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Nepal Election: नेपाल में सीट बंटवारे के मुद्दे पर बढ़ता ही जा रहा है सत्ताधारी गठबंधन का सिरदर्द

Mon, 12 Sep 2022 03:23 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 12 Sep 2022 03:23 PM IST
सार

Nepal Election: नेपाल में अगले 20 नवंबर को आम चुनाव के लिए मतदान होगा। उस रोज संघीय संसद की प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली 165 और सात प्रांतीय असेंबलियों की ऐसी 330 सीटों के लिए वोट पड़ेंगे

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Nepal Election: Nepali Congress and alliance led task force submitted its report on September 8
Nepal Election: पुष्प कमल दहाल के साथ नेपाल के पीएम शेर बहादुर देउबा - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

नेपाल में सत्ताधारी गठबंधन में आम चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे के सवाल पर कड़वाहट बढ़ती जा रही है। नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले इस पांच दलों के गठबंधन ने सीटों का बंटवारा तय करने के लिए 11 सदस्यों का एक टास्क फोर्स बनाया था। टास्क फोर्स बीते आठ सितंबर को अपनी रिपोर्ट सौंप चुका है। बताया जाता है कि उसमें सीट आवंटन के लिए चार कसौटियां अपनाने का सुझाव दिया गया है। लेकिन उसने यह नहीं बताया है कि किस पार्टी को कितनी सीटें आवंटित की जानी चाहिए। इससे सीट बंटवारे का सारा सिरदर्द गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं पर आ पड़ा है।

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नेपाल में अगले 20 नवंबर को आम चुनाव के लिए मतदान होगा। उस रोज संघीय संसद की प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली 165 और सात प्रांतीय असेंबलियों की ऐसी 330 सीटों के लिए वोट पड़ेंगे। संसद की बाकी 110 सीटें और प्रांतीय असेंबलियों की 220 सीटें प्रत्यक्ष निर्वाचन में पार्टियों को मिले वोट फीसदी के अनुपात में आवंटित की जाएंगी।

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अखबार काठमांडू पोस्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं की बैठक शनिवार को हुई। लेकिन उसमें सीट बंटवारे पर कोई फैसला नहीं हो पाया। बताया जाता है कि इसका कारण पार्टियों का टास्क फोर्स की तरफ से सुझाई गई कसौटियों को मानने से इनकार देना है। टास्क फोर्स ने इन चार आधारों पर टिकट देने का सुझाव दिया हैः 2017 के आम चुनाव में प्रत्यक्ष निर्वाचन में मिली सीटों की संख्या, आनुपातिक प्रतिनिधित्व वाली मिली सीटों की संख्या, और पिछले मई में हुए स्थानीय चुनावों में पार्टियों को मिली सीटों की संख्या। इसके अलावा चौथी कसौटी के रूप में टास्क फोर्स कहा है कि सभी दलों के बड़े नेताओं को टिकट दिया जाना चाहिए।

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गठबंधन के सूत्रों ने मीडिया को बताया है कि सबसे ज्यादा दिक्कत मधेस प्रांत की सीटों के बंटवारे को लेकर आ रही है। इस प्रदेश में 32 संसदीय सीटें हैं। नेपाली कांग्रेस और जनता समाजवादी दल का यहां ज्यादातर सीटों पर दावा है। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) भी इस प्रांत में ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल करने के लिए जोर लगाए हुई हैँ। टास्क फोर्स के एक सदस्य ने काठमांडू पोस्ट से बातचीत में स्वीकार किया कि नेपाली कांग्रेस और जनता समाजवादी दल दोनों इस प्रांत में अपना दावा घटाने करने को तैयार नहीं हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक मधेस प्रांत में अब नेपाली कांग्रेस सबसे बड़ी ताकत है। इस साल हुए स्थानीय चुनावों में उसे मिले वोट प्रतिशत से यह बात साबित हो गई। इसके बावजूद जनता समाजवादी पार्टी पहले के अपने प्रदर्शनों के आधार पर खुद को सबसे बड़ी ताकत बता रही है। राजनीतिक विश्लेषक तुला नारायण शाह ने कहा है- ‘मधेसी राजनीति बिखरी हुई है। अगर सभी पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ें, तो संभवतया नेपाली कांग्रेस को सबसे ज्यादा सीटें मिलेंगी। लेकिन अगर दूसरे दल उसके विरोधी गठबंधन में शामिल हो गए, तो उसे नुकसान होगा।’

सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री देउबा ले-देकर समझौता करने के मूड में हैं। लेकिन उनकी नेपाली कांग्रेस में उनके विरोधी धड़े ने उनकी मुश्किल बढ़ा रखी है। शेखर कोइराला के नेतृत्व वाले इस धड़े ने चेतावनी दे रखी है कि नेपाली कांग्रेस को संसद की 100 सीटें नहीं मिलीं, तो यह उसे मंजूर नहीं होगा।

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