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corona virus: ग्रीक देवी देवताओं के आधार पर रखे जा सकते हैं नए कोरोना वैरिएंट के नाम
Tue, 17 Aug 2021 08:58 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Tue, 17 Aug 2021 08:58 AM IST
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कोरोना वायरस(सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो :
pixabay
विस्तार
डब्ल्यूएचओ के सामने वायरस के स्वरूपों के नामकरण की चुनौती भी है। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि ग्रीक वर्णमाला के 24 शब्दों का इस्तेमाल पूरा होने के बाद तारा नक्षत्रों या ग्रीक देवी देवाताओं या पौराणिक आधार पर वायरस के नए स्वरूपों का नामकरण किया जा सकता है।
डब्ल्यूएचओ की टेक्निकल लीड और महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ. मारिया वैन केरखोवे का कहना है कि अंदेशा है कि आने वाले कुछ महीनों में वायरस के और स्वरूप सामने आ सकते हैं। इसी को ध्यान में रखकर वैरिएंट के नाम रखने पर भी मंथन जारी है।
वैज्ञानिक नाम नहीं बदले जा सकेंगे
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि ग्रीक वर्णमाला के अनुसार रखे गए वैरिएंट के नाम वैज्ञानिक नाम को बदल नहीं सकेंगे। ग्रीक वर्णमाला से तैयार नाम आमजन की सहूलियत के लिए रखे गए हैं क्योंकि वैज्ञानिक नाम समझना थोड़ा कठिन होता है। वैरिएंट के नाम आसान होंगे तो लोगों के बीच सतर्कता की भावना भी अधिक रहेगी।
देश से वैरिएंट की पहचान नहीं
डब्ल्यूएचओ ने स्पष्ट किया है कि वायरस के अलग अलग रूप अलग-अलग देशों में मिल रहे हैं। ऐसे में स्वरूप के नाम रखना जरूरी है, नहीं तो उनकी पहचान उस देश से की जा रही है, जहां वो पहली बार मिला था। ये न तो तर्कसंगत है और न ही उपयुक्त।
उत्पत्ति स्थान के आधार वायरस का नाम
वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस का नाम उसी स्थान के नाम पर रखा जाता रहा है, जहां उसकी उत्पत्ति हुई है। इबोला वायरस का नाम इबोला नदी के नाम पर रखा गया था। डब्ल्यूएचओ ने कोविड-19 नाम चीन के वुहान शहर से कोरोना को जोड़ने से बचाने के लिए दिया।