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नेपालः मंत्री की बदजुबानी बनी देउबा सरकार की नई मुसीबत, बयान के खिलाफ देश भर के सामाजिक कार्यकर्ता लामबंद

Sat, 22 Jan 2022 03:25 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, काठमांडू
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, काठमांडू Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sat, 22 Jan 2022 03:25 PM IST
सार

पर्यवेक्षकों का कहना है कि देउबा सरकार कई राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। सत्ताधारी गठबंधन के भीतर जारी मतभेदों के कारण उसके लिए अहम मसलों पर फैसला लेना मुश्किल बना हुआ है।

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Nepal: Minister Renu Yadav speech became the new trouble of Deuba government social workers from across the country rallied against Renu
sher bahadur deuba - फोटो : pti

विस्तार

नेपाल सरकार में इन्फ्रास्ट्रक्चर और परिवहन मंत्री रेणु यादव की एक अशोभनीय टिप्पणी ने प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की सरकार के लिए नई परेशानी खड़ी कर दी है। यादव के बयान के खिलाफ देश भर के सामाजिक कार्यकर्ता लामबंद हो गए हैं। उन्होंने रेणु यादव को मंत्रिमंडल से तुरंत बर्खास्त किए जाने की मांग कर दी है। इतना ही नहीं, कार्यकर्ताओं ने यादव के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने की भी मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर ये मांगें नहीं मानी गईं, तो वे देश भर में आंदोलन शुरू कर देंगे।

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पर्यवेक्षकों का कहना है कि देउबा सरकार कई राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। सत्ताधारी गठबंधन के भीतर जारी मतभेदों के कारण उसके लिए अहम मसलों पर फैसला लेना मुश्किल बना हुआ है। इसके बीच सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनमत के लिए एक बड़े हिस्से की नाराजगी मोल लेना सरकार के लिए महंगा साबित हो सकता है। खास कर उस हाल में जब देश आम चुनाव के मोड में प्रवेश कर चुका है।  
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रेणु यादव ने 19 जनवरी को एक राजनीतिक कार्यक्रम में विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने अपने एक विरोधी की हत्या करवा देने तक की बात कही। इसके अलावा भी विरोधियों के लिए उन्होंने कई अभद्र बातें कहीं। यादव के भाषण का वीडियो 20 और 21 जनवरी को वायरल हुआ। उसके बाद से उन पर कार्रवाई की मांग उठने लगी है।
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वायरल वीडियो के मुताबिक रेणु यादव ने जनमत पार्टी के अध्यक्ष चंद्रकांत राउत का नाम लेकर उनके साथ 2007 में हुए गौर हत्याकांड को दोहराने की बात कही। उस हत्याकांड में शिकार बने लोगों को घेर कर मार डाला गया था। एक संघीय मंत्री के मुंह से ऐसी बात सुन कर लोग अचंभित रह गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों ने इस बारे में जारी अपने बयान में चेतावनी दी है कि एक मंत्री के ऐसी भाषा बोलने का नतीजा सामाजिक अशांति के रूप में सामने आ सकता है। 

उन्होंने इस बात पर हैरत जताई है कि वीडियो सारे देश में वायरल हो जाने के बावजूद प्रधानमंत्री देउबा ने इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। बयान में कहा गया कि रेणु यादव के ऐसी बात कहने के तीन दिन बाद तक सरकार ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। इससे यह सवाल उठा है कि क्या रेणु यादव सरकार के विचार को व्यक्त कर रही थीं और क्या सरकार का यही नजरिया है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ध्यान दिलाया है कि किसी सरकार का पहला कर्त्तव्य नागरिकों में यह भरोसा बंधाना है कि देश में कानून का राज है। बयान में कहा गया है कि शेर बहादुर देउबा को अवश्य ही आगे आकर इस जिम्मेदारी को निभाना चाहिए। रेणु यादव 2007 में मधेसी जनाधिकार फोरम पार्टी की नेता थीं। अब यह सवाल भी उठाया गया है कि क्या इस बयान के जरिए उन्होंने मान लिया है कि गौर हत्याकांड उनकी पार्टी ने करवाया था।


कई पत्रकारों ने भी अपनी टिप्पणियों में कहा है कि ऐसा बयान देने के बाद रेणु यादव मंत्री पद पर बने रहने लायक नहीं रह गई हैं। बल्कि इस बयान से उनकी आपराधिक मानसिकता सामने आई है।

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