{"_id":"5ef6f2bf8ebc3e42ea61107b","slug":"nepal-banning-hindi-language-in-nepali-parliament-kp-sharma-oli-blow-to-india-mps-asked-did-china-give-instructions","type":"story","status":"publish","title_hn":"नेपाली संसद में हिंदी पर रोक की तैयारी में पीएम ओली, सांसद ने पूछा- क्या चीन ने दिए निर्देश","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
नेपाली संसद में हिंदी पर रोक की तैयारी में पीएम ओली, सांसद ने पूछा- क्या चीन ने दिए निर्देश
Sat, 27 Jun 2020 12:49 PM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
Published by: अनवर अंसारी
Updated Sat, 27 Jun 2020 12:49 PM IST
विज्ञापन
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली
- फोटो : Social Media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेपाल और चीन की दोस्ती गहराती जा रही है और इसका असर नेपाल की सियासत पर दिख रहा है। दरअसल, नेपाल की संसद में हिंदी पर रोक की तैयारी की जा रही है, जिसको लेकर सांसदों ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से पूछा है कि क्या ऐसा चीन के निर्देश पर किया जा रहा है?
विज्ञापन
हालांकि, प्रधानमंत्री ओली सियासी बगावत से लगातार देश की जनता का ध्यान भटकाने में लगे हुए हैं। इसके लिए उन्होंने भारत के विरोध को हथियार बनाया है। दरअसल, वह नेपाल में एक नए राष्ट्रवाद का उदय करना चाह रहे हैं, ताकि उनकी पार्टी में उनके काम करने के तरीकों पर उठ रहे सवालों को खत्म किया जा सके। साथ ही विरोधियों को भी इसमें उलझाया जा सके।
विज्ञापन
नेपाली प्रधानमंत्री संसद में हिंदी भाषा को प्रतिबंधित करने पर विचार कर रहे हैं। नेपाल पहले ही भारत के साथ सीमा विवाद और नागरिकता के मुद्दे पर अपना रोष जता चुका है। लेकिन अब हिंदी भाषा को प्रतिबंधित करने पर प्रधानमंत्री को विपक्षी पार्टियों द्वारा घेरा जा रहा है।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: चीन के बाद अब नेपाल भी भारतीय सीमा तक बिछा रहा सड़कों का जाल, तेजी से हो रहा काम
जनता समाजवादी पार्टी की सांसद और मधेशी नेता सरिता गिरी ने सदन के अंदर इस मुद्दे पर जोरदार विरोध जताया। उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम तराई और मधेशी क्षेत्र में कड़े विरोध को जन्म दे सकता है। सांसद ने प्रधानमंत्री से पूछा है कि क्या ऐसा करने के लिए उन्हें चीन की तरफ से निर्देश दिए गए हैं। गौरतलब है कि कोरोना वायरस को लेकर जनता पहले से ही पीएम ओली से नाराज है।
आसान नहीं है हिंदी पर प्रतिबंध लगाना
बता दें कि, नेपाल में नेपाली भाषा के बाद सबसे ज्यादा मैथिली, भोजपुरी और हिंदी बोली जाती है। नेपाल के तराई इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच भारतीय भाषाएं प्रचलित हैं। इसे देखते हुए नेपाल सरकार द्वारा हिंदी को प्रतिबंधित करना कहीं से भी आसान नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में अगर सरकार हिंदी को प्रतिबंधित करने के लिए कानून पारित करती है, तो इसका विरोध देखने को मिल सकता है।
चीन ने किया नेपाल की जमीन पर अतिक्रमण, विपक्ष ने पेश किया प्रस्ताव
वहीं, इस मुद्दे पर अपनी ही पार्टी में नाराजगी का सामना कर रहे ओली पर अब विपक्ष ने भी हमला बोलना शुरू कर दिया है। विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने संसद के निचले सदन में चीन के अतिक्रमण को नियंत्रित करने का प्रस्ताव दिया है। प्रस्ताव के मुताबिक, चीन ने नेपाल के दोलका, हुमला, सिंधुपलचौक, संखूवसाभा, गोरखा और रसूवा जिलों में 64 हेक्टेयर की जमीन पर अतिक्रमण किया हुआ है।