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यूक्रेन संकट: पूर्वी यूरोप की नई सुरक्षा व्यवस्था बनाने के लिए मजबूर हुआ नाटो

Thu, 17 Feb 2022 05:41 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 17 Feb 2022 05:41 PM IST
सार

विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि नाटो के रक्षा मंत्रियों की ये बैठक रूस के यह कहने के बावजूद हुई कि वह यूक्रेन से लगी सीमा पर से अपने सैनिक दस्ते वापस बुला रहा है। लेकिन नाटो की बैठक में ये राय बनी कि अगर रूस अपने सैनिक वापस बुला लेता है, तब भी वह बिना कोई चेतावनी दिए यूक्रेन पर हमला बोलने में सक्षम बना रहेगा...

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NATO chief Jens Stoltenberg regrets that the use of force has become a common practice in Europe
रूस- यूक्रेन सीमा - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

हालांकि यूक्रेन विवाद में रूस ने तनाव घटाने के लिए कुछ कदम उठाने के संकेत दिए हैं, लेकिन अमेरिका और नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। पश्चिमी मीडिया में भी पहले बताया गया था कि रूस ने यूक्रेन सीमा से सैनिकों की वापसी शुरू कर दी है और क्राइमिया में अपने सैनिक अभ्यास को रोक दिया है। लेकिन अमेरिका और नाटो का कहना है कि उनके पास ऐसा होने की कोई पक्की जानकारी नहीं है। अपने इसी आकलन के आधार पर नाटो ने पूर्वी यूरोप में ‘आक्रमण रोकने और रक्षा’ के नए विकल्पों की तलाश शुरू कर दी है।

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नाटो प्रमुख ने कही ये बड़ी बात

नाटो के प्रमुख जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने नाटो देशों की सुरक्षा के लिए नए विकल्पों की तलाश करने का एलान करते हुए अफसोस जताया कि यूरोप में अब ताकत का इस्तेमाल एक आम बात बन गई है। नाटो के रक्षा मंत्रियों की बैठक में उन्होंने कहा- ‘रक्षा मंत्रियों ने फैसला किया है कि वे नाटो की आक्रमण रोकने और रक्षा की शक्ति को और मजबूत करने के तरीके खोजेंगे।’ विश्लेषकों ने कहा है कि इसके पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों यूरोप के लिए नई सुरक्षा व्यवस्था कायम करने की जरूरत बता चुके हैं। इस मकसद से फ्रांस ने रोमानिया में अपने सैनिक भेजने की पहल की है।

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नाटो के अधिकारियों ने कहा है कि रूस ने पूर्वी यूरोप में जैसे कदम हाल में उठाए हैं, उसे देखते हुए नई सैनिक तैयारी अब जरूरी हो गई है। रूस ने यह दिखा दिया है कि पूर्वी मोर्चे पर नाटो के सामने गंभीर संकट है। स्टोल्टेनबर्ग ने कहा- मास्को ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह यूरोप की उन बुनियादी सिद्धांतों को चुनौती देने के लिए तैयार है, जो दशकों से पश्चिम यूरोप की सुरक्षा का आधार रहे हैं।

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नाटो को अभी भी है ये डर

विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि नाटो के रक्षा मंत्रियों की ये बैठक रूस के यह कहने के बावजूद हुई कि वह यूक्रेन से लगी सीमा पर से अपने सैनिक दस्ते वापस बुला रहा है। लेकिन नाटो की बैठक में ये राय बनी कि अगर रूस अपने सैनिक वापस बुला लेता है, तब भी वह बिना कोई चेतावनी दिए यूक्रेन पर हमला बोलने में सक्षम बना रहेगा। उधर अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने बुधवार को कहा कि अमेरिका को रूसी सैनिकों की किसी ‘सार्थक वापसी’ के संकेत नहीं मिले हैं।


बताया जाता है कि अमेरिका और नाटो के अधिकारी अनेक रूसी विश्लेषकों के इस आकलन से भी परेशान हुए हैं कि ताजा विवाद में रूस अपना मकसद हासिल करने में सफल रहा है। ग्लोबल अफेयर्स जर्नल के रूस स्थित संपादक ग्लेन डायसेन ने एक टिप्पणी में लिखा है कि रूस की रक्षा संबंधी चिंताओं को नजरअंदाज करते हुए नाटो का विस्तार करने की नीति को ताजा विवाद के दौरान तगड़ा झटका लगा है।


उधर कुछ दूसरे रूसी विश्लेषकों ने कहा है कि पश्चिमी देशों का मकसद यूक्रेन संकट का शांतिपूर्ण समाधान निकालना नहीं है। बल्कि वे इसके बहाने रूस को घेरना चाहते हैं। लेकिन राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपनी ‘बुद्धिमत्तापूर्ण कूटनीति’ से फिलहाल उनके मकसद को नाकाम कर दिया है।

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