Biden-Modi Meeting: बाइडन से बोले पीएम मोदी- व्यापार में भारत और अमेरिका एक-दूसरे के पूरक, रिश्तों में अभिभावकता की भावना अहम
पीएम मोदी और बाइडन आज साझा हित के कई मूल्यों पर चर्चा की। दोनों देशों ने तालिबान से अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करना और काबुल की धरती को किसी देश को धमकाने, हमला करने या आतंकियों को शरण देने के लिए नहीं करने की अपील की है।
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विस्तार
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से पहली बार मुलाकात की। व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई। बातचीत के दौरान बाइडन ने मोदी की तारीफ की और कहा, "आपका स्वागत है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी। हम आपको काफी समय से जानते हैं। हमें खुशी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व्हाइट हाउस आए हैं। मोदी ने भी गर्मजोशी से स्वागत के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति का आभार जताया। मोदी ने कहा कि भारत और अमेरिका व्यापार में एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने महात्मा गांधी के अभिभावकता (ट्रस्टीशिप) के सिद्धांत का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका को भी इस भावना के साथ आगे आकर सहयोग करना होगा। इस दौरान तालिबान से भी अपनी धरती का इस्तेमाल आंतकवाद के लिए नहीं करने का आह्वान किया गया।
क्या रहा बाइडन का पूरा बयान?
मीडिया के सामने बाइडन ने कहा, "जैसा कि मैंने 2006 में उपराष्ट्रपति रहते हुए कहा था कि 2020 तक अमेरिका और भारत सबसे करीबी देश होंगे। मैं देख रहा हूं कि आपके नेतृत्व में भारत-अमेरिका संबंधों के विस्तार के बीज बोए गए हैं। मुझे लंबे समय से विश्वास है कि अमेरिका-भारत संबंध हमें कई वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने में मदद कर सकते हैं।" बातचीत के दौरान दोनों के बीच ठहाके भी लगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताया कि वे भारत के साथ कोविड-19, जलवायु परिवर्तन और इंडो-पैसिफिक मुद्दे पर काम करना चाहते हैं।
पीएम ने गर्मजोशी से स्वागत के लिए बाइडन का आभार जताया
उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बाइडन की ओर से गर्मजोशी से स्वागत किए जाने पर आभार जताया। मोदी ने कहा, "मेरे डेलिगेशन का इस तरह स्वागत करने के लिए धन्यवाद। पहले भी मुझे 2014 और 2016 में आपके साथ चर्चा करने का मौका मिला और उस समय आपने जिस तरह भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय रिश्तों के लिए अपना जो नजरिया साझा किया, उसके लिए मैं आपका शुक्रिया अदा करता हूं। आज आप भारत-अमेरिका के रिश्तों में की गई पहलों को लागू कर रहे हैं।"
#WATCH Prime Minister Narendra Modi receives a warm welcome from US President Joe Biden at the White House pic.twitter.com/SEp29Rrl5g
— ANI (@ANI) September 24, 2021
तालिबान से यूएनएससी के प्रस्ताव का पालन करने की अपील
भारत और अमेरिका ने तालिबान से अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करने और महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यक समूहों सहित सभी अफगानों के मानवाधिकारों का सम्मान करने का आह्वान किया है। साथ ही भारत-अमेरिका ने तालिबान से काबुल की धरती को किसी देश को धमकाने या हमला करने या आतंकियों को शरण देने के लिए नहीं करने की अपील की है। शुक्रवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद संयुक्त बयान जारी किया गया। इसमें तालिबान से यूएनएससी के प्रस्ताव 2593 (2021) का पालन करना करने की अपील की गई, जिसमें अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल कभी किसी देश को धमकाने, हमला करने या आतंकवादियों को शरण देने या प्रशिक्षित करने, या आतंकवादी हमलों की योजना बनाने या वित्तपोषित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
