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Nepal: दो पूर्व प्रधानमंत्रियों से पूछताछ, भूमि घोटाले मामले में सीआईबी ने किए सवाल-जवाब; जानें पूरा मामला

Mon, 21 Aug 2023 06:08 PM IST
अभिषेक दीक्षित वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 21 Aug 2023 06:08 PM IST
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Nepal central probe agency interrogates 2 former prime ministers in Lalita Niwas land grab scam
नेपाल - फोटो : सोशल मीडिया

नेपाल की शीर्ष जांच एजेंसी ने देश के दो पूर्व प्रधानमंत्रियों माधव कुमार नेपाल और बाबूराम भट्टराई से पहली बार पूछताछ की। पूछताछ ललिता निवास भूमि घोटाले में कथित भूमिका को लेकर की गई है। यह पहला मौका है, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीआईबी) ने मामले में पूर्व प्रधानमंत्रियों के बयान लिए हैं। जांच एजेंसी ने सोमवार को इसकी जानकारी दी।

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क्या है मामला?
भूमि घोटाला उस वक्त हुआ, जब नेपाल और भट्टराई प्रधानमंत्री थे। उनके नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल ने इस मामले में नीति-स्तरीय निर्णय किए थे। सीआईबी के प्रवक्ता नवराज अधिकारी ने बताया कि घोटाले की जांच के सिलसिले में रविवार रात नेपाल और भट्टराई से पूछताछ की गई। आरोप है कि सरकार की कीमती जमीन का एक बड़ा हिस्सा कुछ दलालों ने फर्जी मालिक बनाकर हड़प लिया था। इसमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और कुछ राजनेताओं की मदद भी ली गई।
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दोनों पूर्व प्रधानमंत्रियों को जानिए
माधव कुमार नेपाल वर्तमान में सीपीएन (यूनिफाइड सोशलिस्ट) के अध्यक्ष हैं, जबकि भट्टराई नेपाल समाजवादी पार्टी के प्रमुख हैं। नेपाल 25 मई 2009 से 6 फरवरी 2011 तक प्रधानमंत्री पद पर रहे। वहीं, भट्टराई ने 29 अगस्त 2011 से 14 मार्च 2012 तक यह जिम्मेदारी संभाली।
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ललिता निवास में क्या-क्या?
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो ललिता निवास में लगभग 37 एकड़ भूमि शामिल है। इसमें प्रधानमंत्री निवास, नेपाल राष्ट्र बैंक का केंद्रीय कार्यालय और प्रमुख सरकारी अधिकारियों के कुछ अन्य आवास स्थित हैं। 

क्या हैं आरोप?
आरोप हैं कि नेपाल कैबिनेट ने सरकारी जमीन को निजी व्यक्तियों को सौंपने की अनुमति दी थी। इसके अलावा भट्टराई कैबिनेट ने पशुपति तिकिंचा गुथी नाम के फर्जी ट्रस्ट के नाम पर जमीन के पंजीकरण को मंजूरी भी दी थी। पांच फरवरी 2020 को कमीशन फॉर इन्वेस्टिगेशन ऑफ एब्यूज ऑफ अथॉरिटी (सीआईएए) ने मामले में 175 लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।

पहले क्या हुआ था?
इसके बाद संवैधानिक भ्रष्टाचार विरोधी निकाय ने पूर्व प्रधानमंत्रियों नेपाल और भट्टराई सहित कई प्रमुख लोगों को छोड़ दिया था। हालांकि, निकाय ने यह माना कि सरकारी भूमि को अवैध रूप से निजी हाथों में स्थानांतरित करने के निर्णय उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए थे। पूर्व प्रधानमंत्रियों को फंसाया नहीं गया, क्योंकि ये फैसले कैबिनेट के नीतिगत फैसले थे, जिस पर उसका कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।


बिशोम्भर प्रसाद श्रेष्ठ नेपाल के अगले मुख्य न्यायाधीश
इस बीच राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने बिशोम्भर प्रसाद श्रेष्ठ को नेपाल का अगला मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है। श्रेष्ठ की आज संसदीय सुनवाई हुई और सर्वसम्मति से उसका समर्थन किया गया।

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