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नेपाल: एवरेस्ट पर चढ़ने का शुल्क 36 फीसदी बढ़ा, अब सिर्फ इन चीजें को ले जाने की होगी अनुमति
Thu, 23 Jan 2025 11:00 PM IST
राहुल कुमार
पीटीआई, काठमांडो
पीटीआई, काठमांडो
Published by: राहुल कुमार
Updated Thu, 23 Jan 2025 11:00 PM IST
सार
पर्वतारोहण नियमों के तहत वसंत ऋतु (मार्च-मई) में सामान्य दक्षिण मार्ग से एवरेस्ट पर चढ़ने वाले विदेशियों के लिए परमिट शुल्क मौजूदा 11,000 डॉलर प्रति व्यक्ति से बढ़ाकर 15,000 डॉलर कर दिया गया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : PTI
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विस्तार
दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत एवरेस्ट को फतह करने के इच्छुक विदेशी पर्वतारोहियों को 15,000 अमेरिकी डॉलर का परमिट शुल्क देना पड़ेगा। नेपाल ने माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए परमिट शुल्क 36 प्रतिशत तक बढ़ाने का फैसला किया है। ऐसे कई कदम दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर कचरा फैलने से रोकने के लिए उठाए गए हैं। संशोधित पर्वतारोहण नियमों के तहत वसंत ऋतु (मार्च-मई) में सामान्य दक्षिण मार्ग से एवरेस्ट पर चढ़ने वाले विदेशियों के लिए परमिट शुल्क मौजूदा 11,000 डॉलर प्रति व्यक्ति से बढ़ाकर 15,000 डॉलर कर दिया गया है। इसमें आखिरी बार संशोधन 1 जनवरी 2015 को हुआ था।
इसी तरह, शरद ऋतु (सितंबर-नवंबर) के लिए चढ़ाई का शुल्क 5,500 डॉलर से बढ़ाकर 7,500 डॉलर कर दिया गया है। वहीं, सर्दियों (दिसंबर-फरवरी) और मानसून (जून-अगस्त) के लिए प्रति व्यक्ति परमिट शुल्क 2,750 डॉलर से बढ़कर 3,750 डॉलर हो गया है। पर्यटन बोर्ड की निदेशक आरती न्यूपाने ने कहा, इस संबंध में कैबिनेट का निर्णय पहले ही हो चुका है, हालांकि आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
उन्होंने कहा, 8848.86 मीटर ऊंची चोटी पर चढ़ने के लिए नई दरें एक सितंबर 2025 से प्रभावी होंगी। नेपाल राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद कैबिनेट द्वारा अनुमोदित संशोधित नियम प्रभावी हो जाएंगे। उन्होंने कहा, शरद ऋतु के लिए एवरेस्ट पर चढ़ने के इच्छुक नेपाली पर्वतारोहियों के वास्ते परमिट शुल्क मौजूदा 75,000 रुपये से बढ़ाकर दोगुना यानी 1,50,000 रुपये कर दिया जाएगा।
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75 दिनों की परमिट अवधि 55 दिन की
एवरेस्ट चढ़ाई के लिए परमिट की 75 दिनों की अवधि को 55 दिन कर दिया जाएगा। दैनिक अखबार ‘काठमांडो पोस्ट’ के अनुसार, चढ़ाई की अवधि घटाने का मकसद गतिविधियों को सुव्यवस्थित करना है। पर्यटन मंत्रालय में संयुक्त सचिव इंदु घिमिरे ने कहा, वसंत 2025 के लिए पहले से ही स्वीकार की गई बुकिंग पर इस बदलाव का असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा, ऊंचाई वाले क्षेत्रों के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा और सरकारी राजस्व को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर इस बदलाव को किया गया है।
सूचीबद्ध वस्तुएं ही ले जा सकेंगे
नए नियमों के अनुसार पर्वतारोही अपने साथ सिर्फ वही वस्तु ले जा सकेंगे जो पर्यटन विभाग द्वारा जारी किए गए परमिट दस्तावेज में सूचीबद्ध होंगी। पिछले साल वसंत ऋतु में 421 परमिट जारी किए गए थे। दो सौ विदेशियों सहित लगभग 600 पर्वतारोही शिखर पर पहुंचे थे और लगभग 2,000 लोग आधार शिविर में जुटे। इस दौरान आठ पर्वतारोहियों की मौत की घटनाएं भी सामने आईं।
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इसी तरह, शरद ऋतु (सितंबर-नवंबर) के लिए चढ़ाई का शुल्क 5,500 डॉलर से बढ़ाकर 7,500 डॉलर कर दिया गया है। वहीं, सर्दियों (दिसंबर-फरवरी) और मानसून (जून-अगस्त) के लिए प्रति व्यक्ति परमिट शुल्क 2,750 डॉलर से बढ़कर 3,750 डॉलर हो गया है। पर्यटन बोर्ड की निदेशक आरती न्यूपाने ने कहा, इस संबंध में कैबिनेट का निर्णय पहले ही हो चुका है, हालांकि आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
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उन्होंने कहा, 8848.86 मीटर ऊंची चोटी पर चढ़ने के लिए नई दरें एक सितंबर 2025 से प्रभावी होंगी। नेपाल राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद कैबिनेट द्वारा अनुमोदित संशोधित नियम प्रभावी हो जाएंगे। उन्होंने कहा, शरद ऋतु के लिए एवरेस्ट पर चढ़ने के इच्छुक नेपाली पर्वतारोहियों के वास्ते परमिट शुल्क मौजूदा 75,000 रुपये से बढ़ाकर दोगुना यानी 1,50,000 रुपये कर दिया जाएगा।
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75 दिनों की परमिट अवधि 55 दिन की
एवरेस्ट चढ़ाई के लिए परमिट की 75 दिनों की अवधि को 55 दिन कर दिया जाएगा। दैनिक अखबार ‘काठमांडो पोस्ट’ के अनुसार, चढ़ाई की अवधि घटाने का मकसद गतिविधियों को सुव्यवस्थित करना है। पर्यटन मंत्रालय में संयुक्त सचिव इंदु घिमिरे ने कहा, वसंत 2025 के लिए पहले से ही स्वीकार की गई बुकिंग पर इस बदलाव का असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा, ऊंचाई वाले क्षेत्रों के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा और सरकारी राजस्व को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर इस बदलाव को किया गया है।
सूचीबद्ध वस्तुएं ही ले जा सकेंगे
नए नियमों के अनुसार पर्वतारोही अपने साथ सिर्फ वही वस्तु ले जा सकेंगे जो पर्यटन विभाग द्वारा जारी किए गए परमिट दस्तावेज में सूचीबद्ध होंगी। पिछले साल वसंत ऋतु में 421 परमिट जारी किए गए थे। दो सौ विदेशियों सहित लगभग 600 पर्वतारोही शिखर पर पहुंचे थे और लगभग 2,000 लोग आधार शिविर में जुटे। इस दौरान आठ पर्वतारोहियों की मौत की घटनाएं भी सामने आईं।