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क्या नेपाल में ओली को हटाकर प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं बामदेव गौतम

Tue, 03 Mar 2020 02:27 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 03 Mar 2020 02:27 PM IST
सार

  • पार्टी ने गौतम को नेशनल एसेंबली का सदस्य बनाया, चुनाव हार गए थे गौतम
  • कम्युनिस्ट पार्टियों को एक करने में अहम भूमिका थी पूर्व उप प्रधानमंत्री गौतम की
  • बामदेव गौतम ने खुल कर जताई है प्रधानमंत्री बनने की इच्छा
  • विरोधी गुट ने कहा-सत्ता के लिए कुछ भी कर सकते हैं बामदेव गौतम

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Nepal Communist Party Leader Bamdev Gautam want to replace PM KP sharma Oli
PM KP Sharma Oli and Bamdev Gautam - फोटो : Social Media

विस्तार

क्या नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता और उपाध्यक्ष बामदेव गौतम नेपाल के मौजूदा प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की जगह खुद प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं? वह पहले भी तीन बार नेपाल के उप प्रधानमंत्री रह चुके हैं और कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं, लेकिन पिछला चुनाव हारने के बाद बामदेव गौतम सदन के सदस्य नहीं रह गए और उनकी प्रधानमंत्री बनने की इच्छा पूरी नहीं हो सकी। अब पार्टी ने उन्हें फिर से नेशनल एसेंबली के लिए मनोनीत किया है और कोई अहम जिम्मेदारी देने जा रही है।
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बनेंगे नेशनल एसेंबली का मनोनीत सदस्य

पार्टी के उपाध्यक्ष बामदेव गौतम दो साल पहले तक पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद के मजबूत दावेदार थे। पार्टी के भीतर से लगातार यह आवाज उठ रही थी कि बामदेव गौतम को सत्ता में अहम जिम्मेदारी मिलनी चाहिए और इसके लिए पार्टी को कोई न कोई रास्ता निकालना चाहिए। अब पार्टी ने पिछले हफ्ते बामदेव गौतम को नेशनल एसेंबली का मनोनीत सदस्य बनाए जाने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है और उन्हें मौजूदा वित्त मंत्री युवराज खाटीवाड़ा की जगह सदन में लाने का फैसला किया है। युवराज खाटीवाड़ा का कार्यकाल तीन मार्च को खत्म हो रहा है।

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सीपीएन-यूएमएल को एकजुट करने में भूमिका

17 मई 2018 को जब नेपाल की दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों - सीपीएन-यूएमएल और सीपीएन (माओवादी सेंटर) में विलय हो गया था और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी का गठन हुआ था, तब यही शर्त रखी गई थी कि पहले तीन साल तक नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली रहेंगे, बाद में यह जिम्मेदारी पुष्पकमल दहल प्रचंड को दे दी जाएगी। दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों को एक करने में बामदेव गौतम ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी और उन्हें 2017 के चुनाव से पहले तक प्रधानमंत्री पद का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था।

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2017 में दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों ने मिलकर चुनाव लड़ा था और नेपाली कांग्रेस को जबरदस्त शिकस्त देते हुए दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों ने मिलजुल कर केपी शर्मा ओली के नेतृत्व में सरकार बनाई थी। उसके कुछ ही महीनों बाद दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों ने एक होने का फैसला किया और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी बनाई गई।

दरअसल नेपाल में लोकतंत्र बहाली और प्रचंड के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही कम्युनिस्ट पार्टी में आंतरिक संघर्ष शुरू हो गया था। प्रचंड के नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठने लगी थी और बाद में प्रचंड गुट ने सीपीएन (माओवादी सेंटर) बनाकर पार्टी तोड़ दी थी। इसका फायदा नेपाली कांग्रेस ने उठाया। आखिरकार 2017 आते-आते कम्युनिस्टों को फिर एक होने की जरूरत महसूस हुई।

पार्टी में पांचवे नंबर पर हैं गौतम

लेकिन सत्ता की जंग ऐसी है कि बामदेव गौतम गुट फिर से पार्टी पर हावी होने लगा। सरकार पर यह दबाव बनने लगा कि बामदेव गौतम को किसी भी तरह सरकार में होना चाहिए। पार्टी का एक गुट मानता है कि बामदेव गौतम ओली की जगह खुद प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं। गौतम के एक करीबी नेता बताते हैं कि वह पार्टी में काफी अहम हैसियत रखते हैं और वरिष्ठता में वह पार्टी के पांचवें बड़े नेता हैं। उन्होंने कभी अपनी यह इच्छा छुपाई नहीं कि वह प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं। अगर ऐसा है तो इसमें बुराई क्या है।

बालूवाटार में पिछले दिनों ओली, प्रचंड, माधव कुमार नेपाल, झालानाथ खनाल समेत पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेताओं ने बामदेव गौतम के योगदान और अनुभव को देखते हुए उन्हें नेशनल एसेंबली का सदस्य बनाए जाने का फैसला किया। अब सरकार संविधान में संशोधन लाकर यह प्रावधान करने वाली है कि नेशनल एसेंबली का सदस्य भी प्रधानमंत्री हो सकता है।

पहले खनाल खेमे में थे गौतम

नेपाल में दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों को एक करने और ओली और प्रचंड के खराब रिश्तों को ठीक करने में पुल का काम करने वाले गौतम पहले खनाल खेमे में थे, बाद में वो ओली के साथ आ गए। पार्टी सूत्र बताते हैं कि ओली को 2015 में प्रधानमंत्री बनाने वाले गौतम ही थे, लेकिन ओली ने सत्ता संभालते ही उन्हें दरकिनार कर दिया।

यहां तक कि 2017 के चुनाव में नेपाली कांग्रेस के उम्मीदवार से मात्र 758 वोटों से हार के लिए भी बामदेव गौतम ने ओली पर संदेह जताया था क्योंकि ओली ने उनके हार के लिए जांच समिति बनाने से मना कर दिया था।

बाद में गौतम ने प्रचंड के करीब रहना ज्यादा बेहतर समझा और ओली-प्रचंड के अंतर्विरोधों और अंदरूनी तकरार का फायदा उठाते हुए अब वे नेशनल एसेंबली के सदस्य बनने में कामयाब हो गए।

पार्टी सेंट्रल कमेटी के एक अहम सदस्य बिजय सुब्बा का कहना है कि गौतम सत्ता में बने रहने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं और प्रधानमंत्री बनने के लिए वह कोई भी दांव चल सकते हैं। सुब्बा का कहना है कि फिलहाल ऊपर से तो देखने में पार्टी में सब शांत और सर्वसम्मत लग रहा है, लेकिन कहीं ये तूफान से पहले की शांति न साबित हो जाए।

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