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केपी ओली बोले, नेपाल में अब और हिंसा नहीं, विप्लव ने कहा-हम मानेंगे शांति समझौता
Sat, 06 Mar 2021 02:38 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, काठमांडो।
एजेंसी, काठमांडो।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 06 Mar 2021 02:38 AM IST
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केपी शर्मा ओली
- फोटो : ANI
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नेत्र विक्रम चंद उर्फ विप्लव की अगुवाई वाले नेपाल के प्रतिबंधित माओवादी विद्रोही समूह कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-चंद गुट और नेपाल सरकार के बीच शुक्रवार को ऐतिहासिक शांति समझौते पर दस्तखत हो गए।
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इस अवसर पर प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कहा, नेपाल ने शांति के नए युग में प्रवेश कर लिया है। नेपाल में अब और हिंसा नहीं होगी। वहीं, नेपाल में हमलों, बम विस्फोट और वसूली को अंजाम देने वाले विप्लव ने कहा, हम शांति समझौते का पूरी तरह से पालन करेंगे।
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एक सार्वजनिक समारोह में इस समझौते पर ओली सरकार और विप्लव समूह ने औपचारिक तौर पर दस्तखत किया। पीएम ओली के अलावा नेपाल के गृह मंत्री राम बहादुर थापा भी इस अवसर पर मौजूद थे। यह समझौता बृहस्पतिवार को ही हुआ था। समझौते के तहत समूह अपने सभी राजनीतिक मुद्दों को बातचीत से सुलझाएगा और शांतिपूर्वक सभी राजनीतिक गतिविधियों को अंजाम देगा।
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बदले में सरकार ने समूह पर से पाबंदी हटाने, इसके नेताओं को रिहा करने और उनके खिलाफ सभी मामलों को वापस लेने का भरोसा दिया। विप्लव के समूह पर मार्च, 2019 में उस वक्त पाबंदी लगा दी गई थी, जब उसने काठमांडो में दो बम धमाके किए थे, जिसमें एक व्यक्ति की जान चली गई थी।
...तब थापा ने पकड़ा प्रचंड का दामन, जबकि विप्लव ने छेड़ दी थी जंग
विप्लव एक समय सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के अध्यक्ष रहे पुष्प कमल दहल प्रचंड के कमांडर थे। उस वक्त विप्लव ने यह कहकर प्रचंड का साथ छोड़ दिया कि उन्होंने जन युद्ध को बीच रास्ते में ही छोड़ दिया। विप्लव और थापा माओवादी पार्टी के अहम सदस्य थे, मगर दोनों ने ऐतिहासिक शांति समझौते के बाद 2012 में प्रचंड का साथ छोड़ दिया।
हालांकि, राजनीतिक मतभेदों के चलते विप्लव और थापा बहुत दिन तक साथ नहीं रह पाए। 2016 में थापा प्रचंड की पार्टी में शामिल हो गए और 2018 में उन्हें ओली सरकार में गृह मंत्री बना दिया गया।
गृह मंत्री बनने के एक दिन बाद ही थापा ने विप्लव के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करवा दिया था। अब तीन साल बाद शुक्रवार को फिर ऐसा संयोग बना कि थापा और विप्लव फिर एक ही मंच पर साथ नजर आए।