{"_id":"63ef2f1197150b1271005138","slug":"natural-infection-lowers-risk-of-hospitalisation-or-death-by-88-pc-for-at-least-10-months-lancet-study-2023-02-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"लैंसेट रिपोर्ट का दावा : कोरोना झेल चुके लोगों पर कम होता है संक्रमण का असर, 88% घट जाता है मौत का खोजिम","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
लैंसेट रिपोर्ट का दावा : कोरोना झेल चुके लोगों पर कम होता है संक्रमण का असर, 88% घट जाता है मौत का खोजिम
Fri, 17 Feb 2023 01:11 PM IST
हिमांशु मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Fri, 17 Feb 2023 01:11 PM IST
सार
ये भारत सहित 19 देशों के 65 अध्ययनों की रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। इस अध्ययन में संक्रमण, रोगसूचक रोग और गंभीर बीमारी के समय के आधार पर पिछले संक्रमण की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टीकाकरण के असर को भी शामिल किया गया है।
विज्ञापन
कोरोना संक्रमण को लेकर एडवायजरी जारी
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
लंदन से प्रकाशित होने वाली रिसर्च जनरल 'द लैंसेट' की एक रिपोर्ट में बड़ा दावा किया गया है। इसके अनुसार, एक बार कोरोना संक्रमित हो चुके लोगों पर नए मरीजों के मुकाबले संक्रमण का असर कम होता है। रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग पहले संक्रमित हो चुके हैं अगर उन्हें दोबारा कोरोना होता है तो उनपर 88 प्रतिशत मौत का जोखिम कम हो जाता है। यही नहीं, नए मरीजों के मुकाबले अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत भी कम से कम 10 महीने कम हो जाती है।
ये भारत सहित 19 देशों के 65 अध्ययनों की रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। इस अध्ययन में संक्रमण, रोगसूचक रोग और गंभीर बीमारी के समय के आधार पर पिछले संक्रमण की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टीकाकरण के असर को भी शामिल किया गया है।
रिपोर्ट में और क्या-क्या दावे हुए?
विज्ञापन
ये भारत सहित 19 देशों के 65 अध्ययनों की रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। इस अध्ययन में संक्रमण, रोगसूचक रोग और गंभीर बीमारी के समय के आधार पर पिछले संक्रमण की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टीकाकरण के असर को भी शामिल किया गया है।
विज्ञापन
रिपोर्ट में और क्या-क्या दावे हुए?
- प्री-ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमण के बाद से समय पर रिपोर्टिंग करने वाले 21 अध्ययनों के डेटा के विश्लेषण से अनुमान लगाया गया है कि प्री-ओमिक्रॉन वैरिएंट से पुन: संक्रमण के खिलाफ सुरक्षा एक महीने में लगभग 85 प्रतिशत थी और यह 10 महीनों में लगभग 79 प्रतिशत तक गिर गई।
- अध्ययन में कहा गया है कि ओमिक्रॉन बीए.1 से पुन: संक्रमण के खिलाफ पूर्व-ओमिक्रॉन प्रकार के संक्रमण से सुरक्षा कम थी। एक महीने में 74 प्रतिशत और लगभग 10 महीनों में तेजी से घटकर 36 प्रतिशत हो गई।
- अध्ययन में कहा गया है कि ओमिक्रॉन सब वैरिएंट विशेष रूप से बीए.2 और बीए.4/बीए.5 के खिलाफ सुरक्षा का मूल्यांकन करने वाले छह अध्ययनों ने महत्वपूर्ण रूप से कम सुरक्षा का सुझाव दिया।
विज्ञापन