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बालों से घसीटा, 154 कोड़े और 44 साल की सजा: जेल में भी नहीं टूटीं नोबेल विजेता नरगिस मोहम्मदी; लिख डाली किताब

Sat, 19 Sep 2026 07:33 AM IST
राकेश कुमार एजेंसी, तेहरान/ओस्लो।
एजेंसी, तेहरान/ओस्लो। Published by: राकेश कुमार Updated Sat, 19 Sep 2026 07:33 AM IST
सार

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी ने ईरान की एविन जेल में बिताए समय और वहां हुई कथित यातनाओं को अपनी नई संस्मरण पुस्तक में दर्ज किया है। उनके अनुसार, जेल में उनके कई लिखे पन्ने जब्त या नष्ट किए गए, फिर भी उन्होंने लिखना जारी रखा। नरगिस को अब तक 44 साल से अधिक की जेल और 154 कोड़ों की सजा सुनाई जा चुकी है। उन्होंने महिला अधिकारों की लड़ाई जारी रखने की बात कही है।
 

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Narges Mohammadi Memoir Reveals Her Struggle And Torture In Iranian Prison
नरगिस मोहम्मदी - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

तेहरान की कुख्यात एविन जेल की ऊंची और अंधेरी दीवारों के पीछे जब कैदियों को मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ने के लिए डंडों से पीटा जा रहा था, तब नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी चुपचाप कागज के टुकड़ों पर एक इतिहास दर्ज कर रही थीं। कई बार सुरक्षाबलों ने पन्ने जब्त कर लिए, 20 से ज्यादा डायरियां हिंसा में खो गईं, लेकिन उन्होंने लिखना बंद नहीं किया।
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जेल से मिले अस्थायी मेडिकल पैरोल के दौरान नरगिस ने इन्हीं पन्नों को एक संस्मरण का रूप दिया है, ‘अ वुमन नेवर स्टॉप्स फाइटिंग’। उनकी यह किताब इसी महीने यूरोप के कई देशों में रिलीज हो रही है। सीएनएन को दिए एक बेहद बेबाक इंटरव्यू में 54 वर्षीय मानवाधिकार कार्यकर्ता ने जेल में दी जाने वाली अमानवीय यातनाओं और उन अधिकारियों के चेहरों को बेनकाब किया है जो इन अत्याचारों के लिए सीधे जिम्मेदार हैं। विभिन्न भाषाओं में अमन लिखे रंग-बिरंगे लिबास में महसा अमीनी की तस्वीर के आगे बैठीं नरगिस ने साफ कहा, इस किताब के बाद मुझे दोबारा जेल और गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं, लेकिन इस देश और इलाके में हमारे जीवन की यही कड़वी हकीकत है। इन जुल्मों का पर्दाफाश करना और सच को सामने लाना मेरा पहला फर्ज है।' 
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गिरफ्तारी के वक्त हुए थे बर्बर हमले
नरगिस मोहम्मदी फाउंडेशन के अनुसार, ईरानी शासन के खिलाफ मानवाधिकारों और महिला स्वतंत्रता की आवाज उठाने के लिए नरगिस को अब तक कुल मिलाकर 44 साल से अधिक की जेल और 154 कोड़ों की सजा सुनाई जा चुकी है। हालिया महीनों में उनके साथ हुई बर्बरता पर नार्वेजियन नोबेल कमेटी के अध्यक्ष जोर्गन वात्ने फ्राइडनेस ने रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया है कि गिरफ्तारी के दौरान डंडों और लाठियों से उनके सिर पर इतना मारा गया और उन्हें बालों से घसीटा गया कि उनके सिर में गहरे खुले घाव हो गए।
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दो माह का एकांत कारावास
घायल हालत में उन्हें दो महीने तक तन्हाई बैरक में रखा गया, जहां न तो उन्हें परिवार से मिलने की इजाजत थी और न ही अपने वकीलों या डॉक्टरों से बात करने की। मार्च में जेल के भीतर उन्हें संदिग्ध दिल का दौरा पड़ा। उनका वजन 20 किलोग्राम गिर गया। अत्यधिक मानसिक तनाव के कारण दिल की बीमारी गहराने पर उन्हें 18 दिन अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

जेल डायरी के बड़े खुलासे मानवीय गरिमा पर हमला
नरगिस की डायरी पन्नों ने कई खुलासे किए हैं जिनमें सीधा कत्ल करने के बजाय इंसान को मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक रूप से तिल-तिल कर तोड़ना, व्यक्ति की पहचान, मानवीय गरिमा और सोचने-समझने की क्षमता को पूरी तरह कुचल देना।

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आंदोलन पर कोई पछतावा नहीं: नरगिस
नरगिस ने कहा, अगर मुझे उस वक्त में वापस भेज दिया जाए जब मैंने अपनी लड़ाई शुरू की थी, और मुझे पहले से पता हो कि मेरे साथ क्या-क्या होने वाला है, तब भी मैं बिना झिझक संघर्ष का ही रास्ता चुनूंगी। लेकिन जब वे अपने 19 वर्षीय जुड़वां बच्चों,अली और कियाना (जो फ्रांस में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं), का जिक्र करती हैं, तो उनकी आवाज भर आती है। कहती हैं, जब मैं अली और कियाना को देखती हूं, तो मेरा मन गहरे संशय से भर जाता है।


ममता को कमजोरी बनाने की कोशिश भी कई बार
वर्षों तक अनके जुड़वां बच्चों की आवाज तक नहीं सुनने दी गई। मातृत्व की ममता को कमजोरी बनाकर संघर्ष से पीछे हटने पर मजबूर किया गया। उन्होंने लिखा है-अगर वक्त पलट जाए, तो फिर यही रास्ता चुनूंगी, लेकिन बच्चों को लेकर दिल में टीस है।

तानाशाही को पीछे धकेला
नरगिस के अनुसार, तेहरान और देश भर के शहरों की सड़कों पर महिलाएं आज भी जिस हिम्मत से सिर उठाकर चल रही हैं, वह दुनिया देख रही है। 'महिला, जिंदगी, आजादी' आंदोलन ने आम प्रदर्शनकारी को वह नैतिक ताकत और वैधता दी, जिसने बेरहम लाठीचार्ज, फांसी और गोलियों के बावजूद सरकार को कई मोर्चों पर पीछे हटने को मजबूर किया।
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