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नेपाल: आर्थिक संकट के मंडराते बादलों के बीच ‘बिजली चमकने’ से राहत

Sat, 04 Jun 2022 04:10 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 04 Jun 2022 04:10 PM IST
सार

नेपाली मीडिया में छपी टिप्पणियों में कहा गया है कि जिस समय नेपाल विदेशी मुद्रा भंडार घटने से चिंतित है, वैसे मौके पर बिजली क्षेत्र में बेहतर हुई संभावनाओं से अच्छी खबर कोई और नहीं हो सकती थी। इस वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि की तुलना में नेपाल का व्यापार घाटा 268.26 अरब रुपये अधिक रहा है...

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nepal is planning to export the electricity to other countries
इलेक्ट्रिसिटी - फोटो : Amar Ujala (File Photo)

विस्तार

बढ़ते आर्थिक संकट के बीच नेपाल में बिजली निर्यात से भविष्य संवरने की उम्मीद जगी है। फिलहाल, आयात बिल बढ़ने के कारण देश का भुगतान संतुलन बिगड़ रहा है। नेपाल की अर्थव्यवस्था आयात पर निर्भर है। उसके विदेशी व्यापार में 90 फीसदी हिस्सा आयात का है, जबकि सिर्फ दस फीसदी हिस्सा निर्यात का है। लेकिन नेपाल के आर्थिक जानकारों का कहना है कि निकट भविष्य में ही ये सूरत बदल सकती है। इसकी वजह नेपाल से बिजली निर्यात की बढ़ रही संभावनाएं हैं।

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पिछले नवंबर में नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (एनईए) ने भारत को बिजली का निर्यात करने का समझौता किया था। इसमें तय हुआ था कि नेपाल ने अपने दो पनबिजली संयंत्रों से बिजली का निर्यात करेगा, जिससे उसे 18 करोड़ रुपये की आमदनी होगी। नेपाल ने त्रिशुली हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और देवीघाट हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से ये निर्यात इसी हफ्ते बुधवार से शुरू कर दिए हैं। इस बारे में जानकारी शुक्रवार को एनईए के प्रवक्ता सुरेश भट्टराई ने दी। उन्होंने कहा- ‘हमने 37.7 मेगावाट बिजली की बिक्री भारतीय खरीदारों को शुरू कर दी है।’ भट्टराई ने बताया कि नेपाल इतनी ही मात्रा में और बिजली का निर्यात करने में सक्षम है।

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भारत समेत कई देशों को करेगा निर्यात

विश्लेषकों के मुताबिक बीते अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के बीच बिजली क्षेत्र में सहयोग पर बनी सहमति के बाद नेपाल से भारत को बिजली निर्यात करने की संभावना और मजबूत हुई। अब नेपाल में ये उम्मीद मजबूत हुई है कि जल्द ही वह भारत के अलावा दूसरे दक्षिण एशियाई देशों को भी बिजली का निर्यात कर सकेगा।

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नेपाली मीडिया में छपी टिप्पणियों में कहा गया है कि जिस समय नेपाल विदेशी मुद्रा भंडार घटने से चिंतित है, वैसे मौके पर बिजली क्षेत्र में बेहतर हुई संभावनाओं से अच्छी खबर कोई और नहीं हो सकती थी। इस वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि की तुलना में नेपाल का व्यापार घाटा 268.26 अरब रुपये अधिक रहा है। इस अवधि में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में 18.2 फीसदी की गिरावट आई है। अप्रैल के मध्य में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में सिर्फ 9.61 बिलियन डॉलर ही रह गए थे।

विदेशी मुद्रा मिलने की उम्मीद

इस गंभीर सूरत को देखते हुए देउबा सरकार ने अगले पांच वित्त वर्षों के अंदर व्यापार संतुलन बहाल करने का लक्ष्य तय किया है। अधिकारियों का कहना है कि ये लक्ष्य बिजली के संभावित निर्यात से होने वाली आय के अनुमान पर निर्भर हैं। एनईए के प्रबंध निदेशक कुलमान घीसिंग ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘बिजली विदेशी मुद्रा कमाने का एक बड़ा स्रोत बन सकती है। नेपाल के लिए बिजली निर्यात के बाजार के खुलने की अभी शुरुआत भर हुई है।’



लेकिन स्वंतत्र विशेषज्ञों की राय है कि बिजली से व्यापार घाटा पाटने योग्य रकम कमा पाने में अभी नेपाल को लंबा वक्त लगेगा। दरअसल, अभी पिछले वित्त वर्ष तक नेपाल बिजली का आयात करता था। अभी पहली प्राथमिकता घरेलू जरूरतों को पूरा करने की है। इसलिए यह आकलन हकीकत के ज्यादा करीब है कि फिलहाल देश में पर्याप्त बिजली बनने से आयात पर होने वाला खर्च बचेगा। साथ ही निर्यात की शुरुआत से फिलहाल भले ही थोड़ी, लेकिन एक महत्त्वपूर्ण आमदनी होगी।

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