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NASA: नासा के सैटेलाइट ने पहली बार अंतरिक्ष से कैद की महासुनामी, वैज्ञानिकों की लहरों पर बेहतर हुई समझ
Sun, 03 May 2026 06:44 AM IST
Shivam Garg
अमर उजाला नेटवर्क, वॉशिंगटन
अमर उजाला नेटवर्क, वॉशिंगटन
Published by: Shivam Garg
Updated Sun, 03 May 2026 06:44 AM IST
सार
नासा और सीएनईएस के एसडब्ल्यूओटी सैटेलाइट ने पहली बार महासुनामी को अंतरिक्ष से स्पष्ट रूप में रिकॉर्ड किया है। इस अध्ययन से सुनामी की संरचना और पूर्वानुमान समझ में बड़ा बदलाव सामने आया है।
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- फोटो : NASA
विस्तार
प्रशांत महासागर में उठी एक विशाल सुनामी को पहली बार अंतरिक्ष से इतनी स्पष्टता में कैद किया गया है कि वैज्ञानिक भी हैरान रह गए हैं। नासा के अत्याधुनिक सैटेलाइट ने इन लहरों की ऐसी तस्वीरें दर्ज की हैं, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि सुनामी केवल एक सीधी, एकसमान लहर नहीं होती बल्कि रास्ते में बदलती हुई जटिल ऊर्जा का रूप ले लेती है।
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द सीस्मिक रिकॉर्ड के अनुसार यह ऐतिहासिक अवलोकन नासा और फ्रांस की स्पेस एजेंसी सीएनईएस के संयुक्त मिशन सरफेस वाटर एंड ओशन टोपोग्राफी (एसडब्ल्यूओटी) सैटेलाइट ने किया। इसने 29 जुलाई को रूस के कामचटका प्रायद्वीप के पास कुरिल- कामचटका सबडक्शन जोन में आए 8.8 तीव्रता के भूकंप से उत्पन्न सुनामी को विस्तार से रिकॉर्ड किया। यह भूकंप 1900 के बाद दर्ज सबसे बड़े भूकंपों में छठे स्थान पर है।
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नासा के अनुसार एसडब्ल्यूओटी सैटेलाइट को पृथ्वी के जल स्रोतों की सतह की ऊंचाई मापने के लिए विकसित किया गया है। पहले वैज्ञानिकों को सुनामी के बारे में जानकारी मुख्यतः डीप-ओशन असेसमेंट एंड रिपोर्टिंग ऑफ सुनामी (डीएआरटी) जैसे समुद्र में लगे उपकरणों से मिलती थी, जो केवल सीमित बिंदुओं पर डेटा देते थे। अब यह सैटेलाइट लगभग 120 किलोमीटर चौड़े क्षेत्र में समुद्र की सतह को एक साथ स्कैन कर सकता है, जिससे सुनामी की पूरी संरचना को समझना संभव हो पाया है।
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सुनामी पूर्वानुमान मॉडल में सुधार की जरूरत
नए सिमुलेशन, जिनमें लहरों के बिखराव को शामिल किया गया, वे वास्तविक आंकड़ों से अधिक मेल खाते हैं। इससे संकेत मिलता है कि मौजूदा सुनामी पूर्वानुमान मॉडल में महत्वपूर्ण सुधार की जरूरत है।
गतिशील प्रणाली है सुनामी
यूनिवर्सिटी ऑफ आइसलैंड के वैज्ञानिक एंजेल रुइज-एंगुलो ने इसे नई आंखों जैसा बताया है, जिससे समुद्र के विशाल क्षेत्र को एक साथ देखा जा सकता है। अब तक वैज्ञानिक मानते थे कि बड़ी सुनामी बिना टूटे एक ही लहर के रूप में आगे बढ़ती हैं। लेकिन इस घटना के डेटा ने इस धारणा को गलत साबित किया है। सैटेलाइट ने दिखाया कि सुनामी की ऊर्जा अलग-अलग दिशाओं में फैलती है और कई छोटी लहरों में विभाजित हो जाती है।
इस प्रक्रिया को डिस्पर्शन कहा जाता है। सरल शब्दों में सुनामी एक स्थिर लहर नहीं बल्कि लगातार बदलती हुई गतिशील प्रणाली है। जब वैज्ञानिकों ने इस नए डेटा की तुलना पारंपरिक कंप्यूटर मॉडल से की तो पाया कि पुराने मॉडल वास्तविक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शा पा रहे थे।
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