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NASA : नासा का दावा, जो धरती पर मुमकिन नहीं, वो चांद पर संभव, सीधे सूर्य से मिलेगी बिजली
Thu, 03 Nov 2022 07:06 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Thu, 03 Nov 2022 07:06 AM IST
सार
चंद्रमा पर एक बड़ी चुनौती ऊर्जा की आवश्यकता की पूर्ति की है। वहां बस्ती बनाने के योजनाओं की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। शोध एवं अन्य कार्यों के लिए स्थायी बेस बनाने की लिए काम चल रहा है।
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नासा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पृथ्वी पर अक्षय ऊर्जा का उपयोग कर उससे 100 प्रतिशत बिजली का उत्पादन व्यावहारिक नहीं है, लेकिन नासा के वैज्ञानिक का दावा है कि चंद्रमा पर यह बिलकुल संभव है। उन्होंने बताया कि कैसे चंद्रमा पर सौर ऊर्जा के बिना भंडारण के ही 100 प्रतिशत बिजली उत्पादन किया जा सकता है।
चंद्रमा पर एक बड़ी चुनौती ऊर्जा की आवश्यकता की पूर्ति की है। वहां बस्ती बनाने के योजनाओं की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। शोध एवं अन्य कार्यों के लिए स्थायी बेस बनाने की लिए काम चल रहा है। ऑक्सीजन की आवश्यकता की पूर्ति के लिए भी वहां के संसाधनों का दोहन भी ऊर्जा के एक अच्छे स्रोत की जरूरत होगी। नासा और अन्य कई देशों की स्पेस एजेंसियां इन समस्याओं को सुलझाने पर काम कर रही हैं। अभी तक सबसे सही हल सौर ऊर्जा ही लग रहा है।
हजारों टन ऑक्सीजन का उत्पादन संभव
चंद्रमा पर सूर्य के कई प्रमुख अक्षय ऊर्जा स्रोत हैं। यहां चुनौती यही है कि इस ऊर्जा को वहां बनने वाले बेस, बस्तियां या फैक्ट्रियों के लिए बारह महीने चौबीसों घंटों ऊर्जा की जरूरत है। इनमें प्रमुख रूप से हजारों टन में ऑक्सीजन का उत्पादन होगा जो ना केवल रॉकेट के ईंधन के रूप में उपयोग में लाई जाएगी, बल्कि वहां रहने वाले इंसानों के लिए भी सांस लेने में काम आ सकेगी।
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चंद्रमा पर एक बड़ी चुनौती ऊर्जा की आवश्यकता की पूर्ति की है। वहां बस्ती बनाने के योजनाओं की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। शोध एवं अन्य कार्यों के लिए स्थायी बेस बनाने की लिए काम चल रहा है। ऑक्सीजन की आवश्यकता की पूर्ति के लिए भी वहां के संसाधनों का दोहन भी ऊर्जा के एक अच्छे स्रोत की जरूरत होगी। नासा और अन्य कई देशों की स्पेस एजेंसियां इन समस्याओं को सुलझाने पर काम कर रही हैं। अभी तक सबसे सही हल सौर ऊर्जा ही लग रहा है।
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हजारों टन ऑक्सीजन का उत्पादन संभव
चंद्रमा पर सूर्य के कई प्रमुख अक्षय ऊर्जा स्रोत हैं। यहां चुनौती यही है कि इस ऊर्जा को वहां बनने वाले बेस, बस्तियां या फैक्ट्रियों के लिए बारह महीने चौबीसों घंटों ऊर्जा की जरूरत है। इनमें प्रमुख रूप से हजारों टन में ऑक्सीजन का उत्पादन होगा जो ना केवल रॉकेट के ईंधन के रूप में उपयोग में लाई जाएगी, बल्कि वहां रहने वाले इंसानों के लिए भी सांस लेने में काम आ सकेगी।
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