारत पर सरकार गिराने की साजिश रचने का आरोप लगाकर उन्होंने दो बातें साफ कर दीं। पहली, वे चीन की तरफ झुके हैं और दूसरी कि कुर्सी बचाने के लिए वे गलतबयानी कर रहे हैं।

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