Nepal Adipurush row: सुधरते रिश्तों पर साधा निशाना, नेपाल में ‘आदिपुरुष’ को भारत विरोधियों ने बनाया बहाना
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विस्तार
इस महीने के आरंभ में नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल की हुई भारत यात्रा से दोनों देशों के रिश्तों में हुए सुधार से विचलित ताकतें फिल्म आदिपुरुष के विरोध के नाम पर भारत विरोधी माहौल गरमाने की कोशिश में जुट गई हैं। राजधानी काठमांडो के सिनेमा घरों में न सिर्फ इस फिल्म पर, बल्कि सभी भारतीय फिल्मों को दिखाने पर रोक लगा दी गई है।
इस बार इस अभियान की शुरुआत काठमांडो के मेयर बालेंद्र शाह ने की, जो रविवार शाम तक काफी गरमा चुका था। शाह ने 15 जून को एक ट्वीट किया था, जिसमें फिल्म आदिपुरुष के निर्माता को इसमें शामिल एक संवाद को तीन दिन के अंदर ‘सुधारने’ की चेतावनी दी गई थी। रविवार को शाह ने भारत की सभी फिल्मों को यहां के सिनेमाघरों में दिखाने पर रोक लगा दी। उधर सोशल मीडिया पर आदिपुरुष फिल्म को लेकर भारत विरोधी राय जताई की होड़ लग गई है।
महाकाव्य रामायण पर बनी फिल्म आदिपुरुष का भारत में विरोध इसके संवाद की स्तरहीन भाषा को लेकर हो रहा है। लेकिन नेपाल में मुद्दा यह बनाया गया है कि फिल्म में जानकी (सीता) को भारत की बेटी बताया गया है। नेपाल का यह पुराना दावा है कि सीता का जन्मस्थान जनकपुर नेपाल में था। बालेंद्र शाह ने फिल्म निर्माता से इसी संवाद को सुधारने की चेतावनी दी थी।
रविवार को बालेंद्र शाह का ट्विट वायरल हो गया। हालांकि कई यूजर्स ने शाह के फैसले की आलोचना भी की है, लेकिन बड़ी संख्या में यूजर्स ने उनके रुख का समर्थन किया है। रविवार शाम तक शाह के ट्विट को लगभग दस लाख लोग देख चुके थे। भारतीय फिल्मों को दिखाने पर रोक का एलान शाह ने रविवार को ट्विटर और फेसबुक पर डाले गए अपने एक पोस्ट के जरिए किया। इसमें उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माता ने उनकी चेतावनी पर ध्यान नहीं दिया है, इसलिए काठमांडो मेट्रोपोलिटन क्षेत्र में सभी भारतीय फिल्मों को दिखाने पर रोक लग जाएगी। उन्होंने कहा कि नेपाल के संविधान के तहत स्थानीय सरकारों की भी यह जिम्मेदारी है कि वे ‘राष्ट्रीय हित’ की रक्षा करें। इसीलिए उन्होंने यह फैसला लिया है।
विश्लेषकों के मुताबिक फिल्म के संवाद लेखक मनोज मुंतशिर शुक्ला के एक मीडिया इंटरव्यू से नेपाल में भारत विरोधी भावनाएं भड़की हैं। शुक्ला ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में दावा किया कि नेपाल साल 20वीं सदी के आरंभिक वर्षों तक भारत का ही हिस्सा था।
शुक्ला ने कहा- ‘नेपाल में क्यों विरोध हो रहा है, यह मैं नहीं समझ पा रहा हूं। सीता के भारत की बेटी होने की बात जिस समय की है, उस समय नेपाल भारत का ही हिस्सा था। यह तो 1903 या 1904 में जाकर नेपाल भारत से अलग होकर एक अलग राष्ट्र बना।’
इस पर नेपाल की अखबारी टिप्पणियों में दावा किया गया है कि ऐसा कोई एतिहासिक दस्तावेज मौजूद नहीं है। काठमांडो पोस्ट की एक रिपोर्ट में कहा गया है- ‘ऐसा कोई दर्ज इतिहास नहीं है, जिससे मालूम हो कि नेपाल पर “कोई विदेशी” राज रहा हो।’