'भारत की प्रतिभाएं अमेरिका की विकास यात्रा में सहभागी हों, इसके लिए आपका योगदान अहम'
मैं देख रहा हूं कि यह दशक आपके नेतृत्व में जो बीज हम बोएंगे। यह पूरा दशक भारत, अमेरिका के संबंधों में, विश्व के लोकतांत्रिक देशों के लिए बदलाव वाला कालखंड रहेगा। मैं देख रहा हूं कि लोकतांत्रिक परंपराओं और मूल्यों को लेकर जो हम जी रहे हैं और जिसके प्रति हम समर्पित हैं, उस परंपरा का अपना महात्मय और अधिक बढ़ेगा। उसी प्रकार से आपने उल्लेख किया कि 40 लाख से ज्यादा भारतीय अमेरिका की विकास यात्रा में सहभागी है। इस दशक में टैलेंट का एक अपना महत्व है। पीपुल टू पीपुल ये टैलेंट इस दशक में बेहद प्रभावी भूमिका अदा करेगा। भारत के टैलेंट अमेरिका के विकास यात्रा में पूरी तरह सहभागी होती चली जाए, उसमें आपका योगदान काफी अहम है। इस दशक में भारत और अमेरिका के रिश्तों में तकनीक और वो भी पूरी मानवता के लिए उपयोगी हो, उस दिशा में हम टेक्नोलॉजी के माध्यम से बहुत बड़ी सेवा कर सकते हैं।
''व्यापार में अमेरिका और भारत एक-दूसरे के पूरक'
मोदी ने कहा, "उसी प्रकार से भारत और अमेरिका के बीच व्यापार का अपना महत्व है और इस दशक में व्यापार के क्षेत्र में हम एक दूसरे के पूरक हो सकते हैं। बहुत सी चीजें जो अमेरिका के पास हैं, वो भारत के काम आ सकती हैं, और जो चीजें भारत के पास हैं, वो अमेरिका के काम आ सकती हैं।"
'गांधीजी सरपरस्ती की बात करते थे, आज यह भारत-अमेरिका के रिश्तों के लिए अहम'
प्रधानमंत्री ने बाइडन की ओर से महात्मा गांधी के जिक्र पर भी बात की। उन्होंने कहा, "मिस्टर प्रेसिडेंट अभी आपने 2 अक्टूबर महात्मा गांधी की जन्मतिथि का जिक्र किया। महात्मा गांधी ट्रस्टीशिप (अभिभावकता या सरपरस्ती) की बात करते थे। यह दशक उस सरपरस्ती के लिए भी बहुत अहम है। महात्मा गांधी हमेशा इस बात की वकालत करते थे कि इस ग्रह के हम सरपरस्त हैं और हमने अपनी आने वाली पीढ़ी को सरपरस्त के तौर पर यह ग्रह उनके सुपुर्द करना होगा। यह सरपरस्ती की भावना भारत और अमेरिका के रिश्तों में एक अहमियत रखती है। महात्मा गांधी के आदर्शों की पूर्ति के लिए यह सरपरस्ती का सिद्धांत विश्व के हर नागरिक की जिम्मेदारी बनता जा रहा है।"
'भारत, अमेरिका एक-दूसरे और साथ में पूरी दुनिया के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं'
मोदी ने आगे कहा, "राष्ट्रपति जी कुछ विषयों का आपने उल्लेख किया। यह भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। आपने पदभार संभालने के बाद चाहे कोरोना हो, क्लाइमेट हो या क्वाड हो, सभी में एक जरूरी पहल की है। यह जो आपकी पहल है, ये आने वाले दिनों में बड़ा प्रभाव पैदा करेगी। मुझे विश्वास है कि आज की हमारी बातचीत में भी इन विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श कर के हम कैसे साथ चल सकते हैं। हम एक-दूसरे के लिए भी और दोनों मिलकर दुनिया के लिए भी क्या कुछ सकारात्मक कर सकते हैं। मुझे विश्वास है कि आपके नेतृत्व में आज की चर्चा बहुत सार्थक रहेगी।"
मोदी ने व्हाइट हाउस में रूजावेल्ट रूम की विजिटर्स बुक पर किए हस्ताक्षर
मोदी ने मीडिया के सामने बातचीत के बाद व्हाइट हाउस के रूजावेल्ट रूम की विजिटर्स बुक पर भी हस्ताक्षर किए। विदेश मंत्रालय ने इसका एक फोटो भी ट्वीट किया।
बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा
बता दें कि पीएम का काफिला भारतीय समयानुसार ठीक रात 8.33 पर अमेरिकी राष्ट्रपति भवन पहुंचा। दोनों ही नेता आज साझा हित के कई मूल्यों पर चर्चा की। बताया गया है कि प्रधानमंत्री को रिसीव करने के लिए व्हाइट हाउस के वेस्ट विंग में व्हाइट हाउस के कार्यकारी प्रोटोकॉल प्रमुख मौजूद रहीं। दोनों के बीच ओवल ऑफिस में करीब एक घंटे तक बैठक चली